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सिंधु जल संधि पर भारत के कड़े रुख और आंतरिक कुप्रबंधन से कराची में पानी का गंभीर संकट, बूंद-बूंद को तरसी जनता

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इस्लामाबाद । शनिवार, 30 मई 2026

पाकिस्तान की आर्थिक रीढ़ और सबसे बड़ा शहर कराची इस समय इतिहास के सबसे भीषण जल संकट (Karachi Water Crisis) का सामना कर रहा है। चिलचिलाती गर्मी के बीच शहर के करीब 70 प्रतिशत से अधिक इलाकों में पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गुलिस्तान-ए-जौहर, गुलशन-ए-इकबाल, अजीजाबाद, लियाकताबाद, नाजिमाबाद और उत्तरी कराची जैसे प्रमुख रिहायशी इलाकों में पिछले दो हफ्तों से एक बूंद पानी नहीं आया है। आम जनता ईद जैसे त्योहारों और छुट्टियों के दौरान भी पानी के महंगे निजी टैंकरों को खरीदने के लिए मजबूर है।

इस विकट स्थिति ने पाकिस्तान के भीतर एक बड़ा राजनीतिक और कूटनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है, जिसमें एक तरफ भारत का अंतरराष्ट्रीय दबाव है तो दूसरी तरफ अंदरूनी सरकारों का भ्रष्टाचार।

संकट का सबसे बड़ा कारण: सिंधु जल संधि पर भारत की कूटनीतिक स्ट्राइक

कराची और पूरे पाकिस्तान में गहराते इस जल संकट के पीछे सबसे महत्वपूर्ण बाहरी कारण भारत द्वारा लिया गया एक ऐतिहासिक और कूटनीतिक फैसला है। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ एक बड़ी डिप्लोमेटिक स्ट्राइक की थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में भारत ने करीब 65 साल पुरानी सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty – IWT) को अस्थायी रूप से निलंबित (Suspend) करने का बड़ा निर्णय लिया।

क्या है यह संधि और क्यों फंसा पाकिस्तान का दम?

19 सितंबर 1960 को भारत और पाकिस्तान के बीच छह नदियों के पानी को बांटने के लिए यह समझौता हुआ था। इसके तहत:

  • पूर्वी नदियां (रावी, ब्यास और सतलुज): इन पर भारत का पूरा अधिकार था।

  • पश्चिमी नदियां (सिंधु, झेलम और चिनाब): इनका पानी पाकिस्तान को इस्तेमाल करने की अनुमति थी।

चूंकि पाकिस्तान की 80% से अधिक कृषि और जल आपूर्ति इन्हीं पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चिनाब) पर निर्भर करती है, भारत द्वारा इस संधि को रोके जाने के बाद से पाकिस्तान के बांधों और जल प्रणालियों में पानी का इनफ्लो (आवक) ऐतिहासिक रूप से कम हो गया है। पाकिस्तान लगातार आरोप लगा रहा है कि भारत नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित कर रहा है, जिससे उसके वजूद पर संकट मंडराने लगा है।

आंतरिक विफलता: 18 साल का पीपीपी (PPP) शासन और कुप्रबंधन

एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पानी की आवक कम हुई है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के नीति निर्माताओं और प्रांतीय सरकारों के कुप्रबंधन ने आग में घी डालने का काम किया है। कराची में पानी की किल्लत को लेकर वहां की विपक्षी पार्टी, जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान के प्रमुख हाफिज नईम-उर-रहमान ने सिंध प्रांत पर राज कर रही पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) पर तीखा हमला बोला है।

विपक्ष का आरोप है कि:

  1. 18 साल की नाकामी: पीपीपी पिछले 18 वर्षों से सिंध प्रांत की सत्ता में है, लेकिन वह कराची जैसे सबसे बड़े राजस्व देने वाले शहर के लिए एक स्थायी वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में पूरी तरह नाकाम रही है।

  2. टैंकर माफिया को बढ़ावा: जानबूझकर सरकारी पाइपलाइनों को सूखा रखा जाता है ताकि निजी वॉटर टैंकर माफिया करोड़ों रुपये का काला कारोबार कर सकें।

यह स्थिति दर्शाती है कि पाकिस्तान लंबे समय से अपने वित्तीय और प्रशासनिक संसाधनों को व्यवस्थित करने में विफल रहा है। जिस तरह दुनिया के कई देश बुनियादी ढांचे पर ध्यान न देकर मुफ्त की राजनीति या कुप्रबंधन के कारण दिवालिया होने की कगार पर पहुंचे हैं, वही स्थिति पाकिस्तान के प्रशासनिक ढांचे में भी साफ दिखती है।

क्या है जमीनी हकीकत?

इस संकट का विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान जब तक अपनी दोहरी नीतियों में सुधार नहीं करेगा, तब तक यह संकट दूर नहीं हो सकता:

  • आतंकवाद पर लगाम: भारत ने साफ कर दिया है कि “आतंक और बातचीत (या समझौते)” साथ-साथ नहीं चल सकते। पाकिस्तान को अपनी जमीन से संचालित होने वाले आतंकी संगठनों को पूरी तरह नष्ट करना होगा, तभी सिंधु जल संधि की बहाली पर कोई चर्चा संभव है।

  • वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर का आधुनिकीकरण: कराची में पानी की चोरी और लीकेज को रोकने के लिए आधुनिक वॉटर ग्रिड और रीसाइक्लिंग प्लांट लगाने होंगे।

  • राजनीतिक इच्छाशक्ति: केवल भारत पर दोष मढ़ने के बजाय सिंध सरकार को टैंकर माफिया पर नकेल कसनी होगी।

निष्कर्ष

कराची का मौजूदा जल संकट केवल मौसम की मार या नदियों के सूखने का नतीजा नहीं है। यह भारत की आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत किए गए कड़े फैसलों और पाकिस्तान के अंदरूनी राजनीतिक भ्रष्टाचार का सामूहिक परिणाम है। यदि आने वाले दिनों में पानी की आपूर्ति बहाल नहीं की गई, तो पाकिस्तान की यह आर्थिक राजधानी पूरी तरह ठप हो सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: भारत ने सिंधु जल संधि को क्यों निलंबित किया?

उत्तर: अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के विरोध में और पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए भारत ने यह कूटनीतिक कदम उठाया।

प्रश्न 2: कराची के कौन से इलाके पानी के संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?

उत्तर: गुलिस्तान-ए-जौहर, गुलशन-ए-इकबाल, अजीजाबाद, लियाकताबाद, नाजिमाबाद और उत्तरी कराची जैसे इलाकों में पिछले दो हफ्तों से पानी की भारी किल्लत बनी हुई है।

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