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डेनमार्क चुनाव 2026: मेटे फ्रेडरिक्सन का इस्तीफा, 123 साल में सोशल डेमोक्रेट्स की सबसे बड़ी हार; क्या दोबारा बन पाएंगी पीएम?

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कोपेनहेगन | शुक्रवार, 27 मार्च 2026

डेनमार्क की राजनीति में इस वक्त जबरदस्त उथल-पुथल मची है। प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन (Mette Frederiksen) ने मंगलवार (24 मार्च) को हुए आम चुनाव में अपनी पार्टी के ऐतिहासिक पतन के बाद बुधवार सुबह किंग फ्रेडरिक X को अपना इस्तीफा सौंप दिया। फ्रेडरिक्सन की ‘सोशल डेमोक्रेट्स’ पार्टी को 179 सीटों वाली संसद (Folketing) में केवल 38 सीटें मिली हैं, जो 1903 के बाद से पार्टी का सबसे खराब प्रदर्शन है।

चुनाव परिणाम: 123 साल की सबसे बड़ी हार, पर फिर भी उम्मीदें बाकी

चुनाव के नतीजों ने डेनमार्क को एक ‘त्रिशंकु संसद’ (Hung Parliament) की स्थिति में धकेल दिया है।

  • रेड ब्लॉक (वामपंथी): 84 सीटें (बहुमत के लिए 90 की जरूरत)।

  • ब्लू ब्लॉक (दक्षिणपंथी): 77 सीटें।

  • किंगमेकर: पूर्व प्रधानमंत्री लार्स लोके रासमुसेन की ‘मॉडरेट्स’ पार्टी (14 सीटें) अब यह तय करेगी कि सत्ता की चाबी किसके पास जाएगी।

दिलचस्प बात यह है कि इतनी बड़ी हार के बावजूद, किंग फ्रेडरिक ने मेटे फ्रेडरिक्सन को ‘कार्यवाहक प्रधानमंत्री’ नियुक्त किया है और उन्हें नई सरकार बनाने के लिए गठबंधन वार्ता शुरू करने का पहला मौका दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि वह एक बार फिर गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर सकती हैं।

2026 का ग्रीनलैंड संकट: जब ट्रंप और मेटे के बीच छिड़ने वाली थी जंग

इस चुनाव की सबसे बड़ी पृष्ठभूमि जनवरी 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुआ सीधा टकराव रहा। ट्रंप ने ग्रीनलैंड को खरीदने की अपनी इच्छा दोबारा जाहिर की और ‘सख्त कदम’ उठाने की धमकी दी। इस संकट ने मेटे फ्रेडरिक्सन को एक ‘आयरन लेडी’ के रूप में पेश किया:

  1. सैन्य तैनाती: मेटे ने तुरंत ग्रीनलैंड में डेनिश कमांडो और एयरबोर्न सैनिकों को तैनात कर दिया।

  2. रक्त की थैलियां (Blood Bags): रिपोर्टों के अनुसार, जनवरी में युद्ध की आशंका को देखते हुए डेनमार्क ने ग्रीनलैंड में इमरजेंसी ब्लड सप्लाई और रनवे उड़ाने वाले विस्फोटक तक भेज दिए थे।

  3. नाटो को चेतावनी: उन्होंने स्पष्ट कहा कि ग्रीनलैंड पर किसी भी तरह का अमेरिकी दबाव “नाटो और वैश्विक सुरक्षा के अंत की शुरुआत होगा।”

हालांकि, घरेलू मोर्चे पर महंगाई और बढ़ते टैक्स के बोझ ने उनकी इस ‘संकटमोचक’ छवि पर पानी फेर दिया।

मेटे फ्रेडरिक्सन: 15 साल की उम्र में तोड़ी नाक, 41 में बनीं सबसे युवा PM

48 वर्षीय मेटे का जीवन सिद्धांतों और निडरता की मिसाल रहा है:

  • बचपन का संघर्ष: महज 15 साल की उम्र में एक शरणार्थी की रक्षा करते हुए उनकी नाक की हड्डी टूट गई थी, लेकिन उन्होंने पीछे हटना नहीं सीखा।

  • पशु अधिकार: वह जानवरों पर परीक्षण (Animal Testing) के इतना खिलाफ रहीं कि उन्होंने कॉस्मेटिक उत्पादों का इस्तेमाल ही छोड़ दिया।

  • इतिहास रचा: 2019 में 41 साल की उम्र में वह डेनमार्क की सबसे कम उम्र की प्रधानमंत्री बनी थीं।

अगला कदम: क्या गठबंधन की राजनीति मेटे को बचा पाएगी?

किंग फ्रेडरिक ने सभी 12 राजनीतिक दलों के साथ बैठकें शुरू कर दी हैं। अब सबकी नज़रें लार्स लोके रासमुसेन पर हैं। यदि वह मेटे के साथ हाथ मिलाते हैं, तो वह तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकती हैं। लेकिन अगर विपक्षी ‘ब्लू ब्लॉक’ और रासमुसेन के बीच समझौता हुआ, तो डेनमार्क में एक दक्षिणपंथी सरकार का उदय होगा।

विशेष नोट: डेनमार्क की राजनीति में गठबंधन वार्ता हफ्तों तक चल सकती है। मेटे का राजनीतिक भविष्य अब उनकी बातचीत की मेज पर मौजूद कौशल पर निर्भर करता है।

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