इस्लामाबाद | बुधवार, 27 मई 2026
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ (Khawaja Asif) ने एक हालिया टीवी इंटरव्यू में ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरे उपमहाद्वीप के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाने वाले आसिफ ने न केवल यह स्वीकार किया कि उनके पूर्वज हिंदू थे, बल्कि उन्होंने पाकिस्तान के शिक्षा तंत्र और इतिहास के पाठ्यक्रम (Textbook Syllabus) पर भी तीखे प्रहार किए हैं।
“हम अपने हिंदू पूर्वजाें से नफरत क्यों करते हैं?”
ख्वाजा आसिफ ने इंटरव्यू के दौरान पाकिस्तानी समाज की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा,
“हम पाकिस्तानी मुसलमान अपने ही हिंदू पूर्वजों से नफरत करते हैं। पाकिस्तान के आधे से ज्यादा लोग यह झूठा दावा करते फिरते हैं कि उनके पूर्वज सऊदी अरब या ईरान से आए थे। यह मानसिकता जानबूझकर तैयार की गई है ताकि नई पीढ़ी को उनकी वास्तविक सांस्कृतिक पहचान से दूर रखा जा सके।”
उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा कि अगर उनके पूर्वज हिंदू थे, तो क्या इस वजह से वह किसी भी मायने में ‘कम पाकिस्तानी’ हो जाते हैं? उन्होंने साफ किया कि धर्म परिवर्तन इतिहास का एक हिस्सा रहा है, लेकिन इससे किसी भी समाज की जमीनी हकीकत और उसकी जड़ें नहीं बदल जातीं।
इतिहास की किताबों से मिटाए गए सम्राट अशोक और चंद्रगुप्त मौर्य
नवीनतम जानकारी के अनुसार, ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान के स्कूली पाठ्यक्रम में किए गए बड़े बदलावों और राजनीतिक हेरफेर को उजागर किया है। उन्होंने सीधे तौर पर ऐतिहासिक तथ्यों के साथ हुई छेड़छाड़ में सुधार की मांग करते हुए कहा:
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ऐतिहासिक महापुरुषों को मिटाना: पाकिस्तान की पाठ्यपुस्तकों से चंद्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक जैसे महान शासकों के इतिहास को पूरी तरह गायब कर दिया गया है।
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हटाने का कारण: आसिफ के मुताबिक, इन महान राजाओं के गौरवशाली इतिहास को सिर्फ इसलिए पाठ्यक्रम से हटा दिया गया क्योंकि वे हिंदू या गैर-मुस्लिम थे।
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दुष्परिणाम: आज पाकिस्तान की बहुसंख्यक युवा आबादी को यह तक नहीं पता कि चंद्रगुप्त मौर्य या सम्राट अशोक कौन थे और इस उपमहाद्वीप की प्रगति में उनका क्या योगदान था।
ताजा वैश्विक संदर्भ: क्यों आया यह बयान?
भू-राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, ख्वाजा आसिफ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विदेश नीति और पहचान को लेकर बड़े दबाव में है। हाल ही में अमेरिका द्वारा पाकिस्तान सहित कई मुस्लिम देशों पर इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने (अब्राहम अकॉर्ड – Abraham Accords) के लिए बनाए जा रहे दबाव के बीच रक्षा मंत्री का अपनी जड़ों की ओर लौटना और एक खास तरह की “कट्टरपंथी मानसिकता” की आलोचना करना, उनके देश के भीतर भी कई नए समीकरणों को जन्म दे रहा है।
जहां एक तरफ पाकिस्तान के उदारवादी और बुद्धिजीवी वर्ग ने ख्वाजा आसिफ के इस बयान को सच स्वीकार करने वाला एक साहसी कदम बताया है, वहीं दूसरी तरफ कट्टरपंथी समूहों ने सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
निष्कर्ष: क्या बदलेगा पाकिस्तान का नैरेटिव?
इतिहासकारों का मानना है कि भारत और पाकिस्तान का भूगोल भले ही 1947 में अलग हो गया हो, लेकिन उनकी सभ्यता, इतिहास और सांस्कृतिक जड़ें एक ही हैं। ख्वाजा आसिफ का यह कदम ऐतिहासिक सुधारों की दिशा में एक बड़ी चिंगारी बन सकता है। बच्चों को नफरत के बजाय वास्तविक और तथ्यात्मक इतिहास पढ़ाना ही दक्षिण एशिया में स्थायी शांति और समझ विकसित करने का एकमात्र रास्ता है।
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