मुंबई | बुधवार, 22 जुलाई 2026
आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वित्तीय एवं कर विशेषज्ञों ने सभी करदाताओं को अपनी कर संबंधी जिम्मेदारियों को समय पर पूरा करने की सख्त सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम समय (Last Minute) तक इंतजार करने से न केवल पोर्टल पर भारी ट्रैफिक की वजह से सर्वर में देरी जैसी तकनीकी समस्याएं आ सकती हैं, बल्कि जल्दबाजी में दस्तावेजों के विवरण में अनजाने में कई बड़ी गलतियां भी हो सकती हैं।
1. तीन महत्वपूर्ण दस्तावेजों का मिलान (Reconciliation) है बेहद जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, विशेष रूप से वेतनभोगी (Salaried Individuals) और गैर-अंकेक्षण (Non-Audit) व्यक्तिगत करदाताओं को अपना रिटर्न भरने से पहले निम्नलिखित 3 दस्तावेजों का गहराई से मिलान कर लेना चाहिए:
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Form 16: यह आपके नियोक्ता (Employer) द्वारा दिया गया वह प्रमाणपत्र है जिसमें आपकी वर्षभर की कुल आय और काटे गए TDS की जानकारी होती है।
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Form 26AS: यह आपकी टैक्स पासबुक की तरह है, जो दर्शाता है कि सरकार के खाते में आपका कितना TDS/TCS जमा हो चुका है।
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Annual Information Statement (AIS): इसमें आपके बचत खाते के ब्याज, शेयर बाजार लेन-देन, म्यूचुअल फंड लाभांश और अन्य वित्तीय गतिविधियों का विस्तृत लेखा-जोखा होता है।
विशेषज्ञ सलाह: यदि Form 16, Form 26AS और AIS के आंकड़ों में कोई अंतर या मिसमैच (Mismatch) दिखता है, तो ITR फाइल करने से पहले ही संबंधित पोर्टल या कटौतिकर्ता (Deductor) के माध्यम से उसे सही करवा लें या फीडबैक दर्ज कर दें।
2. ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) के बिना अधूरा है रिटर्न
कई करदाता ITR फाइल करने और सबमिट बटन दबाने के बाद यह मान लेते हैं कि उनकी प्रक्रिया पूरी हो गई है, जबकि यह एक बड़ी भूल है।
आयकर विभाग के नियमों के अनुसार, ई-वेरिफिकेशन के बिना Income Tax Return की प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाती और इसे अमान्य घोषित किया जा सकता है। ITR दाखिल करने के निर्धारित दिनों के भीतर आधार ओटीपी (Aadhaar OTP), नेट बैंकिंग या ईवीसी (EVC) के माध्यम से इसका ई-वेरिफिकेशन अनिवार्य रूप से पूरा करें।
3. अंतिम तिथि विस्तार (Deadline Extension) की अटकलों से बचें
हर वर्ष अंतिम समय पर तिथि बढ़ाए जाने की अफवाहें और अटकलें तैरने लगती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि करदाताओं को किसी संभावित तिथि विस्तार पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। आधिकारिक घोषणा होने तक निर्धारित समय सीमा को ही अंतिम मानकर अपना रिटर्न समय पर दाखिल करना ही सबसे समझदारी भरा निर्णय है।
AY 2026-27 के लिए मुख्य देय तिथियां (Due Dates):
| करदाता श्रेणी | ITR फॉर्म | अंतिम तिथि |
| वेतनभोगी एवं व्यक्तिगत करदाता (Non-Audit) | ITR-1, ITR-2 | 31 जुलाई 2026 |
| गैर-ऑडिट व्यापार/पेशेवर (Non-Audit Business/Profession) | ITR-3, ITR-4 | 31 अगस्त 2026 |
| टैक्स ऑडिट वाले मामले (Tax Audit Cases) | ITR-3, ITR-5, ITR-6 | 31 अक्टूबर 2026 |
4. समय पर ITR दाखिल करने के बड़े फायदे
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त्वरित रिफंड (Faster Tax Refund): यदि आपका अतिरिक्त TDS कटा है, तो समय पर और सही मिलान के साथ भरा गया ITR आपके रिफंड को तेजी से आपके बैंक खाते में क्रेडिट करवाता है।
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धारा 234F के तहत पेनल्टी से बचाव: नियत तिथि बीतने के बाद विलंबित रिटर्न (Belated Return) भरने पर ₹1,000 से लेकर ₹5,000 तक की लेट फीस और ब्याज लग सकता है।
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अनावश्यक नोटिस से सुरक्षा: AIS और Form 26AS का सही मिलान करके सही जानकारी देने से भविष्य में आयकर विभाग से किसी प्रकार की जांच या नोटिस आने की संभावना न्यूनतम हो जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. क्या ITR सबमिट करने के बाद ई-वेरिफिकेशन तुरंत करना जरूरी है?
उत्तर: आप ITR सबमिट करने के तुरंत बाद या नियत समय सीमा के भीतर e-Verification कर सकते हैं। हालांकि, सबमिशन के तुरंत बाद आधार OTP के जरिए ई-वेरिफाई कर देना सबसे सुरक्षित रहता है।
Q2. अगर Form 16 और AIS में जानकारी मेल न खाए तो क्या करें?
उत्तर: यदि AIS में दिखाई दे रही कोई जानकारी गलत है या आपसे संबंधित नहीं है, तो आप इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर AIS सेक्शन में उस प्रविष्टि पर अपना Feedback दर्ज करा सकते हैं।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। कर संबंधी नियम, धाराएं और देय तिथियां व्यक्तिगत स्थितियों के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। अपना आयकर रिटर्न दाखिल करने या किसी भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले किसी योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या पंजीकृत टैक्स सलाहकार (Tax Consultant) से परामर्श अवश्य लें।
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