नई दिल्ली | शनिवार, 28 मार्च 2026
दिल्ली के लुटियंस जोन में स्थित कांग्रेस के ऐतिहासिक मुख्यालय 24, अकबर रोड को खाली करने की आधिकारिक समयसीमा आज समाप्त हो गई है। केंद्र सरकार के संपदा विभाग (Estate Department) द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, कांग्रेस को आज तक अपने इस मुख्यालय और 5, रायसीना रोड स्थित युवा कांग्रेस कार्यालय को खाली करना था। हालांकि, ताज़ा अपडेट्स के अनुसार, पार्टी को बेदखली से फिलहाल अस्थायी राहत मिल गई है।
🤝 बैक-चैनल बातचीत और 6 महीने की राहत
सूत्रों के अनुसार, डेडलाइन खत्म होने से ठीक पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और सरकार के बीच अनौपचारिक बातचीत (Back-channel talks) हुई है। खबर है कि सरकार पार्टी को 6 महीने का अतिरिक्त समय देने पर सहमत हो गई है। यह राहत मौखिक या अनौपचारिक स्तर पर बताई जा रही है, ताकि कांग्रेस अपने विशाल पुस्तकालय और दशकों पुराने ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रूप से इंदिरा भवन (9A, कोटला मार्ग) में स्थानांतरित कर सके।
🏗️ विवाद की मुख्य जड़: ‘इंदिरा भवन’ बनाम ‘अकबर रोड’
केंद्र सरकार का तर्क है कि नियमों के मुताबिक किसी भी राजनीतिक दल को नया मुख्यालय मिलने के बाद पुराने सरकारी बंगले खाली करने होते हैं।
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नया पता: कांग्रेस ने जनवरी 2025 में ही अपने नए मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ का उद्घाटन कर दिया था।
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नियम: शहरी विकास मंत्रालय के नियमों के अनुसार, स्थायी कार्यालय बनने के बाद 3 साल के भीतर या निर्माण पूरा होने पर सरकारी आवास वापस करना अनिवार्य है।
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सरकार का रुख: प्रशासन का कहना है कि 24 अकबर रोड अब ‘अनाधिकृत कब्जे’ की श्रेणी में आता है क्योंकि आवंटन की अवधि समाप्त हो चुकी है।
⚖️ कांग्रेस की रणनीति: कानूनी लड़ाई की तैयारी
भले ही बातचीत से राहत की खबरें हों, लेकिन कांग्रेस कानूनी मोर्चे पर भी सक्रिय है। राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी की टीम इस नोटिस को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।
“यह केवल एक कार्यालय नहीं, बल्कि देश के राजनीतिक इतिहास का केंद्र है। हजारों ऐतिहासिक दस्तावेज और नेहरू-गांधी परिवार से जुड़ी यादें यहाँ संग्रहित हैं। इन्हें शिफ्ट करने के लिए तार्किक समय की आवश्यकता है।” — कांग्रेस सूत्र
📜 एक नजर: 24 अकबर रोड का इतिहास
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1978: इमरजेंसी के बाद हार झेलने के बाद कांग्रेस ने इस बंगले को अपना ठिकाना बनाया था।
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48 साल: यह बंगला करीब 5 दशकों तक देश की सबसे पुरानी पार्टी की सत्ता और संघर्ष का केंद्र रहा।
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ऐतिहासिक क्षण: राजीव गांधी से लेकर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व के बड़े फैसले इसी परिसर में लिए गए।
🔍 आगे क्या होगा?
फिलहाल, दिल्ली प्रशासन ने किसी भी तरह की ‘जबरन बेदखली’ की कार्रवाई नहीं की है। यदि सरकार औपचारिक रूप से 6 महीने की राहत का आदेश जारी करती है, तो मामला शांत हो जाएगा। अन्यथा, आने वाले कुछ दिनों में यह विवाद दिल्ली हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुँच सकता है।
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