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भारत के ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार: तेल और गैस रॉयल्टी दरों में भारी कटौती से बदलेगी तस्वीर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्ली । मंगलवार, 12 मई 2026

केंद्र सरकार ने भारत के अपस्ट्रीम सेक्टर (खोज और उत्पादन) को नई ऊर्जा देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने घोषणा की है कि सरकार ने कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और केसिंग हेड कंडेनसेट के लिए रॉयल्टी दरों (Royalty Rates) और गणना की प्रक्रियाओं को पूरी तरह से तर्कसंगत (Rationalized) बना दिया है।

क्या हुए हैं बड़े बदलाव? (नवीनतम आंकड़े)

ताज़ा संशोधनों के तहत, सरकार ने विभिन्न श्रेणियों में रॉयल्टी के बोझ को कम किया है ताकि घरेलू और विदेशी निवेशक भारत की ज़मीन और समुद्र में छिपे संसाधनों को निकालने के लिए प्रोत्साहित हों।

उत्पादन क्षेत्रपुरानी रॉयल्टी दरनई संशोधित दर
ऑनशोर (Onshore) कच्चा तेल16.66%10%
ऑफशोर (Offshore) कच्चा तेल9.09%8%
प्राकृतिक गैस (Natural Gas)10%8%
डीपवाटर और अल्ट्रा-डीपवाटरविभिन्न जटिल दरेंपहले 7 साल के लिए 0%

सुधारों के पीछे का असली उद्देश्य

हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, यह निर्णय केवल कर कटौती नहीं है, बल्कि एक दशक लंबे सुधारों की परिणति है। इसके मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  1. एकरूपता लाना: पहले अलग-अलग अनुबंधों (Contracts) के तहत रॉयल्टी दरें भिन्न थीं, जिससे भ्रम पैदा होता था। अब इसे ‘ORD Act’ के तहत सरल और एकसमान बनाया गया है।

  2. लागत में कमी: गहरी समुद्री खुदाई (Deepwater exploration) अत्यधिक महंगी होती है। शुरुआती 7 वर्षों के लिए शून्य रॉयल्टी से कंपनियों की शुरुआती लागत कम होगी।

  3. ऊर्जा सुरक्षा: भारत वर्तमान में अपनी ज़रूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। घरेलू उत्पादन बढ़ने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

किन कंपनियों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?

इस फैसले का सीधा सकारात्मक असर भारत की सरकारी तेल कंपनियों पर देखने को मिला है। मंगलवार को बाज़ार खुलते ही ONGC के शेयरों में 6.5% और ऑयल इंडिया (Oil India) के शेयरों में 9% तक की ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कटौती से ONGC की ‘फेयर वैल्यू’ में 7-9% तक का इज़ाफा हो सकता है।

एक नए युग की शुरुआत

यह सुधार ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की दिशा में एक बड़ा कदम है। पारदर्शी और पूर्वानुमानित (Predictable) टैक्स ढांचे से न केवल घरेलू उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि भारत वैश्विक तेल और गैस मानचित्र पर एक प्रतिस्पर्धी गंतव्य के रूप में उभरेगा।

नोट : कुछ पुराने लेखों में रॉयल्टी को केवल ‘टैक्स’ बताया गया है, जबकि यह संसाधनों के निष्कर्षण के लिए दिया जाने वाला ‘स्वामित्व शुल्क’ (Usage Fee) है। साथ ही, नए नियमों में ‘केसिंग हेड कंडेनसेट’ को भी शामिल किया गया है, जो पहले कई स्पष्टताओं से बाहर था।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।