मुंबई. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने म्यूचुअल फंड निवेशकों के हित में और बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई क्रांतिकारी बदलावों का एलान किया है। इन बदलावों में सबसे प्रमुख ‘सॉल्यूशन ओरिएंटेड स्कीम्स’ को पूरी तरह बंद कर उनकी जगह ‘लाइफ साइकिल फंड्स’ को पेश करना है।
सेबी के नए सर्कुलर के अनुसार, ये सभी नियम अगले 6 महीनों में लागू कर दिए जाएंगे।
1. ‘सॉल्यूशन ओरिएंटेड’ स्कीम का अंत, ‘लाइफ साइकिल’ की शुरुआत
अब तक म्यूचुअल फंड में रिटायरमेंट और बच्चों की पढ़ाई जैसे लक्ष्यों के लिए ‘सॉल्यूशन ओरिएंटेड’ स्कीम्स चलती थीं। सेबी अब इस कैटेगरी की सभी 41 स्कीमों (29 रिटायरमेंट और 12 चिल्ड्रन फंड) को बंद कर उन्हें लाइफ साइकिल फंड (Target Date Funds) में बदल देगा।
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कैसे काम करेगा यह फंड: इसमें निवेश की रणनीति उम्र और लक्ष्य के आधार पर बदलती रहेगी। शुरुआत में फंड का बड़ा हिस्सा इक्विटी (शेयर बाजार) में होगा ताकि ज्यादा रिटर्न मिल सके। जैसे-जैसे मैच्योरिटी या लक्ष्य करीब आएगा, रिस्क कम करने के लिए पैसा अपने आप डेट (सुरक्षित निवेश) की तरफ शिफ्ट हो जाएगा।
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AUM का गणित: वर्तमान में इस कैटेगरी में लगभग 57,274 करोड़ रुपये का निवेश है।
2. फंड ऑफ फंड्स (FoF) पर लगाम
एफओएफ (वो फंड जो दूसरे म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं) के लिए भी सेबी ने कड़े निर्देश दिए हैं। अब इन फंड्स को अपना 95% पैसा अनिवार्य रूप से अंडरलाइंग फंड में ही निवेश करना होगा। साथ ही, अब एएमसी (AMC) अपनी मर्जी से अनगिनत एफओएफ लॉन्च नहीं कर पाएंगी, उनकी संख्या पर सीमा तय कर दी गई है।
3. निवेशकों के लिए बढ़ेगी स्पष्टता (Clarity)
सेबी ने फंड हाउसों को दो टूक निर्देश दिए हैं:
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पोर्टफोलियो ओवरलैप: अब फंड मैनेजरों को यह बताना होगा कि अलग-अलग स्कीमों का पैसा क्या एक ही कंपनियों में लगा है? इससे निवेशक को सही डायवर्सिफिकेशन की जानकारी मिलेगी।
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नाम और कैटेगरी का मेल: अब किसी भी स्कीम का नाम उसकी कैटेगरी के अनुसार ही रखना अनिवार्य होगा, ताकि निवेशक भ्रमित न हों।
4. आपके निवेश का क्या होगा?
यदि आपने पहले से ही रिटायरमेंट या चिल्ड्रन फंड (सॉल्यूशन ओरिएंटेड) में निवेश कर रखा है, तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। आपका पैसा सुरक्षित रहेगा और इसे सामान्य स्कीम या नई लाइफ साइकिल कैटेगरी में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। हालांकि, भविष्य में इन पुरानी श्रेणियों में नया निवेश नहीं किया जा सकेगा।
सेबी का यह कदम म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को अधिक मैच्योर और निवेशक-अनुकूल बनाएगा। विशेषकर लाइफ साइकिल फंड्स के आने से उन लोगों को फायदा होगा जो खुद से अपने पोर्टफोलियो को री-बैलेंस (Re-balance) नहीं कर पाते हैं।
Matribhumisamachar


