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राजस्थान अशांत क्षेत्र विधेयक 2026: क्या है भजन लाल सरकार का ‘डिस्टर्ब एरिया बिल’? जानें प्रावधान और प्रभाव

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राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा कैबिनेट बैठक के दौरान

रायपुर. भजन लाल शर्मा सरकार द्वारा लाया जा रहा ‘राजस्थान अशांत क्षेत्र विधेयक, 2026’ (Rajasthan Disturbed Areas Bill, 2026) राज्य की राजनीति और सामाजिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब इसे विधानसभा के आगामी बजट सत्र में पेश किया जाएगा।

यह कानून मुख्य रूप से गुजरात के ‘अशांत क्षेत्र अधिनियम’ (Disturbed Areas Act) की तर्ज पर तैयार किया गया है। यहाँ इस बिल के प्रमुख प्रावधानों और इसके संभावित सामाजिक-राजनीतिक प्रभावों की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:

📋 बिल के प्रमुख प्रावधान (Key Provisions)

इस विधेयक का आधिकारिक नाम ‘राजस्थान स्थावर संपत्ति के अंतरण का प्रतिषेध और परिसरों के किराएदारों की बेदखली के संरक्षण के लिए उपबंध विधेयक, 2026’ है।

  • अशांत क्षेत्र की घोषणा: सरकार किसी भी ऐसे क्षेत्र या वार्ड को ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित कर सकेगी जहाँ सांप्रदायिक तनाव, दंगे, भीड़ की हिंसा या ‘जनसंख्या असंतुलन’ (Demographic Imbalance) की स्थिति हो।

  • संपत्ति हस्तांतरण पर रोक: एक बार किसी क्षेत्र को ‘अशांत’ घोषित कर दिए जाने के बाद, वहाँ अचल संपत्ति (मकान, दुकान, जमीन) को कलेक्टर (District Magistrate) की अनुमति के बिना न तो बेचा जा सकेगा और न ही हस्तांतरित किया जा सकेगा। बिना अनुमति किया गया ऐसा कोई भी सौदा ‘शून्य’ (Null and Void) माना जाएगा।

  • सख्त सजा का प्रावधान: कानून का उल्लंघन करने पर 3 से 5 साल तक की जेल और आर्थिक दंड का प्रावधान है। यह एक गैर-जमानती (Non-bailable) और संज्ञेय अपराध होगा।

  • अवधि: किसी भी क्षेत्र को शुरुआत में 3 साल के लिए अशांत घोषित किया जा सकेगा, जिसे समीक्षा के बाद आगे बढ़ाया भी जा सकता है।

  • किराएदारों को सुरक्षा: यह बिल केवल संपत्ति की बिक्री पर ही नहीं, बल्कि अशांत क्षेत्रों में रह रहे किराएदारों को जबरन बेदखली से बचाने के लिए भी सुरक्षा प्रदान करता है।

🌍 सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव (Social & Political Impact)

सरकार का दावा है कि यह कानून ‘सोशल बैलेंस’ बनाए रखने के लिए है, जबकि विपक्ष इसे ध्रुवीकरण की राजनीति से जोड़कर देख रहा है।

1. पलायन पर लगाम (Prevention of Migration)

सरकार का तर्क है कि सांप्रदायिक तनाव वाले इलाकों में अल्पसंख्यक (इलाके के हिसाब से) आबादी को अपनी संपत्ति औने-पौने दामों में बेचकर भागने (Distress Sale) के लिए मजबूर किया जाता है। यह कानून ऐसी मजबूरी वाली बिक्री को रोकेगा।

2. जनसंख्या संतुलन (Demographic Balance)

बिल के प्रावधानों में ‘जनसंख्या असंतुलन’ शब्द का उपयोग किया गया है। सरकार का मानना है कि विशेष समुदायों की आबादी में अचानक वृद्धि से सामाजिक ढांचा प्रभावित होता है। इस कानून के जरिए सरकार समुदायों के “मिश्रण” और उनके फैलाव को प्रशासनिक स्तर पर नियंत्रित कर सकेगी।

3. सुरक्षा का भाव बनाम डर का माहौल

  • पक्ष: भाजपा सरकार का कहना है कि इससे जयपुर के पुराने शहर (Pink City) और सीमावर्ती जिलों में रहने वाले मूल निवासियों में सुरक्षा का भाव पैदा होगा।

  • विपक्ष: कांग्रेस और नागरिक अधिकार समूहों का आरोप है कि यह कानून ‘संवैधानिक अधिकारों’ (Right to Property) का उल्लंघन है और इससे समाज में विभाजन और अधिक गहरा होगा। इसे एक समुदाय विशेष को लक्षित करने वाले औजार के रूप में देखा जा रहा है।

4. रियल एस्टेट पर असर

अशांत क्षेत्रों में संपत्ति की खरीद-बिक्री के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया (कलेक्टर की मंजूरी) की जरूरत होगी, जिससे उन इलाकों में रियल एस्टेट बाजार की गति धीमी हो सकती है।

🏛️ वर्तमान स्थिति

कैबिनेट ने 21 जनवरी 2026 को इसे मंजूरी दे दी है। अब यह विधेयक राजस्थान विधानसभा में चर्चा और पारित होने के लिए रखा जाएगा। राजस्थान, गुजरात के बाद ऐसा सख्त कानून लाने वाला देश का दूसरा राज्य बनने की ओर है।

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