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साध्वी निरंजन ज्योति: हमीरपुर की बेटी अब राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की कमान संभालेंगी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के एक छोटे से गांव पत्योरा से निकलकर देश की राजनीति के शीर्ष पदों तक पहुँचने वाली साध्वी निरंजन ज्योति ने एक बार फिर इतिहास रचा है। केंद्र सरकार ने उनकी सादगी, अनुभव और पिछड़ों के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है।

इस खबर के आते ही उनके गृह जनपद हमीरपुर और कर्मभूमि फतेहपुर में जश्न का माहौल है। तांबेश्वर नगर स्थित उनके आवास और मूसानगर आश्रम में समर्थकों ने मिठाई बांटकर खुशियां मनाईं।

? शून्य से शिखर तक: जीवन परिचय और संघर्ष

1 मार्च 1967 को एक साधारण निषाद परिवार में जन्मीं साध्वी निरंजन ज्योति का शुरुआती जीवन अभावों और कठिन परिस्थितियों के बीच बीता। लेकिन उनके भीतर की आध्यात्मिक चेतना ने उन्हें एक नई राह दिखाई।

  • आध्यात्मिक झुकाव: वे संतश्री परमानंद जी महाराज की शिष्या बनीं और अपनी ओजस्वी वाणी के कारण कथा वाचक के रूप में प्रसिद्ध हुईं।

  • निरंजनी अखाड़े की पहचान: उनकी विद्वत्ता और धर्म के प्रति निष्ठा को देखते हुए उन्हें प्रतिष्ठित निरंजनी अखाड़े में महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई।

  • राम मंदिर आंदोलन: 1990 के दशक में जब देश में राम मंदिर आंदोलन चरम पर था, तब साध्वी जी ने अपनी प्रखर वक्तृता से जन-जन को जागरूक किया और यहीं से उनके राजनैतिक जीवन की नींव पड़ी।

?️ राजनैतिक सफर: बुंदेलखंड की आवाज बनीं ‘साध्वी’

साध्वी निरंजन ज्योति का राजनैतिक ग्राफ निरंतर बढ़ता रहा है। उन्होंने जमीनी स्तर पर काम करके अपनी जगह बनाई:

  1. 2012: पहली बार हमीरपुर सदर विधानसभा सीट से विधायक चुनी गईं।

  2. 2014 & 2019: फतेहपुर लोकसभा सीट से लगातार दो बार सांसद निर्वाचित हुईं।

  3. केंद्रीय भूमिका: मोदी सरकार के पहले और दूसरे कार्यकाल में उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और ग्रामीण विकास मंत्रालय में राज्यमंत्री के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

?️ NCBC अध्यक्ष: क्या होंगी नई चुनौतियां और जिम्मेदारियां?

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग एक संवैधानिक निकाय (Article 338B) है। अध्यक्ष के रूप में साध्वी निरंजन ज्योति के पास अब कैबिनेट मंत्री के समकक्ष शक्तियां होंगी। उनकी प्राथमिकताओं में ये बिंदु शामिल रहेंगे:

  • संवैधानिक संरक्षण: ओबीसी (OBC) समुदायों के संवैधानिक अधिकारों का हनन होने पर जांच करना।

  • आरक्षण और नीतियां: पिछड़ी जातियों के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की समीक्षा करना।

  • सामाजिक न्याय: समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ना।

  • क्रीमी लेयर और उप-वर्गीकरण: आयोग के सामने पिछड़ों के भीतर आरक्षण के सही वितरण और उप-वर्गीकरण जैसे संवेदनशील मुद्दे भी चर्चा का विषय हो सकते हैं।

? “अंतिम व्यक्ति का उत्थान ही मेरा संकल्प”

नियुक्ति के बाद मीडिया से बातचीत में साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि यह जिम्मेदारी उनके लिए पद नहीं, बल्कि सेवा का अवसर है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा:

“मेरा जीवन हमेशा समाज के वंचित और पिछड़ों के लिए समर्पित रहा है। आयोग के माध्यम से मैं यह सुनिश्चित करूंगी कि सरकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचे।”

? निष्कर्ष

साध्वी निरंजन ज्योति की यह नियुक्ति बुंदेलखंड के गौरव को बढ़ाने वाली है। एक महिला, एक संत और एक पिछड़ा वर्ग की नेता के रूप में उनकी यह त्रिकोणीय भूमिका आगामी राजनैतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।