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कानपुर DAV कॉलेज सेमिनार: क्वांटम फिजिक्स और वेदों का अद्भुत मेल, जानें नील्स बोर और टैगोर का वह अनसुना किस्सा

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डी.ए.वी. कॉलेज कानपुर में भारतीय ज्ञान परंपरा पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार के अतिथि।

कानपुर | बुधवार, 25 मार्च 2026 

डी.ए.वी. कॉलेज, कानपुर के भौतिक विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार “भारतीय ज्ञान परंपरा: भूत, वर्तमान एवं भविष्य – भौतिक विज्ञान के परिप्रेक्ष्य में” का समापन बौद्धिक विमर्श के साथ हुआ। सेमिनार के अंतिम दिन वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक विज्ञान के कई क्रांतिकारी सिद्धांतों की जड़ें भारत के प्राचीन ग्रंथों और दर्शन में छिपी हैं।

वैदिक दर्शन और आधुनिक वैज्ञानिक: एक अटूट जुड़ाव

बी.एन.डी. कॉलेज के प्रोफेसर अनोखे लाल पाठक ने अपने संबोधन में बताया कि विश्व के महानतम वैज्ञानिकों ने जटिल वैज्ञानिक गुत्थियों को सुलझाने के लिए भारतीय दर्शन का सहारा लिया।

  • जे. रॉबर्ट ओपेनहाइमर और श्रीमद्भगवद गीता: ‘परमाणु बम के जनक’ ओपेनहाइमर ने न केवल संस्कृत सीखी, बल्कि कुरुक्षेत्र के मैदान में दिए गए श्री कृष्ण के उपदेशों को आधुनिक भौतिकी के विनाशकारी प्रभावों को समझने का आधार माना।

  • निकोला टेस्ला और स्वामी विवेकानंद: विद्युत अभियांत्रिकी के जादूगर निकोला टेस्ला ने स्वामी विवेकानंद से मुलाकात के बाद ‘आकाश’ और ‘प्राण’ जैसी अवधारणाओं के माध्यम से पदार्थ और ऊर्जा के संबंध को समझने का प्रयास किया।

  • क्वांटम भौतिकी और रबींद्रनाथ टैगोर: नोबेल विजेता नील्स बोर और वर्नर हाइजनबर्ग ने स्वीकार किया था कि टैगोर के साथ उनकी बातचीत ने उन्हें क्वांटम भौतिकी की अनिश्चितताओं को भारतीय अद्वैतवाद के नजरिए से देखने की दृष्टि दी।

प्राचीन ज्ञान का आधुनिक अनुप्रयोग

डी.बी.एस. कॉलेज के प्रोफेसर अभिषेक जौहरी ने बताया कि भारतीय वैदिक दर्शन केवल एक आध्यात्मिक विचार नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक विज्ञान है। आज भी वैज्ञानिक कृषि, भू-गर्भ विज्ञान (Geo-science), चिकित्सा, आयुर्वेद और ज्योतिष शास्त्र में इन सिद्धांतों का व्यापक प्रयोग कर रहे हैं। विशेषकर ‘सस्टेनेबल फार्मिंग’ और ‘होलिस्टिक हीलिंग’ के क्षेत्र में भारत का प्राचीन ज्ञान आज दुनिया के लिए मार्गदर्शक बना हुआ है।

प्रमुख उपस्थिति एवं समापन

सेमिनार के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में कानपुर के सी.डी.सी. डायरेक्टर प्रोफेसर आर.के. द्विवेदी उपस्थित रहे। उनका स्वागत कॉलेज के प्राचार्य अरुण दीक्षित एवं भौतिकी विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय की भौतिक विज्ञान समन्वयक डॉ. प्रज्ञा अग्रवाल ने भी अपने विचार साझा किए।

इस दो दिवसीय आयोजन में देश भर के विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों और शोधार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंत में आयोजन सचिव डॉ. अभय सक्सेना ने सभी आगंतुकों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

विशेष टिप: आधुनिक शोध बताते हैं कि प्राचीन भारतीय ऋषि कणाद ने जॉन डाल्टन से सदियों पहले ‘परमाणु’ (Atom) की अवधारणा दी थी। आज का यह सेमिनार इसी गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सफल प्रयास रहा।

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