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फरीदाबाद नाबालिग गैंगरेप: ईशा मंसूरी ने दोस्ती के नाम पर दिया धोखा, हिंदू संगठनों के विरोध के बाद पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज

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फरीदाबाद । सोमवार, 29 जून 2026

हरियाणा के फरीदाबाद से एक दिल दहला देने वाला और बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ दोस्ती और भरोसे के रिश्ते को कलंकित करते हुए एक 15 वर्षीय नाबालिग हिंदू लड़की को हवस का शिकार बनाया गया। आरोप है कि एक 21 वर्षीय महिला ने पहले नाबालिग से सुनियोजित तरीके से दोस्ती की और फिर उसे अपने घर बुलाकर बंधक बना लिया, जहाँ दर्जनों पुरुषों द्वारा उसके साथ बेरहमी से सामूहिक दुष्कर्म (Gangrape) किया गया।

इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में भारी तनाव का माहौल है। पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने शुरुआत में मामला दर्ज करने में टालमटोल की। बाद में स्थानीय हिंदू संगठनों के भारी विरोध और हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।

दोस्ती के नाम पर जाल में फंसाया, फिर किया सौदा

जानकारी के अनुसार, मुख्य आरोपी महिला की पहचान 21 वर्षीय ईशा मंसूरी के रूप में हुई है। ईशा ने फरीदाबाद की रहने वाली इस 15 साल की नाबालिग लड़की को अपनी बातों में फंसाकर उससे गहरी दोस्ती की थी। महिला पर भरोसा करके नाबालिग अपना घर छोड़कर उसके पास चली गई।

पीड़िता का आरोप है कि आरोपी महिला ने पहले उसे अपने घर पर बंधक बनाया। इसके बाद महिला के एक परिचित व्यक्ति ने उसके साथ दुष्कर्म किया। सिलसिला यहीं नहीं थमा; आरोप के मुताबिक, इसके बाद ईशा के घर पर कई अन्य पुरुषों ने नाबालिग के साथ सामूहिक बलात्कार (Gangrape) जैसी जघन्य वारदात को अंजाम दिया।

नरक से भागने पर आरोपी के पति ने दी धमकी

जैसे-तैसे जब पीड़िता उस नरक से भागने में सफल रही, तो आरोपी महिला और उसके पति ने उसे रास्ते में दोबारा दबोच लिया। आरोपियों ने नाबालिग को डराया-धमकाया और पुलिस या परिजनों के पास न जाने का दबाव बनाया। उन्होंने पीड़िता को प्रलोभन देते हुए कहा कि वह अपने घर वापस न जाए और वहीं रहकर उनके लिए पैसे कमाए, जिसके बदले वे उसे ऐशो-आराम की जिंदगी देंगे। हालांकि, पीड़िता किसी तरह दोबारा उनके चंगुल से छूटकर अपने घर पहुंचने में कामयाब रही और रोते हुए परिजनों को अपनी आपबीती सुनाई।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल, संगठनों ने किया विरोध

पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि जब वे इस जघन्य अपराध की शिकायत लेकर थाने पहुंचे, तो पुलिस का रवैया बेहद असंवेदनशील था। पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर पीड़िता के माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार किया और मामले को रफा-दफा करने या टालने की कोशिश की।

जब यह बात स्थानीय हिंदू संगठनों तक पहुंची, तो वे पीड़िता के समर्थन में आ गए। पुलिस प्रशासन के खिलाफ तीखे विरोध-प्रदर्शन और भारी दबाव के बाद आखिरकार फरीदाबाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझा और आरोपियों के खिलाफ सख्त धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज की।

कानूनी पहलू: कानून के तहत क्या हो सकती है कार्रवाई?

चूंकि पीड़िता नाबालिग है, इसलिए इस पूरे मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की बेहद सख्त धाराएं लगाई गई हैं:

  • नाबालिग से गैंगरेप पर सख्त सजा: देश के कानून के मुताबिक, 16 साल से कम उम्र की नाबालिग के साथ गैंगरेप के मामले में दोषियों को न्यूनतम 20 साल की बामशक्कत कैद, आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक की सजा का प्रावधान है।

  • साजिशकर्ताओं को भी बराबर की सजा: इस मामले में मुख्य आरोपी ईशा मंसूरी और उसके पति पर अपहरण, मानव तस्करी (Human Trafficking) और गैंगरेप की साजिश रचने का मामला बनता है। कानूनन, इस तरह के अपराध में मदद करने या उकसाने वाले को भी मुख्य अपराधी जितनी ही सजा मिलती है।

  • लापरवाह पुलिसकर्मियों पर एक्शन: सुप्रीम कोर्ट के साफ निर्देश हैं कि नाबालिग से जुड़े यौन अपराधों में पुलिस को बिना किसी देरी के ‘जीरो एफआईआर’ या नियमित एफआईआर दर्ज करनी होती है। शिकायत दर्ज करने में देरी करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा 21 के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जा सकता है।

प्रशासनिक रुख और आगे की जांच

मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया है और अदालत में धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विशेष टीम का गठन किया गया है और फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) में की जाए ताकि पीड़िता को जल्द से जल्द न्याय मिल सके और अपराधियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाया जा सके।

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