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ईरान-अमेरिका युद्ध: “अमेरिका खुद से ही बातें कर रहा है,” 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव पर ईरान का तीखा पलटवार

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तेहरान | बुधवार, 25 मार्च 2026

ईरान के सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक रिकॉर्डेड वीडियो में सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम जोल्फगारी ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की रणनीति मध्य-पूर्व में पूरी तरह विफल हो चुकी है और अब वह अपनी हार को छिपाने के लिए ‘समझौते’ का सहारा ले रहा है।

जोल्फगारी ने तंज कसते हुए कहा,

“जो देश खुद को महाशक्ति कहता था, वह आज इस दलदल से बाहर निकलने का रास्ता नहीं ढूंढ पा रहा है। अमेरिकी प्रशासन के आंतरिक मतभेद इतने गहरे हैं कि वे किसी और से नहीं, बल्कि ‘खुद से ही बातचीत’ कर रहे हैं। हमारे लिए उनके खोखले वादों का दौर अब खत्म हो चुका है।”

क्या है अमेरिका का 15-सूत्रीय ‘पीस प्लान’?

हालिया रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को एक विस्तृत शांति प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव की मुख्य शर्तें निम्नलिखित बताई जा रही हैं:

  1. परमाणु कार्यक्रम पर रोक: ईरान को अपने यूरेनियम संवर्धन (enrichment) को तुरंत बंद करना होगा।

  2. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए इस सामरिक जलडमरूमध्य को तुरंत खोलना।

  3. बैलिस्टिक मिसाइल: ईरान के लंबी दूरी के मिसाइल कार्यक्रम पर स्थायी प्रतिबंध।

  4. बदले में राहत: यदि ईरान इन शर्तों को मानता है, तो अमेरिका उस पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाने और बुशहर में नागरिक परमाणु ऊर्जा के विकास में मदद करने को तैयार है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता और ट्रम्प की डेडलाइन

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस बातचीत की मेजबानी करने की पेशकश की है, लेकिन ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबाफ ने स्पष्ट किया है कि ईरान “बिना शर्त और पूर्ण न्याय” से कम कुछ भी स्वीकार नहीं करेगा।

वहीं, वाशिंगटन से आ रही खबरों के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान को 27 मार्च 2026 तक का समय दिया है। यदि तब तक कोई ठोस प्रगति नहीं होती, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे (Power Plants) पर और बड़े हमले कर सकता है।

युद्ध का मैदान और वैश्विक असर

28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ यह संघर्ष अब अपने चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है।

  • हताहत: अब तक ईरान में 1,300 और लेबनान में 1,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

  • तेल संकट: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाधित होने से कच्चे तेल की कीमतें ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे भारत समेत पूरी दुनिया में महंगाई का खतरा बढ़ गया है।

  • सैन्य तैनाती: कूटनीति के बीच भी अमेरिका ने अपनी 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के 1,000 अतिरिक्त सैनिकों और मरीन यूनिट्स को क्षेत्र में तैनात करने का आदेश दिया है।

क्या युद्ध रुकेगा?

ईरान के ताज़ा बयान “हम कभी समझौता नहीं करेंगे” से यह स्पष्ट है कि फिलहाल कूटनीति बैकफुट पर है। ईरान इसे अपने अस्तित्व की लड़ाई मान रहा है, जबकि अमेरिका इसे क्षेत्र में अपनी साख और इजरायल की सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है। आने वाले 48 घंटे मध्य-पूर्व के भविष्य के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।

मुख्य बिंदु:

  • ईरान ने अमेरिका के 15-सूत्रीय संघर्ष-विराम (Ceasefire) प्रस्ताव को ‘विफलता’ बताकर ठुकराया।

  • पाकिस्तान के माध्यम से भेजा गया था शांति प्रस्ताव, लेकिन ईरान समझौते के मूड में नहीं।

  • ट्रम्प प्रशासन ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) खोलने के लिए 27 मार्च तक की दी डेडलाइन।

  • युद्ध के 26वें दिन भी तनाव चरम पर; तेल की कीमतों में वैश्विक अस्थिरता जारी।

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