रविवार, जून 21 2026 | 03:24:04 PM
Breaking News
Home / ज्योतिष / चैत्र नवरात्रि 2026 चौथा दिन: मां कूष्माण्डा की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और मालपुआ भोग का महत्व

चैत्र नवरात्रि 2026 चौथा दिन: मां कूष्माण्डा की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और मालपुआ भोग का महत्व

Follow us on:

मां कूष्माण्डा अष्टभुजा देवी की फोटो।

नई दिल्ली. चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व का आज चौथा दिन है। आज रविवार, 22 मार्च 2026 को देवी दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्माण्डा की उपासना की जा रही है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था और चारों ओर अंधकार व्याप्त था, तब मां कूष्माण्डा ने अपनी ‘मंद मुस्कान’ से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसीलिए इन्हें आदिशक्ति और सृष्टि की जननी कहा जाता है।

📅 आज का शुभ मुहूर्त और पंचांग (22 मार्च 2026)

आज के दिन पूजा-अर्चना के लिए पंचांग के अनुसार निम्नलिखित समय विशेष शुभ हैं:

  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:04 बजे से 12:53 बजे तक।

  • चतुर्थी तिथि: आज रात 09:16 बजे तक रहेगी, इसके बाद पंचमी तिथि का आरंभ होगा।

  • अमृत काल: दोपहर 02:00 बजे से 03:30 बजे तक।

  • राहुकाल (वर्जित समय): शाम 05:02 बजे से 06:33 बजे तक (इस दौरान शुभ कार्य से बचें)।

चैत्र नवरात्रि 2026: जानें नौ दिनों का संपूर्ण कैलेंडर और महत्व

🟠 नारंगी रंग और ऊर्जा का संगम

नवरात्रि के चौथे दिन का विशेष रंग नारंगी (Orange) है।

  • महत्व: यह रंग उत्साह, ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक है।

  • परंपरा: भक्त आज के दिन नारंगी वस्त्र पहनकर माता की पूजा करते हैं, जो उनके भीतर सकारात्मक ऊर्जा और साहस का संचार करता है।

नवरात्रि में रंगों का महत्व: किस दिन पहनें कौन सा रंग?

🍯 मां का प्रिय भोग: मालपुआ

मां कूष्माण्डा को ‘कुम्हड़े’ (पेठा) की बलि और मालपुआ का भोग अत्यंत प्रिय है।

मान्यता: ऐसी श्रद्धा है कि आज के दिन माता को मालपुआ अर्पित करने से बुद्धि का विकास होता है और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। पूजा के बाद इस प्रसाद को ब्राह्मणों और जरूरतमंदों में बांटने का भी विशेष महत्व है।

मां चंद्रघंटा की पूजा विधि: नवरात्रि का तीसरा दिन

🙏 मां कूष्माण्डा की पूजा विधि और शक्तिशाली मंत्र

माता की आठ भुजाएं हैं, इसलिए इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। इनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृत कलश, चक्र और गदा सुशोभित हैं।

सिद्ध मंत्र:

पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप करना फलदायी माना जाता है:

या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

💡 पूजा से होने वाले लाभ

  1. उत्तम स्वास्थ्य: माता की भक्ति से पुराने रोगों से मुक्ति मिलती है।

  2. यश और बल: समाज में सम्मान और मानसिक शक्ति की प्राप्ति होती है।

  3. ग्रह शांति: मां कूष्माण्डा सूर्य मंडल के भीतर निवास करती हैं, अतः इनकी पूजा से कुंडली में सूर्य दोष भी शांत होता है।

निष्कर्ष:

आज का दिन आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत है। श्रद्धापूर्वक मां की आराधना करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन के सभी अंधकार दूर होकर प्रकाश का आगमन होता है।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

चैत्र नवरात्रि छठे दिन माँ कात्यायनी की शेर पर सवार चतुर्भुज प्रतिमा

Chaitra Navratri 2026 Day 6: आज माँ कात्यायनी की पूजा, जानें क्यों जरूरी है शहद का भोग और शुभ मुहूर्त

कानपुर | मंगलवार, 24 मार्च 2026 Chaitra Navratri 2026, Day 6: चैत्र नवरात्रि के छठे …