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मेंहदावल के श्री नगरवाली माता मंदिर का बदलेगा स्वरूप: ‘वंदन योजना’ से मिलेगी भव्यता

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ | शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026

संत कबीर नगर के मेंहदावल के प्रसिद्ध और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र श्री नगरवाली माता मंदिर के दिन अब बहुरने वाले हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ‘वंदन योजना’ के अंतर्गत मंदिर परिसर के सर्वांगीण विकास और सौंदर्यीकरण कार्य को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस घोषणा के बाद से ही स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं में हर्ष की लहर दौड़ गई है।

क्या है वंदन योजना और मंदिर का कायाकल्प?

उत्तर प्रदेश सरकार की ‘वंदन योजना’ का मुख्य उद्देश्य ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों पर पर्यटन और बुनियादी सुविधाओं को बढ़ावा देना है। नगरवाली माता मंदिर में इस योजना के तहत निम्नलिखित कार्य प्राथमिकता पर किए जाएंगे:

  • आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर: श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए चौड़े और सुव्यवस्थित मार्ग।

  • प्रकाश व्यवस्था: मंदिर की दिव्यता को रात में भी निखारने के लिए अत्याधुनिक फसाड लाइटिंग।

  • लैंडस्केपिंग: परिसर को हरा-भरा और शांतिपूर्ण बनाने के लिए विशेष उद्यानों का विकास।

  • श्रद्धालु सुविधा केंद्र: पेयजल (RO वाटर), विश्राम गृह और आधुनिक शौचालयों का निर्माण।

क्षेत्रीय विधायक अनिल त्रिपाठी की बड़ी उपलब्धि

मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए क्षेत्रीय विधायक अनिल त्रिपाठी लंबे समय से शासन स्तर पर पैरवी कर रहे थे। उन्होंने इसे मेंहदावल की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक ‘मील का पत्थर’ बताया।

“नगरवाली माता मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और नगर विकास मंत्री के सहयोग से अब यह स्थान पर्यटन के मानचित्र पर एक नई पहचान बनाएगा। जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।”अनिल त्रिपाठी, विधायक (मेंहदावल)

रोजगार और पर्यटन को मिलेगी नई गति

स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि सुविधाओं के विस्तार से पड़ोसी जनपदों (जैसे गोरखपुर, बस्ती और सिद्धार्थनगर) से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कम से कम 30-40% की वृद्धि होगी। इससे स्थानीय होटल, प्रसाद की दुकानों और परिवहन क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के सैकड़ों नए अवसर पैदा होंगे।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।