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पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद TMC में बड़ा विस्फोट: सांसद काकोली घोष दस्तीदार का इस्तीफा, ममता बनर्जी को दी ये नसीहत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कोलकाता । रविवार, 24 मई 2026

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में सत्ता गंवाने के बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर का असंतोष अब एक बड़े राजनीतिक भूकंप में बदल चुका है। पार्टी की सबसे वरिष्ठ और कद्दावर नेताओं में से एक, चार बार की सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तीदार ने बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया है।

रविवार को मध्यमग्राम स्थित जिला कार्यालय में एक आकस्मिक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर डॉ. दस्तीदार ने न सिर्फ अपने इस्तीफे का ऐलान किया, बल्कि पार्टी के मौजूदा तौर-तरीकों, आंतरिक भ्रष्टाचार और चुनावी रणनीतिकार फर्म आई-पैक (I-PAC) के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया।

‘लोकसभा चीफ व्हिप’ पद से हटाए जाने के बाद बढ़ी थी तल्खी

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तब शुरू हुई थी जब हाल ही में काकोली घोष दस्तीदार को लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के मुख्य सचेतक (Chief Whip) के पद से हटाकर कल्याण बनर्जी को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई थी। इसके तुरंत बाद सांसद ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा था, “1976 से परिचय, 1984 से साथ चलना शुरू… चार दशकों की वफादारी का आज मुझे इनाम मिला है।” इसके तुरंत बाद उनके घर के बाहर केंद्रीय बलों (Central Forces) की सुरक्षा बढ़ने से अटकलों का बाजार और गर्म हो गया था।

‘शहद इकट्ठा करने वाले नेताओं’ और I-PAC पर फूटा गुस्सा

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. काकोली ने नए नेताओं और बाहरी एजेंसियों के दखल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:

“मैं आई-पैक (I-PAC) जैसी एजेंसियों को काम पर नहीं रखती। हमने देखा है कि कैसे इन बाहरी कंपनियों के युवा लड़के-लड़कियां हमारे जैसे चौबीस घंटे काम करने वाले पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार करते हैं। मैं इस तरह की अपारदर्शिता और भव्यता (वीआईपी कल्चर) को स्वीकार नहीं कर सकती।”

उन्होंने 2011 में पार्टी के सत्ता में आने के बाद जुड़े नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग सिर्फ ‘शहद इकट्ठा करने’ आए हैं, वे आज फेसबुक पर बैठकर कुछ भी बोल रहे हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ममता बनर्जी की ‘वोट चोरी’ थ्योरी को नकारा

एक तरफ जहां टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी चुनाव में पराजय के बाद विपक्षी दलों पर ‘वोट चुराने’ या धांधली करने का आरोप लगा रही हैं, वहीं काकोली घोष दस्तीदार ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है, बेईमानी हुई है और कुछ नेताओं में भारी अहंकार आ गया था। लोकतंत्र में लोग इसे स्वीकार नहीं करते। जनता ने हमें नकारा है और हमें इसे स्वीकार करना होगा।”

पार्टी के राज्य अध्यक्ष सुব্রত बख्शी को भेजे अपने पत्र में उन्होंने ममता बनर्जी से अपील की है कि अगर पार्टी की छवि को सुधारना है, तो सोशल मीडिया पर चमकने वाली “भूइँफोड़ (फर्जी) संस्थाओं” के बजाय फिर से पुराने, वफादार और ईमानदार कार्यकर्ताओं को कमान सौंपनी होगी।

पेशे से डॉक्टर और जमीनी नेता हैं काकोली

पॉलिटिक्स में आने से पहले डॉ. काकोली घोष दस्तीदार एक जानी-मानी गाइनेकोलॉजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ) हैं। उन्होंने कोलकाता के आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज से अपनी MBBS की पढ़ाई पूरी की और बाद में लंदन के किंग्स कॉलेज से ऑब्सटेट्रिक अल्ट्रासाउंड में उच्च प्रशिक्षण लिया। वे लंबे समय तक तृणमूल महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।

इस बड़े इस्तीफे के बाद तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने फिलहाल इसे पार्टी का “अंदरूनी मामला” बताते हुए किसी भी तरह की आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनावी हार ने टीएमसी के भीतर ‘पुराने बनाम नए’ मॉडल की खाई को बहुत गहरा कर दिया है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।