नई दिल्ली । बुधवार, 27 मई 2026
भारत में धार्मिक गतिविधियों और सामाजिक सुधार के नाम पर काम कर रहे कई संगठनों के पीछे का वित्तीय गणित एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों के राडार पर है। हाल ही में, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अंतरराष्ट्रीय ईसाई मिशनरी संगठन ‘द टिमोथी इनिशिएटिव’ (The Timothy Initiative – TTI) से जुड़े नेटवर्क पर एक बड़ी कार्रवाई की है। इस जाँच ने विदेशी चर्चों, अवैध रूप से आ रहे धन और भारत के आंतरिक व संवेदनशील हिस्सों में इसके इस्तेमाल को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला और हालिया घटनाक्रम (अप्रैल 2026)?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत की गई इस व्यापक जाँच में यह बात सामने आई है कि ‘द टिमोथी इनिशिएटिव’ (TTI) भारत में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के तहत पंजीकृत नहीं है। कानूनन, बिना FCRA पंजीकरण के कोई भी गैर-सरकारी संगठन या संस्था सीधे तौर पर विदेशी धन प्राप्त नहीं कर सकती।
विदेशी नियमों की निगरानी से बचने के लिए इस संगठन ने एक बेहद अनोखा और समानांतर तरीका अपनाया। अप्रैल 2026 में सुरक्षा एजेंसियों ने बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लुकआउट सर्कुलर के आधार पर एक संदिग्ध (सुरक्षा कारणों से कूरियर का नाम ‘मिका मार्क’ या ‘जोस बेल’ के रूप में सामने आया है) को रोका। तलाशी के दौरान उसके पास से 24 विदेशी बैंक डेबिट कार्ड बरामद किए गए, जो अमेरिका के ‘ट्रुइस्ट बैंक’ (Truist Bank, USA) से जुड़े हुए थे।
वित्तीय हेरफेर के मुख्य आँकड़े:
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₹95 करोड़ का प्रवाह: नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच केवल छह महीनों की छोटी अवधि में इन विदेशी डेबिट कार्डों के जरिए भारतीय एटीएम (ATM) से योजनाबद्ध तरीके से लगभग 95 करोड़ रुपये निकाले गए।
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समानांतर कैश इकोनॉमी: ED के अनुसार, इस पैसे की निकासी को ट्रैक करने के लिए एक विशेष ऑनलाइन बिलिंग और अकाउंटिंग डेटाबेस का उपयोग किया जा रहा था, जिसे भारत के बाहर बैठी एजेंसियां नियंत्रित कर रही थीं।
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छापेमारी में जब्ती: ED द्वारा असम, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों में की गई छापेमारी के दौरान ₹40 लाख नकद और कई डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं।
संवेदनशील और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में फंडिंग: एक बड़ा सुरक्षा जोखिम
इस जाँच का सबसे चिंताजनक पहलू वह है जिसका सीधा संबंध भारत की आंतरिक सुरक्षा से है। ED की वित्तीय फोरेंसिक रिपोर्ट से पता चला है कि इस ₹95 करोड़ की राशि में से लगभग ₹6.5 करोड़ की राशि छत्तीसगढ़ के बस्तर, धमतारी और झारखंड के कुछ आदिवासी बहुल संवेदनशील इलाकों में भेजी गई थी।
ये क्षेत्र लंबे समय से वामपंथी उग्रवाद (Left-Wing Extremism – LWE) से प्रभावित रहे हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में बिना किसी सरकारी और बैंकिंग निगरानी (नॉन-FCRA चैनल) के नकदी आधारित समानांतर व्यवस्था चलाना देश की अखंडता और वित्तीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा है।
अंतरराष्ट्रीय चर्चों का रणनीतिक नेटवर्क और भारत में कार्यप्रणाली
‘द टिमोथी इनिशिएटिव’ का वैश्विक मुख्यालय उत्तरी कैरोलिना (USA) में है। भारत में इसका संचालन साल 2007 में ‘प्रोजेक्ट इंडिया’ के नाम से शुरू हुआ था, जिसका घोषित लक्ष्य ग्रामीण इलाकों में जमीनी स्तर पर पकड़ बनाना था। ऑपइंडिया और अन्य स्वतंत्र मीडिया रिपोर्टों की मानें तो दुनिया भर के कम से कम 12 प्रमुख विदेशी चर्च और संगठन इस तंत्र का हिस्सा हैं:
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केंसिंग्टन चर्च (USA): सार्वजनिक दस्तावेजों के अनुसार, इस चर्च ने उत्तरी भारत में अपनी गतिविधियों के लिए $200,000 से अधिक की राशि जुटाई थी।
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मिशन ग्रोव चर्च: उत्तरी भारत, नेपाल और बांग्लादेश में अपनी विस्तार योजनाओं के लिए लगभग 1.6 मिलियन डॉलर (करीब 15.32 करोड़ रुपये) का फंड जुटाया।
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BGC कनाडा: ‘प्रति चर्च 400 डॉलर’ के कम लागत वाले परिचालन मॉडल को प्रमोट करके सीधे कनाडा से डोनेशन कलेक्ट करता रहा है।
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अन्य संगठन: वुडडेल चर्च, राइज सिटी चर्च, मिशन हिल्स चर्च और ऑल एक्सेस इंटरनेशनल भी इसके वैश्विक सहयोगी संगठनों में शामिल हैं।
TTI का त्रि-स्तरीय संरचनात्मक मॉडल:
यह संगठन जमीनी स्तर पर स्थानीय विरोध को कम करने और लोगों को जोड़ने के लिए एक सुव्यवस्थित सांगठनिक ढांचे पर काम करता है:
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पॉल (Paul): ये स्थानीय स्तर के मुख्य प्रशिक्षक होते हैं जो केंद्र स्थापित करते हैं।
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तिमोथी (Timothy): ये शिष्य बनाने वाले और नए छोटे चर्च (हाउस चर्च) स्थापित करने वाले जमीनी कार्यकर्ता हैं।
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टाइटस (Titus): ये वे नए लोग होते हैं जिन्हें वैचारिक व आध्यात्मिक रूप से जोड़कर भविष्य के कार्यकर्ताओं के रूप में आगे बढ़ाया जाता है।
वैचारिक रणनीतियाँ और संभावित सुधार (Possible Corrections)
जाँच और रिपोर्टों के अनुसार, यह नेटवर्क स्थानीय स्तर पर पारंपरिक धार्मिक प्रचार (जैसे खुलेआम बाइबिल बांटना या फिल्में दिखाना) से बचता है ताकि स्थानीय विरोध न हो। इसके बजाय, यह मौखिक कहानियों, सामाजिक कार्यों (जैसे चिकित्सा शिविर, अनाथालय) और स्थानीय जातियों के प्रभावशाली प्रमुखों को प्रभावित करने की रणनीति अपनाता है, ताकि उनके माध्यम से पूरे समुदाय में पैठ बनाई जा सके। साथ ही, इसके पाठ्यक्रमों में स्थानीय सांस्कृतिक अवधारणाओं (जैसे ‘कर्म’ और ‘पुनर्जन्म’) को तार्किक रूप से टारगेट किया जाता है।
इस मुद्दे पर संभावित सुधार और विनियामक कदम:
एक लोकतांत्रिक देश में वैधानिक और पारदर्शी तरीके से किसी भी धर्म का प्रचार करने की स्वतंत्रता है, लेकिन जब इसमें विदेशी धन और वित्तीय नियमों का उल्लंघन शामिल हो जाता है, तो निम्नलिखित सुधार आवश्यक हो जाते हैं:
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एटीएम और विदेशी कार्डों की सख्त निगरानी: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और वित्तीय खुफिया इकाई (FIU) को विदेशी बैंकों द्वारा जारी किए गए डेबिट/क्रेडिट कार्डों से भारतीय एटीएम में होने वाली बार-बार की नकद निकासी की सीमा और निगरानी को कड़ा करना होगा।
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ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में जागरूकता: आदिवासी और उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में समानांतर कैश सिस्टम को रोकने के लिए बैंकिंग समावेशन (Financial Inclusion) को और मजबूत करना होगा ताकि स्थानीय लोग किसी वित्तीय प्रलोभन या अवैध फंडिंग का हिस्सा न बनें।
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वीजा नियमों का कड़ाई से पालन: पर्यटक वीजा (Tourist Visa) पर भारत आकर धार्मिक या व्यावसायिक गतिविधियों में लिप्त होने वाले विदेशी नागरिकों की सघन जाँच होनी चाहिए ताकि वीजा नियमों के उल्लंघन को रोका जा सके।
संदर्भ और महत्वपूर्ण लिंक्स (Relevant Links)
इस विषय पर अधिक विस्तृत और आधिकारिक जानकारी के लिए आप निम्नलिखित प्रामाणिक स्रोतों का संदर्भ ले सकते हैं:
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प्रवर्तन निदेशालय (ED) की इस मामले पर जारी की गई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति को पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ: Enforcement Directorate Press Releases
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भारत में विदेशी फंडिंग और इसके विनियामक ढांचे (FCRA और FEMA) को समझने के लिए गृह मंत्रालय की गाइडलाइंस देखें: Ministry of Home Affairs – FCRA Services
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