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बीटिंग रिट्रीट 2026: गणतंत्र दिवस समारोह का भव्य समापन, जानें मुख्य आकर्षण

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. ऐतिहासिक विजय चौक पर आज 29 जनवरी 2026 को परंपरागत ‘बीटिंग रिट्रीट’ (Beating Retreat Ceremony 2026) के साथ 77वें गणतंत्र दिवस के चार दिवसीय राष्ट्रीय उत्सव का औपचारिक और गौरवशाली समापन हुआ। यह समारोह केवल एक सैन्य परंपरा नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, संगीत, सैन्य गौरव और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन चुका है।

बीटिंग रिट्रीट 2026 की मुख्य विशेषताएं

राष्ट्रपति की अध्यक्षता में आयोजन

समारोह की अध्यक्षता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की, जो भारत की सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर हैं।
उनके साथ मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, तीनों सेनाओं के प्रमुख, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, राजनयिक प्रतिनिधि और अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।

? ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष: ऐतिहासिक थीम

इस वर्ष समारोह की थीम बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में रखी गई।
कार्यक्रम की संगीत संरचना और धुनों में ‘वंदे मातरम्’ की आत्मा और राष्ट्रभक्ति की भावना स्पष्ट रूप से देखने को मिली।

? भारतीय वाद्ययंत्रों के नाम पर दीर्घाएं

2026 समारोह की एक अनूठी विशेषता रही विजय चौक की दीर्घाओं (Seating Enclosures) का नामकरण भारतीय वाद्ययंत्रों पर आधारित होना:

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  • बांसुरी
  • डमरू
  • मृदंगम
  • शहनाई
  • वीणा

यह पहल भारतीय सांस्कृतिक पहचान और शास्त्रीय संगीत परंपरा को सम्मान देने का प्रतीक बनी।

? स्वदेशी धुनों पर सैन्य बैंड का प्रदर्शन

थल सेना, नौसेना, वायु सेना और राज्य पुलिस बैंड्स ने पूरी तरह भारतीय स्वदेशी धुनों पर प्रस्तुति दी।
कदम-कदम बढ़ाए जा’, ‘ऐ वतन, ऐ वतन’, ‘वंदे मातरम्’ और अन्य देशभक्ति गीतों से पूरा विजय चौक देशप्रेम से गूंज उठा।

यह प्रदर्शन भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति और सांस्कृतिक आत्मविश्वास का सशक्त प्रतीक बना।

बीटिंग रिट्रीट समारोह का ऐतिहासिक महत्व

‘बीटिंग रिट्रीट’ एक सदियों पुरानी सैन्य परंपरा है, जिसकी शुरुआत युद्धकाल में सूर्यास्त के समय सैनिकों को शिविरों में लौटने का संकेत देने के लिए की जाती थी।
आज यह परंपरा भारत में गणतंत्र दिवस के आधिकारिक समापन समारोह के रूप में स्थापित हो चुकी है।

कार्यक्रम के अंत में जब:

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  • ‘सारे जहाँ से अच्छा’ की धुन बजती है
  • राष्ट्रपति भवन, संसद भवन, नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक रोशनी से जगमगा उठते हैं
  • पूरा क्षेत्र प्रकाश, संगीत और अनुशासन का संगम बन जाता है

तो वह दृश्य देशवासियों के लिए अविस्मरणीय बन जाता है।

सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक

बीटिंग रिट्रीट 2026 केवल एक समारोह नहीं, बल्कि यह संदेश है कि भारत:

  • अपनी सैन्य परंपराओं पर गर्व करता है
  • अपनी संस्कृति और संगीत विरासत को सहेजता है
  • और राष्ट्रीय एकता को उत्सव के रूप में जीता है

यह आयोजन भारत की शक्ति, सौंदर्य, अनुशासन और आत्मा—चारों का अद्भुत संगम है।

Beating Retreat Ceremony 2026 ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि भारत की परंपराएं केवल इतिहास नहीं, बल्कि जीवंत संस्कृति हैं। 77वें गणतंत्र दिवस का यह समापन समारोह राष्ट्रभक्ति, गर्व, भावनाओं और सांस्कृतिक चेतना से परिपूर्ण रहा। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए भी राष्ट्रीय गौरव का प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।