प्रयागराज. रविवार, 18 जनवरी 2026 (मौनी अमावस्या) को संगम स्नान के दौरान हुई पुलिसिया धक्का-मुक्की और समर्थकों पर लाठीचार्ज के विरोध में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अन्न-जल का त्याग कर दिया था।
प्रयागराज के माघ मेले में चल रहा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच का गतिरोध एक नए और पेचीदा मोड़ पर पहुँच गया है। पिछले 48 घंटों से अधिक समय तक अन्न-जल त्यागकर धरने पर बैठने के बाद, स्वामी जी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है।
1. अनशन की वर्तमान स्थिति
नवीनतम अपडेट के अनुसार, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पूर्णतः अन्न-जल त्यागने के निर्णय में थोड़ी ढील दी है, लेकिन उनका विरोध प्रदर्शन समाप्त नहीं हुआ है:
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तरल आहार (Liquid Diet): स्वामी जी ने पूर्ण अनशन के बजाय अब केवल तरल आहार (जैसे जल या जूस) लेने का निर्णय लिया है, जब तक कि प्रशासन उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं देता।
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पालकी पर धरना: उन्होंने घोषणा की है कि वे माघी पूर्णिमा तक अपनी पालकी (रथ) पर ही बैठे रहेंगे और जब तक प्रशासन माफी नहीं मांगता, तब तक उनका यह प्रतीकात्मक विरोध जारी रहेगा।
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2. विवाद की जड़: मौनी अमावस्या का हंगामा
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने 200 से अधिक समर्थकों के साथ रथ (पालकी) पर सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे।
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प्रशासन का तर्क: मेला प्रशासन ने भारी भीड़ और ‘नो व्हीकल जोन’ का हवाला देते हुए उन्हें पैदल जाने को कहा।
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स्वामी जी का आरोप: उनका कहना है कि उन्हें जानबूझकर अपमानित किया गया और उनके वृद्ध समर्थकों को पुलिस ने जूतों से मारा।
नया मोड़: प्रशासन ने भेजा कानूनी नोटिस
जहाँ एक ओर स्वामी जी माफी की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने उन्हें एक औपचारिक नोटिस थमा दिया है, जिसने आग में घी का काम किया है।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| नोटिस का आधार | सुप्रीम कोर्ट में लंबित सिविल अपील (3010/2020)। |
| प्रशासन का सवाल | जब कोर्ट ने ज्योतिष्पीठ के पट्टाभिषेक पर रोक लगा रखी है, तो आप ‘शंकराचार्य’ उपाधि का उपयोग कैसे कर रहे हैं? |
| जवाब की अवधि | प्रशासन ने उन्हें इस पर 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा है। |
| स्वामी जी की प्रतिक्रिया | उन्होंने कहा कि “हम शंकराचार्य हैं या नहीं, यह कोई PM या CM तय नहीं करेगा।” |
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