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ज्ञान भारतम मिशन: प्रयागराज में सदियों पुरानी पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण शुरू, अब ऑनलाइन पढ़ सकेंगे दुर्लभ भारतीय विरासत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ.  प्रयागराज स्थित हिंदी साहित्य सम्मेलन में ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत दुर्लभ पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण का कार्य आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है। संस्कृति मंत्रालय की इस महत्वाकांक्षी पहल का उद्देश्य भारत की सदियों पुरानी ज्ञान विरासत को आधुनिक तकनीक के जरिए सुरक्षित और सुलभ बनाना है।

1. परियोजना की शुरुआत और लक्ष्य

  • प्रारंभिक चरण: हिंदी साहित्य सम्मेलन के ‘हिंदी संग्रहालय’ में डिजिटलीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अब तक लगभग 1,700 पन्नों को डिजिटल रूप में संरक्षित किया जा चुका है।

  • लक्ष्य: इस मिशन का व्यापक लक्ष्य देश भर में बिखरी हुई 1 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, दस्तावेजीकरण और डिजिटलीकरण करना है।

  • समझौता (MoU): इस परियोजना के लिए नई दिल्ली में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की उपस्थिति में हिंदी साहित्य सम्मेलन और संस्कृति मंत्रालय के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे।

2. डिजिटलीकरण की प्रक्रिया और तकनीक

  • औसत आकार: संग्रहालय के अधिकारियों के अनुसार, एक सामान्य पांडुलिपि में औसतन 100 पन्ने होते हैं।

  • हाई-टेक टूल्स: डिजिटलीकरण के लिए AI-आधारित उपकरणों और ‘हैंडरिटन टेक्स्ट रिकॉग्निशन’ (HTR) जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है ताकि भविष्य में इन ग्रंथों को न केवल देखा जा सके, बल्कि आसानी से सर्च भी किया जा सके।

  • निरीक्षण: ज्ञान भारतम प्रोजेक्ट के निदेशक अनिर्वाण दास और क्षेत्रीय समन्वयक श्रीधर बारीक जल्द ही हिंदी संग्रहालय का दौरा कर कार्य की गुणवत्ता और गति की समीक्षा करेंगे।

3. आम जनता और शोधकर्ताओं के लिए लाभ

  • पहुंच: डिजिटलीकरण के बाद ये दुर्लभ पांडुलिपियाँ ‘नेशनल डिजिटल रिपोजिटरी’ (NDR) के माध्यम से दुनिया भर के शोधकर्ताओं, विद्वानों और सामान्य पाठकों के लिए ऑनलाइन उपलब्ध होंगी।

  • निजी संग्रहकर्ताओं को निमंत्रण: सम्मेलन के वरिष्ठ अधिकारी कुंतक मिश्र के अनुसार, उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों के निजी पांडुलिपि धारक भी अपने संग्रह को डिजिटल कराने के लिए हिंदी साहित्य सम्मेलन से संपर्क कर सकते हैं।

4. ‘ज्ञान भारतम मिशन’ का महत्व

  • सांस्कृतिक पुनर्जागरण: यह मिशन बजट 2025-26 में घोषित एक राष्ट्रीय आंदोलन है, जो प्राचीन ज्ञान को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य से जोड़ता है।

  • संरक्षण: यह प्राचीन ग्रंथों को कीड़ों, नमी और समय के साथ होने वाले क्षरण (Deterioration) से बचाकर अनंत काल के लिए सुरक्षित कर देगा।

  • प्रमुख संस्थान: प्रयागराज के अलावा, यह मिशन कश्मीर विश्वविद्यालय, एशियाटिक सोसाइटी (कोलकाता) और नागरी प्रचारिणी सभा (वाराणसी) जैसे 17 से अधिक प्रमुख संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।