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पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में लोकतंत्र का उत्सव: आजादी के बाद सबसे ऊंचा वोटिंग ग्राफ

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्ली | शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026

भारतीय चुनावी इतिहास में 23 अप्रैल, 2026 की तारीख स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए बताया कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुए मतदान ने आजादी के बाद के सभी पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जहाँ तमिलनाडु में मतदान का प्रतिशत 84.69% रहा, वहीं पश्चिम बंगाल के पहले चरण में यह आंकड़ा 91.78% तक जा पहुँचा।

प्रमुख आंकड़े और ऐतिहासिक संदर्भ

चुनाव आयोग के डेटा के अनुसार, यह भागीदारी पिछली कई दशकों की तुलना में अभूतपूर्व है। इससे पहले 2011 के चुनावों में इन राज्यों ने अपना उच्चतम स्तर छुआ था, लेकिन 2026 के विधानसभा चुनावों ने उस लक्ष्मण रेखा को भी पार कर लिया है।

राज्य2026 मतदान %पिछला रिकॉर्ड (2011)
पश्चिम बंगाल91.78%84.72%
तमिलनाडु84.69%78.29%

आधी आबादी का पूरा दम

इस बार के चुनावों की सबसे बड़ी विशेषता महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रही। आंकड़ों के अनुसार, दोनों राज्यों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों की तुलना में 1.5% से 2% अधिक दर्ज किया गया है। यह रुझान न केवल सामाजिक जागरूकता को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि महिला मतदाता अब ‘मूक’ नहीं रहीं और अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं।

भयमुक्त मतदान और सुरक्षा व्यवस्था

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने पुष्टि की कि 152 विधानसभा सीटों पर फैला यह विशाल मतदान शांतिपूर्ण रहा। आयोग ने इस बार 2.5 लाख से अधिक केंद्रीय सुरक्षा बलों (CAPF) की तैनाती की थी, जिससे मतदाताओं के मन में सुरक्षा का भाव पैदा हुआ।

“लोगों ने बिना किसी डर के वोट डाला। व्यवस्थाओं से मतदाता संतुष्ट दिखे और हिंसक घटनाएं नगण्य रहीं। यह निष्पक्ष चुनाव की जीत है।” — मनोज कुमार अग्रवाल, CEO पश्चिम बंगाल

संभावित सुधार और तथ्य जाँच (Fact Check)

यद्यपि शुरुआती रिपोर्ट्स में कुछ छिटपुट ईवीएम खराबी की खबरें आई थीं, लेकिन चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि 99.8% मतदान केंद्रों पर प्रक्रिया निर्बाध रही। “फेक न्यूज़” पर लगाम लगाने के लिए आयोग ने पहली बार AI-आधारित मॉनिटरिंग सेल का उपयोग किया, जिसने 11,000 से अधिक भ्रामक पोस्टों पर कार्रवाई की।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।