तेहरान | मंगलवार, 28 अप्रैल 2026
वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों में ईरान और अमेरिका के बीच शुरू हुआ सैन्य संघर्ष अब एक नाजुक मोड़ पर है। पाकिस्तान ने इस संकट को सुलझाने के लिए खुद को एक ‘मध्यस्थ’ के रूप में पेश किया था, लेकिन नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, 25 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में होने वाली दूसरे दौर की शांति वार्ता बुरी तरह विफल रही है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची पाकिस्तान के नेतृत्व से मिलने के बाद बिना किसी समझौते के वापस लौट गए, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्रतिनिधियों (स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर) की पाकिस्तान यात्रा रद्द कर दी।
ईरान की नाराजगी और ‘भरोसे की कमी’ के मुख्य कारण
ईरानी नेतृत्व, विशेषकर सांसद इब्राहिम रेजाई, ने पाकिस्तान की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए हैं। ईरान के अविश्वास के पीछे निम्नलिखित ठोस कारण सामने आए हैं:
1. पाकिस्तान का ‘अमेरिकी झुकाव’ और सोशल मीडिया चूक
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सोशल मीडिया हैंडल से हुई एक गलती ने ईरान के संदेह को सही साबित कर दिया। एक पोस्ट में “Draft- Message from PM” लिखा पाया गया, जिससे यह संकेत मिला कि पाकिस्तान का रुख स्वतंत्र नहीं, बल्कि बाहरी (अमेरिकी) प्रभाव से प्रेरित है।
2. 10 बनाम 16 सूत्रीय योजना का विवाद
ईरान ने शांति के लिए एक 10-सूत्रीय योजना पेश की थी। आरोप है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने ईरान की इस योजना को आगे बढ़ाने के बजाय अमेरिका की 15-16 नई और कठिन शर्तें ईरान के सामने रख दीं। ईरान इसे मध्यस्थता नहीं, बल्कि अमेरिकी दबाव का जरिया मान रहा है।
3. सीजफायर और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)
8 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान की पहल पर दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाया गया। हालांकि, ईरान का आरोप है कि पाकिस्तान अमेरिका द्वारा लगाए गए ‘नौसैनिक ब्लॉकडे’ (Naval Blockade) पर चुप्पी साधे हुए है, जबकि वह ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की मांग कर रहा है।
क्या पाकिस्तान ‘डबल गेम’ खेल रहा है?
ईरानी विश्लेषकों और मीडिया का दावा है कि पाकिस्तान अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने और आर्थिक सहायता प्राप्त करने के लिए यह नाटक कर रहा है।
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जमीनी हकीकत: ईरान का कहना है कि पाकिस्तान वार्ता में ऐसी प्रगति दिखा रहा है जो वास्तव में है ही नहीं।
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कूटनीतिक विफलता: वार्ताओं के विफल होने के बाद ईरान अब मध्यस्थता के लिए ओमान और रूस की ओर देख रहा है।
2026 का कूटनीतिक सारांश (Table)
| विवरण | स्थिति (अप्रैल 2026) |
| मुख्य मध्यस्थ | पाकिस्तान (वर्तमान में विवादित) |
| ईरान की मांग | प्रतिबंधों की समाप्ति और नौसैनिक घेराबंदी हटाना |
| अमेरिका की शर्त | परमाणु कार्यक्रम पर पूर्ण रोक और “Zero Enrichment” |
| वार्ता का परिणाम | विफल; ट्रंप ने डेलिगेशन की यात्रा रद्द की |
| नया कूटनीतिक केंद्र | मस्कट (ओमान) और सेंट पीटर्सबर्ग (रूस) |
Facts
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भ्रम: कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि वार्ता सफल रही।
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तथ्य: 25-26 अप्रैल 2026 की वार्ता के बाद कोई आधिकारिक समझौता नहीं हुआ है। ट्रंप ने इसे “समय की बर्बादी” बताते हुए अपने दूतों को भेजने से मना कर दिया।
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भ्रम: पाकिस्तान पूरी तरह निष्पक्ष है।
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तथ्य: ईरान ने आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान की ‘विश्वसनीयता’ (Credibility) पर सवाल उठाए हैं और उसे अमेरिका की ओर झुका हुआ बताया है।
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