लखनऊ । रविवार, 30 अगस्त 2026
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पुराने हाईकोर्ट परिसर और कचहरी रोड क्षेत्र में एक बार फिर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। नगर निगम की ओर से सार्वजनिक भूमि, फुटपाथों और सड़कों पर बने अवैध निर्माणों एवं वकीलों के चैंबरों पर नोटिस चस्पा किए गए हैं। इसके साथ ही, निर्धारित समय सीमा में कब्जा स्वतः न हटाने की दशा में कठोर ध्वस्तीकरण (Demolition Drive) की चेतावनी दी गई है।
1. मामला क्या है?
नगर निगम एवं स्थानीय प्रशासन का दावा है कि कचहरी मार्ग और पुराने हाईकोर्ट परिसर के आसपास बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण, खोखे और अधिवक्ताओं के चैंबर स्थापित कर लिए गए हैं।
इन निर्माणों के कारण:
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यातायात में बाधा: कचहरी और पुराने हाईकोर्ट रोड पर भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती है।
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जनसुविधाएं प्रभावित: नालियों और फुटपाथों पर कब्जे के कारण पैदल चलने वालों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
नगर निगम द्वारा जारी नोटिस में संबंधित कब्जाधारकों को समय सीमा के भीतर अपना ढांचा हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
2. न्यायिक मोर्चे पर घटनाक्रम: सुप्रीम कोर्ट से झटका
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने सार्वजनिक भूमि पर हुए इस अतिक्रमण पर कड़ा रुख अपनाते हुए नगर निगम को कानून के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
सेंट्रल बार एसोसिएशन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की पीठ (जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता) ने याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
अदालत की टिप्पणी: “सार्वजनिक सड़कों और जमीनों पर अवैध निर्माण को केवल इस आधार पर संरक्षण नहीं दिया जा सकता कि उन पर बार एसोसिएशन के सदस्य काबिज हैं।”
शीर्ष अदालत द्वारा मध्यस्थता और स्टे की मांग खारिज किए जाने के बाद नगर निगम के लिए ध्वस्तीकरण की राह साफ हो गई है।
3. वकीलों का पक्ष और पूर्व में हुए विवाद
नोटिस चस्पा होने के बाद से ही अधिवक्ताओं के बीच भारी असंतोष है। बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों का तर्क है कि:
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नैसर्गिक न्याय (Natural Justice): प्रभावित वकीलों को पर्याप्त समय और अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।
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वैकल्पिक व्यवस्था: जब तक स्थायी चैंबरों की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक उन्हें अस्थायी स्थान दिया जाए।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में मई 2026 में चलाए गए अभियान के दौरान भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अवैध ढांचे ढहाए गए थे, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारी वकीलों के बीच तीखी झड़प देखने को मिली थी।
4. प्रशासनिक तैयारी एवं कानून-व्यवस्था
संभावित टकराव को देखते हुए जिला प्रशासन और लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने रणनीति तैयार की है:
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भारी सुरक्षा बल: रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और स्थानीय पुलिस बल को कचहरी मार्ग पर तैनात किया जा रहा है।
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संवेदनशील क्षेत्र घोषित: कचहरी और पुराने हाईकोर्ट रोड के आसपास सुरक्षा घेरा मजबूत किया गया है।
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रविवार को कार्रवाई का सुझाव: न्यायिक कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए विशेष दिवस पर अभियान संचालित करने की योजना बनाई गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: नगर निगम ने किन क्षेत्रों में नोटिस जारी किए हैं?
उत्तर: लखनऊ के कचहरी रोड, पुराने हाईकोर्ट परिसर और कैसरबाग क्षेत्र के आसपास बने अवैध चैंबरों और कब्जों पर नोटिस जारी किए गए हैं।
Q2: सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों की याचिका पर क्या फैसला दिया?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के ध्वस्तीकरण आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और कहा कि सार्वजनिक सड़कों पर अवैध निर्माण को संरक्षण नहीं दिया जा सकता।
Q3: बार एसोसिएशन की प्रमुख मांग क्या है?
उत्तर: बार एसोसिएशन की मांग है कि प्रभावित अधिवक्ताओं को विस्थापित करने से पहले उनके लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए और नैसर्गिक न्याय का पालन किया जाए।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स और आधिकारिक न्यायिक आदेशों के आधार पर तैयार किया गया एक विश्लेषणात्मक समाचार विवरण है। इसका उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है।
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