नई दिल्ली. ईरान और भारत के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज़ होती जा रही हैं। मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, गाजा–लेबनान संघर्ष, रेड सी (Red Sea) में समुद्री असुरक्षा और ईरान के आंतरिक हालातों के बीच ईरानी उच्चाधिकारियों का भारत दौरा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी अली अकबर अहमदियान (Ali Akbar Ahmadian) ने भारतीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों से जुड़े शीर्ष अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठकें कीं। इन चर्चाओं को भारत–ईरान संबंधों में एक नए रणनीतिक चरण के रूप में देखा जा रहा है।
डिप्टी NSA के साथ अहम बैठक, सुरक्षा सहयोग पर फोकस
ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने भारत के डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (Deputy NSA) के साथ द्विपक्षीय बैठक की।
बैठक का मुख्य उद्देश्य था:
- द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग को मज़बूत करना
- आतंकवाद विरोधी रणनीति पर समन्वय
- क्षेत्रीय स्थिरता के लिए साझा रणनीतिक दृष्टिकोण विकसित करना
- खुफिया जानकारी साझा करने (Intelligence Sharing) पर सहयोग
मिडिल ईस्ट तनाव पर गंभीर मंथन
बैठक में मध्य पूर्व के मौजूदा हालात पर गहन चर्चा हुई, जिसमें प्रमुख रूप से शामिल रहे:
- गाजा और लेबनान संघर्ष
- रेड सी में जहाज़ों पर हमले और समुद्री सुरक्षा
- हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा
- नेविगेशन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation)
भारत ने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय शांति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की सुरक्षा और समुद्री कानूनों का पालन वैश्विक स्थिरता के लिए अनिवार्य है।
चाबहार पोर्ट और INSTC पर रणनीतिक बातचीत
भारत–ईरान संबंधों का सबसे अहम स्तंभ चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) और
अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC – International North South Transport Corridor) है।
बैठक में चर्चा हुई:
- चाबहार पोर्ट के विस्तार और संचालन में तेजी
- भारत–ईरान–रूस–मध्य एशिया कनेक्टिविटी
- वैकल्पिक व्यापार मार्गों का विकास
- चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के मुकाबले रणनीतिक संतुलन
यह परियोजनाएं भारत को पाकिस्तान को बायपास कर मध्य एशिया और यूरोप तक सीधी पहुँच प्रदान करती हैं।
आतंकवाद और अफगानिस्तान पर साझा चिंता
दोनों देशों ने:
- आतंकवाद विरोधी सहयोग
- कट्टरपंथी संगठनों की गतिविधियों
- अफगानिस्तान की अस्थिर स्थिति
- ड्रग ट्रैफिकिंग और हथियार तस्करी
पर साझा रणनीति बनाने पर सहमति जताई।
वर्तमान संदर्भ (2026): ईरान के आंतरिक हालात और भारत की संतुलन नीति
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब:
- ईरान में मुद्रा अवमूल्यन (Currency Devaluation) और आर्थिक संकट को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं
- भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की थी
- खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है
- वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा पर असर की आशंका बढ़ी है
भारत की विदेश नीति इस समय “Strategic Balance Diplomacy” पर आधारित है, जिसमें:
- ईरान के साथ ऐतिहासिक संबंध बनाए रखना
- खाड़ी देशों (Saudi Arabia, UAE, Qatar, Israel) से मजबूत रिश्ते
- अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी
- रूस और एशिया के साथ बहुपक्षीय संतुलन
को एक साथ साधने की कोशिश की जा रही है।
रणनीतिक महत्व क्यों है यह दौरा?
विशेषज्ञों के अनुसार यह दौरा:
- भारत की बहुपक्षीय कूटनीति (Multi-Alignment Policy) को मजबूत करता है
- मध्य पूर्व संकट में भारत की भूमिका को बढ़ाता है
- ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार मार्ग और समुद्री सुरक्षा में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करता है
- एशिया–मिडिल ईस्ट–यूरोप कॉरिडोर (IMEC) रणनीति से भी जुड़ता है
अली अकबर अहमदियान का भारत दौरा केवल द्विपक्षीय मुलाकात नहीं, बल्कि भारत–ईरान–मिडिल ईस्ट–मध्य एशिया भू-राजनीतिक संतुलन का एक अहम संकेत है। यह स्पष्ट करता है कि भारत अब केवल आर्थिक शक्ति नहीं, बल्कि एक रणनीतिक वैश्विक खिलाड़ी के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।
Matribhumisamachar


