शुक्रवार, सितंबर 18 2026 | 10:00:23 PM

केजीएमयू में मजारों पर एक्शन की तैयारी: एसटीएफ की जांच में बड़ा खुलासा, क्या ये थे धर्मांतरण के केंद्र?

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) लखनऊ में पिछले कुछ दिनों से भारी तनाव का माहौल है। मातृभूमि समाचार की इस रिपोर्ट में पढ़ें अवैध अतिक्रमण और कथित धर्मांतरण सिंडिकेट के खुलासे की पूरी कहानी।

1. 15 मजारों पर ‘बुलडोजर’ की तैयारी: प्रशासन का अल्टीमेटम

KGMU प्रशासन ने परिसर के भीतर बनी अवैध मजारों को हटाने के लिए अंतिम नोटिस जारी कर दिया है।

  • अल्टीमेटम: प्रशासन ने मजारों के प्रबंधकों (मुतवल्लियों) को 15 दिन का समय दिया है कि वे स्वयं इन अवैध ढांचों को हटा लें।

  • कारण: विभाग के विस्तार और नई निर्माण योजनाओं के लिए जमीन की आवश्यकता है। रिपोर्ट के अनुसार, कई मजारें पिछले 40 वर्षों से अवैध रूप से सरकारी जमीन पर काबिज हैं।

  • प्रभावित क्षेत्र: नेत्र रोग विभाग, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग और ऑर्थोपेडिक विभाग की जमीन पर ये मजारें बनी हुई हैं।

2. हिंदू संगठनों का विरोध और ‘धर्मांतरण’ का आरोप

विश्व हिंदू परिषद (VHP) और अन्य हिंदू संगठनों ने इस मामले को लेकर मोर्चा खोल दिया है। संगठनों का आरोप है कि:

  • ये मजारें केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि कथित धर्मांतरण (Love Jihad) और ‘ब्रेनवॉश’ का केंद्र बन गई थीं।

  • हाल ही में गिरफ्तार किए गए डॉ. रमीज और डॉ. नाईक पर एक हिंदू छात्रा के यौन शोषण और धर्म परिवर्तन के दबाव के आरोप लगे हैं।

  • हिंदू संगठनों का दावा है कि इन मजारों के बहाने बाहरी कट्टरपंथी मौलाना परिसर में आते थे और छात्रों को प्रभावित करते थे।

3. STF की जांच और ‘खुफिया लिस्ट’

यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) इस मामले की तह तक जा रही है।

  • जांच का दायरा: एसटीएफ को कई संदिग्ध चैट्स और इनपुट्स मिले हैं, जिनमें मेडिकल कॉलेजों से जुड़े कुछ डॉक्टरों के नाम शामिल हैं जो कथित तौर पर धर्मांतरण सिंडिकेट का हिस्सा हैं।

  • अवैध कब्जे: केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के अनुसार, करीब 30,000 वर्ग फुट की जमीन पर शाहमीना मजार के आसपास अवैध कब्जा है।

4. मुस्लिम धर्मगुरुओं की प्रतिक्रिया

दूसरी ओर, मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली जैसे धर्मगुरुओं ने इस नोटिस का विरोध किया है। उनका तर्क है कि ये मजारें दशकों पुरानी हैं और इनकी ऐतिहासिक मान्यता है। उन्होंने इसे ‘एकतरफा कार्रवाई’ बताते हुए मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील की है।

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।