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योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला: मेरठ के 99 विस्थापित बंगाली परिवारों को कानपुर देहात में मिलेगा नया घर

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योगी आदित्यनाथ कैबिनेट मीटिंग की फोटो

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ कैबिनेट ने 29 जनवरी 2026 को एक ऐतिहासिक, मानवीय और पर्यावरण-संवेदनशील निर्णय लेते हुए मेरठ जिले में झील की जमीन पर दशकों से रह रहे 99 विस्थापित बंगाली हिंदू परिवारों को कानपुर देहात में स्थायी रूप से बसाने की मंजूरी दे दी।

यह फैसला एक साथ मानवाधिकार, सामाजिक न्याय और पर्यावरण संरक्षण — तीनों दृष्टिकोणों से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

🔹 क्या है पूरा मामला?

ये सभी 99 परिवार पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) से विस्थापित होकर मेरठ जिले की मवाना तहसील के नंगला गोसाई गांव में एक झील की भूमि पर वर्षों से रह रहे थे।
यह इलाका पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील माना जाता है, जहाँ अतिक्रमण के कारण झील के अस्तित्व और जैव विविधता पर संकट बना हुआ था।

सरकार ने समाधान के रूप में पुनर्वास नीति अपनाते हुए इन परिवारों को सम्मानजनक और स्थायी जीवन देने का निर्णय लिया।

📍 कहां होगा पुनर्वास? (Rehabilitation Plan)

इन परिवारों को कानपुर देहात जिले की रसूलाबाद तहसील के दो गांवों में बसाया जाएगा:

✔️ ग्राम भैंसाया

  • भूमि: 11.1375 हेक्टेयर
  • परिवार: 50

✔️ ग्राम ताजपुर तरसौली

  • भूमि: 10.530 हेक्टेयर
  • परिवार: 49

🏡 भूमि आवंटन नीति

  • प्रत्येक परिवार को 0.50 एकड़ भूमि
  • भूमि 30 वर्षों के पट्टे (लीज) पर
  • पट्टा दो बार 30-30 वर्षों के लिए नवीनीकरण योग्य
  • इस प्रकार कुल 90 वर्षों तक अधिकार सुरक्षित

यह नीति इन परिवारों को स्थायित्व, सुरक्षा और भविष्य की गारंटी प्रदान करती है।

🌱 फैसले का बहुआयामी महत्व

1️⃣ मानवीय दृष्टिकोण

दशकों से अस्थायी जीवन जी रहे परिवारों को:

  • स्थायी आश्रय
  • कानूनी पहचान
  • सामाजिक सुरक्षा
  • भविष्य की स्थिरता

2️⃣ पर्यावरण संरक्षण

मेरठ की झील क्षेत्र से अतिक्रमण हटने से:

  • जल संरक्षण
  • पारिस्थितिक संतुलन
  • जैव विविधता का संरक्षण
  • झील पुनर्जीवन की प्रक्रिया शुरू

3️⃣ स्मार्ट विलेज मॉडल

सरकार इन पुनर्वास क्षेत्रों को ‘स्मार्ट विलेज’ के रूप में विकसित करेगी, जहाँ होंगी:

  • स्कूल
  • स्वास्थ्य केंद्र
  • सड़क व परिवहन
  • बिजली-पानी
  • डिजिटल सुविधाएँ
  • स्वरोजगार के अवसर

📜 पूर्व अनुभव भी रहा सफल

वर्ष 2022 में भी योगी सरकार ने मेरठ के हस्तिनापुर क्षेत्र से विस्थापित 63 बंगाली हिंदू परिवारों को कानपुर देहात में सफलतापूर्वक बसाया था।
वही मॉडल अब इस बड़े पुनर्वास कार्यक्रम में लागू किया जा रहा है।

योगी सरकार का यह फैसला केवल पुनर्वास नहीं, बल्कि एक मानवता-आधारित विकास मॉडल है, जहाँ

➡️ मानव अधिकार
➡️ पर्यावरण संरक्षण
➡️ सामाजिक पुनर्निर्माण
➡️ सतत विकास
➡️ प्रशासनिक संवेदनशीलता
सभी एक साथ दिखाई देते हैं।

यह निर्णय आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर पुनर्वास नीति का मॉडल बन सकता है।

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