गुवाहाटी । मंगलवार, 28 अप्रैल 2026
असम के धुबरी जिले के गौरीपुर से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने मानवता और विश्वास को शर्मसार कर दिया है। ‘निबारन’ नामक एक नशामुक्ति केंद्र (Rehab Center), जिसे लोगों को नई जिंदगी देने के लिए बनाया गया था, वह वास्तव में प्रताड़ना और जबरन धर्मांतरण का अड्डा बन चुका था। पुलिस की हालिया कार्रवाई ने इस काले साम्राज्य का भंडाफोड़ किया है।
कैसे हुआ खुलाशा?
यह मामला तब प्रकाश में आया जब शुक्रवार (24 अप्रैल) की रात केंद्र की ऊंची इमारत से 5 युवकों ने अपनी जान बचाने के लिए छलांग लगा दी। स्थानीय लोगों ने जब उन्हें घायल अवस्था में देखा, तो पुलिस को सूचित किया गया। तलाशी के दौरान पुलिस ने पाया कि केंद्र के भीतर 9 लोग अमानवीय परिस्थितियों में कैद थे।
टॉर्चर की रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्तां
बचाए गए पीड़ितों ने जो आपबीती सुनाई, वह किसी भी सभ्य समाज को झकझोर सकती है:
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जबरन धर्मांतरण: हिंदू युवकों को इस्लाम कबूल करने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था।
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धार्मिक मान्यताओं पर प्रहार: पीड़ितों ने आरोप लगाया कि उन्हें जबरन गोमांस (Beef) खाने पर मजबूर किया गया। इनकार करने पर लोहे की रॉड और पाइप से बेरहमी से पिटाई की जाती थी।
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बंधुआ मजदूरी: मरीजों से स्टाफ के कपड़े धुलवाए जाते थे और शौचालय साफ करवाए जाते थे।
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आर्थिक लूट: परिजनों से ₹12,000 की भारी-भरकम फीस वसूली जा रही थी, लेकिन मरीजों को केवल बिना नमक वाले उबले आलू और चावल खिलाए जाते थे।
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प्रशासनिक चूक और कानूनी कार्रवाई
जांच में यह बड़ा ‘करेक्शन’ और खुलासा हुआ कि ‘निबारन’ सेंटर पिछले 3 सालों से बिना किसी वैध लाइसेंस या पंजीकरण के चल रहा था। प्रशासन की नाक के नीचे इतने लंबे समय तक अवैध गतिविधि का चलना सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करता है।
अब तक पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, हालांकि मुख्य मास्टरमाइंड जाहिरुल शेख अभी भी फरार है। पुलिस की विशेष टीमें उसकी तलाश में छापेमारी कर रही हैं।
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