हैदराबाद: भारतीय रेलवे अपनी सेवाओं को हाई-टेक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहा है। दक्षिण मध्य रेलवे (SCR) ने ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने और माल ढुलाई को सुगम बनाने के लिए ‘रेल पार्सल ऐप’ (Rail Parcel App) नाम की एक नई डिजिटल सेवा की शुरुआत की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य रेलवे पार्सल प्रणाली को पूरी तरह से पारदर्शी, तेज और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाना है।
हैदराबाद डिवीजन से हुई शुरुआत
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सबसे पहले हैदराबाद डिवीजन में लॉन्च किया गया है। वर्तमान में यह सेवा दक्षिण भारत के सात बड़े व्यापारिक केंद्रों—हैदराबाद, विजयवाड़ा, गुंटूर, राजमुंदरी, विशाखापत्तनम, बेंगलुरु और चेन्नई—में सक्रिय की गई है। इस सेवा की सफलता के आधार पर आने वाले महीनों में इसे पूरे देश के अन्य रेलवे जोनों में भी विस्तारित किया जाएगा।
ऐप की प्रमुख विशेषताएं: एंड-टू-एंड समाधान
मीडिया रिपोर्ट्स और रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह ऐप ग्राहकों को ई-कॉमर्स कंपनियों जैसा अनुभव प्रदान करेगा। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
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डोरस्टेप पिकअप और डिलीवरी: अब ग्राहकों को अपना सामान लेकर रेलवे स्टेशन के पार्सल ऑफिस तक जाने की जरूरत नहीं होगी। ऐप के जरिए रिक्वेस्ट डालने पर सामान घर से उठाया जाएगा और गंतव्य तक पहुंचाया जाएगा।
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रियल टाइम ट्रैकिंग: ग्राहक अपने पार्सल की लाइव लोकेशन देख सकेंगे, जिससे अनिश्चितता खत्म होगी।
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डिजिटल भुगतान: पूरी प्रक्रिया को कैशलेस बनाने के लिए इसमें कई डिजिटल पेमेंट मोड दिए गए हैं।
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ऑटोमेटेड नोटिफिकेशन: पार्सल की बुकिंग से लेकर डिलीवरी तक, हर चरण पर ग्राहक को एसएमएस और पुश नोटिफिकेशन के जरिए अपडेट मिलेगा।
IIM-बैंगलोर के साथ रणनीतिक साझेदारी (MoU)
दक्षिण मध्य रेलवे ने केवल तकनीक पर ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक कुशलता पर भी ध्यान केंद्रित किया है। रेलवे ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, बैंगलोर (IIM-B) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इसके तहत IIM-B के विशेषज्ञ फ्रेट लॉजिस्टिक्स मार्केट का गहन अध्ययन करेंगे। इस अध्ययन का उद्देश्य यह पता लगाना है कि रेलवे कैसे निजी कूरियर कंपनियों के मुकाबले अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ा सकता है और परिचालन लागत (Operational Cost) को कम कर सकता है।
छोटे व्यापारियों और स्टार्टअप्स को मिलेगा बढ़ावा
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि वे पार्सल बुकिंग को ‘टैक्सी बुकिंग’ जितना आसान बनाना चाहते हैं। यह पहल विशेष रूप से निम्नलिखित वर्गों के लिए वरदान साबित होगी:
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MSMEs और छोटे उद्यमी: जो अपना सामान कम खर्च में दूर-दराज के इलाकों में भेजना चाहते हैं।
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ई-कॉमर्स सेलर्स: जिन्हें एक भरोसेमंद और सस्ते लॉजिस्टिक्स पार्टनर की तलाश है।
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आम नागरिक: जिन्हें घर शिफ्ट करते समय या व्यक्तिगत सामान भेजने के लिए एक सुरक्षित माध्यम चाहिए।
‘रेल पार्सल ऐप’ भारतीय रेलवे के ‘डिजिटल इंडिया’ विजन का एक सशक्त उदाहरण है। इससे न केवल रेलवे के राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि पार्सल हैंडलिंग में होने वाली देरी और बिचौलियों की भूमिका भी समाप्त होगी। आने वाले समय में यह ऐप भारतीय लॉजिस्टिक्स सेक्टर का चेहरा बदल सकता है।
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