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कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे: ₹5,757 करोड़ का बजट मंजूर, मार्च 2026 से शुरू होगा निर्माण

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कानपुर रिंग रोड और कबरई माइनिंग हब कनेक्टिविटी।

कानपुर. उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर मानचित्र पर एक नया सितारा चमकने को तैयार है। कानपुर से बुंदेलखंड को जोड़ने वाला 112 किलोमीटर लंबा कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे अब अपनी कागजी कार्यवाही से निकलकर धरातल पर आने वाला है। फरवरी 2026 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए ₹5,757 करोड़ के भारी-भरकम बजट को अंतिम मंजूरी दे दी है।

यह हाईवे न केवल कानपुर और महोबा की दूरी कम करेगा, बल्कि यह लखनऊ से भोपाल के बीच एक ‘इकोनॉमिक कॉरिडोर’ के रूप में काम करेगा, जिससे 600 किमी का सफर महज 7-8 घंटे में पूरा हो सकेगा।

🏗️ 2026 का लेटेस्ट स्टेटस: टेंडर और निर्माण की तैयारी

परियोजना की वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) ने निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है।

  • टेंडर अपडेट: फरवरी 2026 के मध्य तक तकनीकी बोलियां (Technical Bids) खोली जा चुकी हैं।

  • निर्माण प्रारंभ: उम्मीद जताई जा रही है कि मार्च-अप्रैल 2026 तक मौके पर निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।

  • भूमि अधिग्रहण: कुल 1139 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है, जिसमें से 93 गांवों (कानपुर के 49, हमीरपुर के 35 और महोबा के 9) में अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

📍 रूट मैप और मुख्य विशेषताएं (At a Glance)

यह हाईवे पूरी तरह से एक्सेस-कंट्रोल्ड (Access-Controlled) होगा, जिसका अर्थ है कि इसमें केवल निश्चित स्थानों से ही प्रवेश और निकास मिलेगा, जिससे वाहनों की गति बाधित नहीं होगी।

मुख्य विशेषता विवरण (2026 डेटा)
प्रारंभिक बिंदु रमईपुर (कानपुर आउटर रिंग रोड)
अंतिम बिंदु कबरई (महोबा, मध्य प्रदेश सीमा के पास)
कुल लंबाई 112 किलोमीटर
अनुमानित लागत ₹5,757 करोड़
लेन की संख्या 4-लेन (6-लेन तक विस्तार योग्य)
एलीवेटेड सेक्शन हाईवे का एक बड़ा हिस्सा एलीवेटेड (ऊपर उठा हुआ) होगा।

🚛 यूपी की इकोनॉमी के लिए क्यों है ‘गेम-चेंजर’?

  1. माइनिंग हब की सीधी पहुंच: कबरई, जो अपने पत्थर और गिट्टी उद्योग के लिए विख्यात है, सीधे कानपुर के मैन्युफैक्चरिंग हब से जुड़ जाएगा। इससे निर्माण सामग्री की ढुलाई सस्ती और तेज होगी।

  2. कानपुर रिंग रोड से जुड़ाव: यह हाईवे कानपुर की प्रस्तावित 93 किमी लंबी 6-लेन रिंग रोड से जुड़ेगा, जिससे लखनऊ, दिल्ली और प्रयागराज जाने वाले वाहनों को शहर के जाम में नहीं फंसना पड़ेगा।

  3. औद्योगिक क्लस्टर: हाईवे के दोनों किनारों पर विशेष औद्योगिक क्षेत्र और वेयरहाउसिंग हब विकसित करने की योजना है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

🚦 पुराने रूट (NH-34) की समस्याओं से मिलेगा छुटकारा

वर्तमान में कानपुर से कबरई जाने के लिए भारी ट्रैफिक और संकरी सड़कों से गुजरना पड़ता है। खनन के ट्रकों की लंबी कतारों के कारण 130-150 किमी की दूरी तय करने में 5-6 घंटे लग जाते हैं। नया ग्रीनफील्ड हाईवे इस समय को घटाकर 2 घंटे से भी कम कर देगा।

विशेष नोट: हाल ही में घाटमपुर तहसील में किसानों ने मुआवजे की दरों को लेकर ज्ञापन सौंपा है। प्रशासन द्वारा ‘सर्किट रेट’ को तर्कसंगत बनाने पर चर्चा जारी है ताकि निर्माण में कोई बाधा न आए।

ग्रीन फील्ड फोरलेन हाईवे कानपुर से जुड़ी खबरें पढ़ें

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