लखनऊ. किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के पैथोलॉजी विभाग में तैनात डॉ. रमीजुद्दीन नायक और उसके परिवार के खिलाफ चौक पुलिस ने अदालत में एक विस्तृत आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दी है। महिला डॉक्टर से दुष्कर्म, जबरन गर्भपात, ब्लैकमेलिंग और जबरन मतांतरण के इस सनसनीखेज मामले ने चिकित्सा जगत को हिला कर रख दिया है।
12 साल का ‘डिजिटल पाप’: 500 से अधिक वीडियो बरामद
पुलिस की जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा डॉ. रमीजुद्दीन के लैपटॉप और डिजिटल उपकरणों से हुआ है। फोरेंसिक जांच में 4 TB (टेराबाइट) डेटा मिला है, जिसमें पिछले 12 वर्षों का कच्चा चिट्ठा मौजूद है। साक्ष्यों के अनुसार, आरोपित ने 500 से अधिक आपत्तिजनक वीडियो बना रखे थे, जिनका उपयोग वह महिलाओं को ब्लैकमेल करने और उन पर मतांतरण का दबाव बनाने के लिए करता था।
प्रताड़ना की पराकाष्ठा: गर्म प्रेस से जलाने का आरोप
चार्जशीट में पीड़िता के बयानों को शामिल किया गया है, जिसमें आरोपित के माता-पिता (सलीमुद्दीन और खतीजा) पर भी गंभीर आरोप हैं। विरोध करने पर पीड़िता को गर्म प्रेस से जलाने जैसी अमानवीय यातनाएं दी गईं। साथ ही, शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण और दो बार जबरन गर्भपात कराने के साक्ष्य भी पुलिस ने अदालत के समक्ष पेश किए हैं।
मुख्य बिंदु:
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दो पीड़िताओं के बयान: लखनऊ और आगरा की दो महिला डॉक्टरों ने आरोपित के खिलाफ गवाही दी है।
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सात गंभीर धाराएं: पुलिस ने दुष्कर्म, जबरन नशीला पदार्थ पिलाने, गर्भपात और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम सहित सात धाराओं में केस तैयार किया है।
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सुनियोजित साजिश: आरोपित पहले महिलाओं को करियर और आर्थिक मदद का झांसा देकर विश्वास जीतता था, फिर उनके वीडियो बनाकर उन्हें जाल में फंसा लेता था।
त्वरित कार्रवाई
चौक पुलिस ने महज एक माह के भीतर फोरेंसिक रिपोर्ट प्राप्त कर 800 पन्नों का आरोप पत्र तैयार किया है। पुलिस का दावा है कि डिजिटल साक्ष्य इतने मजबूत हैं कि आरोपित का बचना मुश्किल होगा। फिलहाल, मामले में शामिल अन्य सहयोगियों की भूमिका की जांच अभी जारी है।
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