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नीरव मोदी का ‘गेम ओवर’? लंदन हाई कोर्ट ने खारिज की आखिरी उम्मीद; जल्द भारत आने का रास्ता साफ

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लंदन | 26 मार्च, 2026

भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत लाने की कोशिशों में भारतीय जांच एजेंसियों को अब तक की सबसे बड़ी सफलता मिली है। लंदन हाई कोर्ट (King’s Bench Division) ने बुधवार (25 मार्च, 2026) को नीरव मोदी की उस पुनर्विचार याचिका (Reconsideration Petition) को खारिज कर दिया है, जिसे वह प्रत्यर्पण रोकने के लिए अपने आखिरी दांव के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे।

अदालत के इस कड़े रुख के बाद अब 13,000 करोड़ रुपये के PNB घोटाले के मुख्य आरोपी के भारत प्रत्यर्पण की कानूनी बाधाएं लगभग समाप्त हो गई हैं।

कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?

सुनवाई के दौरान नीरव मोदी के वकीलों ने संजय भंडारी केस के फैसले का हवाला देते हुए तर्क दिया था कि भारत की जेलों में उनके साथ ‘अमानवीय व्यवहार’ या ‘प्रताड़ना’ (Torture) का जोखिम है। हालांकि, भारतीय एजेंसियों (CBI और ED) द्वारा दी गई ‘ठोस संप्रभु आश्वासनों’ (Sovereign Assurances) को स्वीकार करते हुए न्यायाधीशों ने कहा:

“इस मामले में ऐसी कोई असाधारण परिस्थिति (Exceptional Circumstance) मौजूद नहीं है, जिसके आधार पर पहले से दिए जा चुके प्रत्यर्पण आदेश पर पुनर्विचार किया जाए।”

भारतीय एजेंसियों की ‘लंदन स्ट्राइक’

इस निर्णायक मोड़ के पीछे CBI और क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) की महीनों की समन्वित मेहनत है।

  • विशेष टीम: सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष टीम इस सुनवाई के लिए विशेष रूप से लंदन में मौजूद थी।

  • अचूक तर्क: भारत सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि नीरव मोदी को मुंबई की आर्थर रोड जेल के ‘बैरक नंबर 12’ में रखा जाएगा, जहाँ अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सभी सुविधाएं और सुरक्षा उपलब्ध हैं।

नीरव मोदी केस: अब तक का सफर

महत्वपूर्ण पड़ाव विवरण
जनवरी 2018 ₹13,000 करोड़ का PNB घोटाला सामने आया, नीरव मोदी फरार।
मार्च 2019 लंदन के होलबोर्न में स्कॉटलैंड यार्ड द्वारा गिरफ्तारी।
फरवरी 2021 वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने प्रत्यर्पण का आदेश दिया।
अगस्त 2025 प्रत्यर्पण में आ रही एक बड़ी कानूनी बाधा को कोर्ट ने हटाया।
मार्च 2026 हाई कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका खारिज कर कानूनी रास्ते बंद किए।

मेहुल चौकसी पर भी कसता शिकंजा

नीरव मोदी के साथ ही उनके मामा मेहुल चौकसी के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, बेल्जियम की अदालत ने भी चौकसी के खिलाफ भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध को ‘प्रभावी’ माना है, जिससे दोनों आरोपियों के भारत आने की संभावना अब और प्रबल हो गई है।

अगला कदम क्या होगा?

कानूनी जानकारों का मानना है कि अब नीरव मोदी के पास केवल यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय (ECHR) का दरवाजा खटखटाने का बहुत ही संकीर्ण विकल्प बचा है। यदि वहां से भी राहत नहीं मिलती, तो ब्रिटेन का गृह मंत्रालय (Home Office) अगले कुछ हफ्तों में उनके प्रत्यर्पण की तारीख तय कर सकता है।

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