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बिहार में कार्रवाई: मुजफ्फरपुर से पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क का मोहरा मो. मुस्तफा गिरफ्तार, एटीएस का बड़ा खुलासा

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पुलिस मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान एडीजी विधि व्यवस्था सुधांशु कुमार

पटना । शुक्रवार, 22 मई 2026

बिहार में देश विरोधी ताकतों और सीमा पार बैठे हैंडलर्स के नापाक इरादों को नाकाम करते हुए बिहार पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। एटीएस की विशेष आसूचना इकाई को मिली गुप्त सूचना के आधार पर मुजफ्फरपुर जिले के रतनपुर गांव में एक ताबड़तोड़ छापेमारी की गई। इस गुप्त ऑपरेशन के दौरान देश की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने की साजिश रच रहे एक युवक मो. मुस्तफा (पिता: मो. सागीर) को धर-दबोचा गया है।

बिहार पुलिस मुख्यालय और एटीएस द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आरोपी के पास से भारी मात्रा में ऐसे डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए हैं, जो सीधे तौर पर भारत विरोधी गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं।

संवेदनशील ठिकानों की रेकी और भौगोलिक लोकेशन भेजने का आरोप

जांच एजेंसियों द्वारा मुस्तफा के मोबाइल और डिजिटल उपकरणों की शुरुआती फॉरेंसिक जांच में बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। आरोपी पर भारत के कई अत्यंत महत्वपूर्ण, रणनीतिक और संवेदनशील स्थानों की तस्वीरें व वीडियो चोरी-छिपे बनाने का आरोप है।

इतना ही नहीं, वह इन प्रतिबंधित और संवेदनशील क्षेत्रों की सटीक भौगोलिक लोकेशन (Geographical Location) भी सीमा पार बैठे अपने विदेशी आकाओं के साथ साझा कर रहा था। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सटीक लोकेशन शेयरिंग का इस्तेमाल देश के खिलाफ किसी बड़े रणनीतिक नुकसान या हमले की पृष्ठभूमि तैयार करने के लिए किया जा सकता था।

एन्क्रिप्टेड ऐप्स और सोशल मीडिया का चक्रव्यूह

पुलिस के तकनीकी विंग और एटीएस की जांच में यह साफ हो गया है कि मो. मुस्तफा साधारण कॉल्स के बजाय इंटरनेट मीडिया और हाई-लेवल एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स (जैसे व्हाट्सएप, टेलीग्राम या सिग्नल के सुरक्षित क्लोन) का इस्तेमाल करता था। इन ऐप्स के माध्यम से वह लगातार विदेशी नेटवर्क और हैंडलर्स के संपर्क में बना हुआ था ताकि सुरक्षा एजेंसियों की रडार से बचा जा सके।

बड़ी कामयाबी: एटीएस की टेक्निकल सेल ने आरोपी के मोबाइल से डिलीट किए जा चुके चैट्स, मिटाए गए बैकअप और एक्टिव मैसेजिंग एप्लिकेशन के गुप्त डेटा को सफलतापूर्वक रिकवर (वैज्ञानिक तरीके से बहाल) कर लिया है, जिससे जासूसी के पुख्ता प्रमाण मिले हैं।

पाकिस्तानी हथियार तस्कर ‘शहजाद भट्टी’ गैंग से जुड़े तार

इस पूरे मामले का सबसे खतरनाक पहलू इसका अंतरराष्ट्रीय हथियारों की तस्करी और स्लीपर सेल से जुड़ा होना है। जांच के दौरान मुस्तफा का सीधा संपर्क पाकिस्तान स्थित कुख्यात हथियार तस्कर शहजाद भट्टी और उसके एक मुख्य सहयोगी राणा हुनैन से पाया गया है।

मुजफ्फरपुर के एसएसपी कांतेश मिश्रा ने भी पुष्टि की है कि एटीएस ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। हालिया इनपुट के अनुसार, भट्टी का यह नेटवर्क सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी पैर पसार रहा है, जहां हवाला के जरिए फंडिंग किए जाने का शक है।

एटीएस की आगामी कार्रवाई और विदेशी फंडिंग की जांच

बिहार एटीएस ने आरोपी मो. मुस्तफा के खिलाफ जासूसी, देश विरोधी गतिविधियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित कई गंभीर कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अब जांच का दायरा निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित है:

  • यात्रा इतिहास (Travel History): आरोपी पिछले कुछ समय में किन-किन राज्यों या संवेदनशील इलाकों में गया था।

  • कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR): देश के भीतर उसके स्थानीय मददगार और स्लीपर सेल के अन्य सदस्यों की पहचान करना।

  • वित्तीय लेन-देन (Financial Investigation): क्या संवेदनशील डेटा भेजने के बदले उसे सीमा पार से कोई मोटी रकम या ‘विदेशी फंडिंग’ मिल रही थी।

बिहार पुलिस ने जनता से भी अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना एटीएस को दें। इस कार्रवाई से यह साफ है कि सुरक्षा एजेंसियां देश की संप्रभुता से खिलवाड़ करने वाले किसी भी नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं।

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