नई दिल्ली. भारत और अरब देशों के बीच ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों को नई दिशा देते हुए 31 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्री बैठक (India-Arab Foreign Ministers’ Meeting – IAFMM) का आयोजन किया जा रहा है। यह सम्मेलन लगभग 10 वर्षों के अंतराल के बाद हो रहा है और भारत की ‘लिंक वेस्ट’ (Link West) नीति की मजबूती का स्पष्ट संकेत देता है।
इस बैठक का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि भारत पहली बार इस उच्च-स्तरीय सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जिससे पश्चिम एशिया और वैश्विक दक्षिण में भारत की कूटनीतिक भूमिका और सशक्त हुई है।
सम्मेलन की मुख्य जानकारी (IAFMM 2026)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| दिनांक | 31 जनवरी 2026 |
| स्थान | नई दिल्ली, भारत |
| सह-अध्यक्षता | भारत और संयुक्त अरब अमीरात |
| प्रतिभागी | अरब लीग के सभी 22 सदस्य देशों के विदेश मंत्री और महासचिव |
| विशेषता | 10 साल बाद दूसरी बैठक, भारत पहली बार मेजबान |
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य
दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्री बैठक का लक्ष्य आर्थिक, रणनीतिक, तकनीकी और मानवीय सहयोग को संस्थागत रूप देना है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में यह बैठक भारत-अरब साझेदारी को दीर्घकालिक आधार प्रदान करती है।
प्रमुख एजेंडा और चर्चा के विषय
🔹 1. ऊर्जा सुरक्षा और ग्रीन ट्रांजिशन
सम्मेलन में पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों (तेल और गैस) के साथ-साथ:
- अक्षय ऊर्जा
- ग्रीन हाइड्रोजन
- ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition)
पर सहयोग बढ़ाने को लेकर ठोस रणनीति पर चर्चा की जा रही है।
🔹 2. व्यापार, निवेश और सप्लाई चेन
भारत और अरब देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 240 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है। अब फोकस है:
- डिजिटल कनेक्टिविटी
- लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन
- फिनटेक और स्टार्टअप सहयोग
ताकि व्यापार को नई ऊँचाई दी जा सके।
🔹 3. क्षेत्रीय सुरक्षा और गाजा शांति
बैठक में:
- गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण
- पश्चिम एशिया में स्थिरता
- अमेरिका-ईरान तनाव
जैसे संवेदनशील भू-राजनीतिक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण और रोडमैप तैयार करने पर जोर है।
🔹 4. शिक्षा, तकनीक और भविष्य की साझेदारी
भारत और अरब देशों के बीच:
- कौशल विकास
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- क्वांटम कंप्यूटिंग
- उच्च शिक्षा में डिग्री की आपसी मान्यता
जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई गति देने पर सहमति बनने की संभावना है।
भारत-अरब संबंधों का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
भारत और अरब जगत के संबंध सदियों पुराने हैं और इन्हें औपचारिक रूप से मजबूत करने के लिए:
- मार्च 2002: भारत और अरब लीग के बीच सहयोग समझौता
- 2016: पहली भारत-अरब विदेश मंत्री बैठक, मनामा (बहरीन)
- सहयोग के 5 प्रमुख स्तंभ:
- अर्थव्यवस्था
- ऊर्जा
- शिक्षा
- मीडिया
- संस्कृति
IAFMM 2026 क्यों है अहम?
यह सम्मेलन:
- भारत को पश्चिम एशिया का विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार बनाता है
- ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति में भारत की भूमिका मजबूत करता है
- Link West Policy को व्यावहारिक रूप से नई ऊँचाई देता है
- भारत-अरब सहयोग को केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि बहुपक्षीय और वैश्विक स्तर पर विस्तारित करता है
नई दिल्ली में आयोजित दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्री बैठक 2026 भारत और अरब देशों के रिश्तों में नया अध्याय जोड़ने वाली है। ऊर्जा, व्यापार, सुरक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में यह सम्मेलन दोनों पक्षों के लिए दीर्घकालिक साझेदारी की मजबूत नींव तैयार करता है।
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