इस्लामाबाद | शुक्रवार, 27 मार्च 2026
ईरान पर इजरायली और अमेरिकी हमलों के बीच पश्चिम एशिया का तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। तेहरान में पाकिस्तानी दूतावास और राजदूत के आवास के बेहद करीब हुए शक्तिशाली धमाकों के बाद पाकिस्तान ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। पाकिस्तान स्ट्रैटेजिक फोरम (PSF) ने इजरायल को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि वह पाकिस्तान को हल्के में लेने की गलती न करे।
“करारा जवाब दिया जाएगा”: पाकिस्तान का सख्त संदेश
पाकिस्तानी दूतावास के पास हुए हमलों के बाद जारी बयान में कहा गया, “इजरायल को यह याद रखना चाहिए कि पाकिस्तान ‘कतर’ नहीं है। अगर दुनिया में कहीं भी हमारे राजनयिकों को नुकसान पहुँचाया गया, तो हम इसका ऐसा जवाब देंगे जिसे दुनिया देखेगी।” रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान के राजनयिक एन्क्लेव (Diplomatic Enclave) के पास हुए हवाई हमलों से पाकिस्तानी दूतावास की इमारतें हिल गईं। हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन पाकिस्तान ने इसे अपनी संप्रभुता और वियना कन्वेंशन का उल्लंघन माना है।
मध्यस्थता की मेज पर ‘ट्रंप का 15 सूत्रीय प्लान’
यह तनावपूर्ण स्थिति ऐसे समय में पैदा हुई है जब पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच ‘शांति दूत’ की भूमिका निभा रहा है। ताजा अपडेट्स के अनुसार:
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15-सूत्रीय एक्शन प्लान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने एक गोपनीय 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव पाकिस्तान को सौंपा है, जिसे इस्लामाबाद ने तेहरान तक पहुँचा दिया है।
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इस्लामाबाद में बैठक की संभावना: पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने पुष्टि की है कि पाकिस्तान दोनों देशों के बीच सीधी या परोक्ष बातचीत की मेजबानी करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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ट्रंप की डेडलाइन: राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को दी गई डेडलाइन को 6 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दिया है, ताकि कूटनीति को एक आखिरी मौका मिल सके।
युद्ध के मैदान की ताजा स्थिति
27 मार्च 2026 तक की जानकारी के अनुसार, तेहरान सहित ईरान के कई शहरों पर हमले तेज हो गए हैं। इजरायल के रक्षा मंत्री ने चेतावनी दी है कि जब तक ईरान मिसाइल हमले बंद नहीं करता, तब तक ये हमले और भी घातक होंगे। वहीं, ईरान ने भी पलटवार करते हुए इजरायल और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं।
निष्कर्ष
पाकिस्तान की यह ‘सख्त कूटनीति’ दर्शाती है कि वह एक तरफ शांति की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ अपनी सैन्य ताकत का अहसास कराकर अपनी सुरक्षा सीमाओं को स्पष्ट कर रहा है। यदि तेहरान में राजनयिकों पर खतरा बढ़ता है, तो यह क्षेत्रीय संघर्ष एक बड़े अंतरराष्ट्रीय युद्ध में बदल सकता है।
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