लखनऊ | रविवार, 26 अप्रैल 2026
काशी की पावन धरा पर काशी विश्वनाथ धाम की भव्यता के बाद अब एक और आध्यात्मिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। वाराणसी के दक्षिण छोर यानी असि क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक श्रीजगन्नाथ मंदिर का कायाकल्प कर इसे ‘श्रीजगन्नाथ धाम’ के रूप में विकसित करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। यह नया धाम न केवल स्थापत्य का बेजोड़ नमूना होगा, बल्कि यह काशी में ‘मिनी पुरी’ का अनुभव भी कराएगा।
1 मई को ऐतिहासिक शिलान्यास
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास आगामी 1 मई 2026 (वैशाख पूर्णिमा) को कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती जी के कर-कमलों द्वारा संपन्न होगा। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 9 बजे भव्य शिला पूजन और कलश यात्रा के साथ होगी, जो नगर भ्रमण के बाद मंदिर परिसर पहुंचेगी।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं
इस धाम के निर्माण में कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान दिया गया है:
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विशाल शिखर: मंदिर का शिखर 108 फीट ऊंचा प्रस्तावित है। इसकी ऊंचाई का मुख्य उद्देश्य यह है कि गंगा में स्नान करने वाले श्रद्धालु दूर से ही ‘शिखर दर्शन’ कर सकें।
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नागर शैली का अद्भुत संगम: मंदिर का निर्माण राजस्थान के धौलपुर के पत्थरों से ‘नागर शैली’ में किया जाएगा। इसके लिए विशेष रूप से धौलपुर के अनुभवी शिल्पकारों को बुलाया गया है।
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बजट और समय सीमा: परियोजना के प्रथम चरण में 30 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। ट्रस्ट के अनुसार, निर्माण कार्य को वर्ष 2029 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।
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सामाजिक सरोकार: केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि यहाँ श्रद्धालुओं के लिए धर्मशाला, वैदिक शिक्षा हेतु वेद विद्यालय और स्थानीय युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण केंद्र भी बनाए जाएंगे।
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ऐतिहासिक महत्व
असि क्षेत्र का यह श्रीजगन्नाथ मंदिर लगभग 230 वर्ष पुराना है। काशी की परंपरा के अनुसार, पुरी की तरह ही यहाँ भी भव्य रथयात्रा का आयोजन होता रहा है। अब इसे भव्य स्वरूप मिलने से असि और लंका क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को नई ऊर्जा मिलेगी।
भक्तों के लिए क्या बदलेगा?
अब तक संकरी गलियों और पुराने ढांचे तक सीमित यह मंदिर अब एक खुले और विस्तृत परिसर के रूप में दिखेगा। गंगा तट से इसकी निकटता और 108 फीट की ऊंचाई इसे दूर से ही एक लैंडमार्क बना देगी।
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