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AMU हिंसा मामला: लाइब्रेरी साइंस विभाग में प्रैक्टिकल के दौरान बवाल, आरोपी छात्र निलंबित

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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय

अलीगढ़ । गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस विभाग में बुधवार को प्रायोगिक परीक्षा के दौरान एक छात्र द्वारा की गई हिंसक गतिविधियों ने पूरे परिसर को दहला दिया। अनुशासनहीनता की सारी हदें पार करते हुए छात्र ने न केवल शिक्षकों के साथ मारपीट की, बल्कि परीक्षा कक्ष का दरवाजा बाहर से बंद कर छात्राओं को बंधक बना लिया, जिससे कई छात्राएं बेहोश हो गईं।

क्या है पूरा मामला?

लाइब्रेरी साइंस विभाग की कंप्यूटर लैब में बीलिब (BLib) की प्रैक्टिकल परीक्षा चल रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, परीक्षा के बीच में ही सैयद आबिद हैदर नामक छात्र ने अचानक हंगामा शुरू कर दिया। प्रॉक्टर प्रो. नवेद खान ने बताया कि छात्र ने लैब इंचार्ज मोहम्मद आसिफ खान और अन्य परीक्षकों के साथ अभद्रता और मारपीट की। इतना ही नहीं, आरोपी ने लैब के अंदर कुर्सियां फेंकी और वहां मौजूद छात्राओं के साथ धक्का-मुक्की की।

दहशत के कारण छात्राएं हुईं बेहोश

विवाद उस समय और अधिक गंभीर हो गया जब आरोपी छात्र ने परीक्षा कक्ष का गेट बाहर से बंद कर दिया। काफी देर तक कमरे में फंसे रहने और बढ़ते तनाव के कारण कई छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई। कुछ छात्राओं को घबराहट के कारण बेहोशी की शिकायत हुई, जिसके बाद आनन-फानन में एंबुलेंस बुलाकर उन्हें चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। इस घटना के बाद विभाग में दहशत का माहौल बन गया और परीक्षा को तुरंत रद्द करना पड़ा।

प्रशासन की सख्त कार्रवाई

एएमयू प्रशासन ने इस घटना को ‘गंभीर कदाचार’ मानते हुए छात्र आचरण एवं अनुशासन नियम, 1985 के तहत त्वरित कार्रवाई की है:

  • निलंबन: सैयद आबिद हैदर को तत्काल प्रभाव से विश्वविद्यालय से निलंबित कर दिया गया है।

  • प्रवेश पर रोक: जांच पूरी होने तक आरोपी छात्र के कैंपस में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।

  • शिक्षक पर भी आरोप: इस बीच, राजनीति विज्ञान विभाग के एक शिक्षक द्वारा आरोपी छात्र का बचाव करने की बात सामने आई है। कार्यवाहक प्रॉक्टर प्रो. इफ्तखार असगर से उनकी कहासुनी भी हुई, जिसकी शिकायत अब कुलपति से की गई है।

निष्कर्ष और सुधार की आवश्यकता

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले की विस्तृत जांच के लिए एक कमेटी गठित की है। यह घटना शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा और अनुशासन की व्यवस्था पर कड़े सवाल खड़े करती है। छात्रों और शिक्षकों के बीच बढ़ते इस तरह के टकराव परिसर के शैक्षणिक वातावरण को दूषित कर रहे हैं।

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