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SGPC का बड़ा फैसला: हेड ग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह पद से सेवानिवृत्त, जानें क्या है पूरा विवाद

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ज्ञानी रघबीर सिंह और एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी की तस्वीर।

अमृतसर. शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने एक कड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब के हेड ग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह को उनके पद से तत्काल प्रभाव से सेवानिवृत्त (Retire) कर दिया है। गुरुवार को अमृतसर में आयोजित एसजीपीसी की कार्यकारिणी समिति की एक आपातकालीन बैठक में यह निर्णय लिया गया। इस फैसले ने सिख धार्मिक और राजनीतिक हलकों में एक नई बहस छेड़ दी है।

विवाद की पृष्ठभूमि: 72 घंटे का अल्टीमेटम और खामोशी

इस पूरे विवाद की जड़ें 18 फरवरी 2026 को जालंधर में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में हैं। वहां ज्ञानी रघबीर सिंह ने एसजीपीसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने विशेष रूप से धार्मिक पांडुलिपियों के रख-रखाव और प्रशासनिक पारदर्शिता में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था।

इसके जवाब में एसजीपीसी ने इसे संस्था की छवि खराब करने वाला कृत्य माना और उन्हें 19 फरवरी को 72 घंटे का अल्टीमेटम जारी किया। कमेटी ने स्पष्ट मांग की थी कि ज्ञानी जी अपने आरोपों के समर्थन में पुख्ता दस्तावेजी साक्ष्य (Documentary Evidence) पेश करें। हालांकि, निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी उनकी ओर से कोई आधिकारिक जवाब दाखिल नहीं किया गया।

एसजीपीसी अध्यक्ष का बयान

बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा:

“संस्था की गरिमा सर्वोपरि है। ज्ञानी रघबीर सिंह को अपना पक्ष रखने और सबूत पेश करने का पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसका उपयोग नहीं किया। बिना किसी आधार के सार्वजनिक मंचों पर संस्था की आलोचना करना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है, जिसके चलते कमेटी ने सर्वसम्मति से उन्हें सेवानिवृत्त करने का निर्णय लिया है।”

ज्ञानी रघबीर सिंह का पक्ष: “सत्य के लिए उठाई आवाज”

दूसरी ओर, पद से हटाए जाने से पहले ज्ञानी रघबीर सिंह ने एक वीडियो संदेश के जरिए अपना रुख साफ किया था। उन्होंने दावा किया कि वे किसी गुटबाजी का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि एक धार्मिक सेवक के नाते उन्होंने केवल सच बोलने का प्रयास किया है। उनका कहना था कि उनके पास सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं और वे आने वाले समय में इन्हें संगत (सिख समुदाय) के सामने रख सकते हैं।

दिसंबर 2025 से चल रहा था टकराव

ज्ञानी रघबीर सिंह और एसजीपीसी के बीच संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण चल रहे थे।

  • दिसंबर 2025: उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार के पद से हटा दिया गया था।

  • वर्तमान स्थिति: हेड ग्रंथी के पद से उनकी विदाई को उनके और कमेटी के बीच चल रहे इसी सत्ता और वैचारिक संघर्ष के अंतिम पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।

धार्मिक और राजनीतिक हलकों में हलचल

विशेषज्ञों का मानना है कि हेड ग्रंथी जैसे महत्वपूर्ण पद से इस तरह की विदाई के दूरगामी परिणाम होंगे। सिख विद्वानों का एक वर्ग जहां इसे अनुशासन बनाए रखने के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं दूसरा वर्ग इसे अभिव्यक्ति की आजादी और पारदर्शिता को दबाने की कोशिश करार दे रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विभिन्न सिख जत्थेबंदियों की प्रतिक्रियाएं माहौल को और गरमा सकती हैं।

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