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मद्रास हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: क्या हिंदू मंदिरों से हमेशा के लिए खत्म होगी ‘VIP दर्शन’ की प्रथा?

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चेन्नई । शनिवार, 30 मई 2026

भारत में धार्मिक स्थलों पर मिलने वाली विशेष सुविधाओं और ‘वीआईपी संस्कृति’ पर मद्रास हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और कड़ा प्रहार किया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि आस्था के केंद्र में भगवान के सामने हर नागरिक बराबर है, इसलिए पैसों या रसूख के दम पर मिलने वाले ‘VIP दर्शन’ को तुरंत बंद किया जाना चाहिए।

जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन की अवकाशकालीन पीठ (Vacation Bench) ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पदाधिकारी पी. चोकलिंगम द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक टिप्पणी की।

“भगवान की नज़र में सभी समान हैं” – कोर्ट के मुख्य तर्क

सुनवाई के दौरान अदालत ने समाज और सरकारी व्यवस्थाओं के सामने कई गंभीर और तार्किक सवाल खड़े किए। कोर्ट द्वारा दिए गए मुख्य तर्क इस प्रकार हैं:

  • अन्य धर्मों से तुलना: अदालत ने सवाल उठाया कि जब चर्च और मस्जिदों में प्रार्थना या दर्शन के लिए पैसे देकर विशेष कतार या वीआईपी व्यवस्था नहीं अपनाई जाती, तो फिर हिंदू मंदिरों में इस प्रकार का भेदभाव क्यों हो रहा है?

  • राजस्व के नुकसान की दलील खारिज: सरकार की ओर से तर्क दिया गया था कि VIP टिकट और विशेष दर्शन बंद करने से मंदिरों को मिलने वाले राजस्व (कमाई) का भारी नुकसान होगा। कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि केवल वित्तीय लाभ के लिए संवैधानिक समानता के अधिकार की बलि नहीं दी जा सकती।

  • नेताओं की मानसिकता पर चोट: पीठ ने मंत्रियों और विधायकों को नसीहत देते हुए कहा, “नेताओं को यह गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि वे जब चाहें मंदिर आ सकते हैं और भगवान उनका इंतजार कर रहे होंगे। वे कानून से ऊपर नहीं हैं।”

केवल इन 3 श्रेणियों को मिलेगी विशेष छूट

अदालत ने स्पष्ट किया कि वे कतारों के पूरी तरह प्रबंधन के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि वे ‘पैसे और रसूख’ के आधार पर होने वाले भेदभाव के खिलाफ हैं। कोर्ट ने साफ किया कि केवल निम्नलिखित लोगों को ही विशेष सुविधा या कतार से छूट मिलनी चाहिए:

  1. वरिष्ठ नागरिक (Senior Citizens)

  2. दिव्यांगजन (Physically Challenged)

  3. संवैधानिक पदों पर बैठे लोग (सुरक्षा और सरकारी प्रोटोकॉल के लिहाज से)

सुप्रीम कोर्ट और बांके बिहारी मंदिर मामले का संदर्भ

याचिकाकर्ता के वकील बी. जगन्नाथ ने कोर्ट को बताया कि देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने भी वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर मामले में विशेष दर्शन और वीआईपी कतार प्रणाली को समाप्त करने के लिए एक विशेष समिति का गठन करने का निर्देश दिया था। इस समिति ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट भी प्रस्तुत की है, जिससे यह साफ है कि न्यायपालिका अब धार्मिक स्थलों पर आम भक्तों की सुगमता को लेकर बेहद गंभीर है।

यह मामला तब और गरमा गया जब कोर्ट ने तिरुप्पारनकुंड्रम मंदिर के अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा कि क्या उन्होंने एक नए मंत्री के दौरे के लिए मंदिर को निर्धारित समय से अधिक देर तक खुला रखकर ‘आगम नियमों’ का उल्लंघन किया था। हालांकि सरकार ने नियमों के उल्लंघन से इनकार किया, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमों का पालन सबके लिए अनिवार्य है।

धार्मिक स्थलों के प्रबंधन से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण खबरें

धार्मिक स्थलों की सुरक्षा, डिजिटलीकरण और उनकी संपत्तियों के सही प्रबंधन को लेकर देश में लगातार बड़े बदलाव हो रहे हैं। यदि आप भारतीय मंदिरों से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण आधिकारिक जानकारियों और उनके प्रबंधन से जुड़े सुधारों को पढ़ना चाहते हैं, तो आप नीचे दिए गए लेखों को देख सकते हैं:

  • वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में कतारों की समस्या को कम करने के लिए शुरू की गई डिजिटल पहल के बारे में जानने के लिए पढ़ें: Shri Kashi Vishwanath Temple Launches Next-Gen App-Based Darshan System

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