नई दिल्ली । मंगलवार, 26 मई 2026
लुटियंस दिल्ली में स्थित करीब 84 एकड़ (सरकारी दस्तावेजों के अनुसार कुल परिसर क्षेत्र लगभग 68 एकड़, जिसमें से रेस क्लब का हिस्सा 53.24 एकड़ है) की बेशकीमती सरकारी जमीन से जुड़े एक बड़े मामले में दिल्ली रेस क्लब (DRC) को बड़ा कानूनी झटका लगा है। दिल्ली उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने केंद्र सरकार की अपील को स्वीकार करते हुए क्लब को पूर्व में एकल पीठ से मिली अंतरिम राहत और स्थगन आदेश (स्टे) को पूरी तरह रद्द कर दिया है।
खंडपीठ का कड़ा रुख
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति देवेंद्र तेजस करिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि 24 अप्रैल को एकल पीठ द्वारा दिया गया आदेश अब प्रभावी नहीं रहेगा। उस आदेश में संपदा अधिकारी (Estate Officer) को सार्वजनिक परिसर अधिनियम के तहत जारी कारण बताओ नोटिस पर आगे की कार्रवाई करने से रोक दिया गया था। अदालत के इस फैसले के बाद अब केंद्र सरकार और संपदा अधिकारी के लिए परिसर खाली कराने की कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।
क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा विवाद देश की सबसे वीवीआईपी मानी जाने वाली जगह (लोक कल्याण मार्ग, प्रधानमंत्री आवास के पास) पर स्थित जमीन के पट्टे (Lease) से जुड़ा है:
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शताब्दी पुराना इतिहास: दिल्ली रेस क्लब को यह जमीन ब्रिटिश काल के दौरान वर्ष 1926 में पट्टे पर दी गई थी। हाल ही में इस क्लब ने अपने स्थापना के 100 वर्ष पूरे किए हैं।
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1994 में समाप्त हुआ पट्टा: केंद्र सरकार के भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) के मुताबिक, इस जमीन का आखिरी विस्तारित पट्टा 31 दिसंबर 1994 को समाप्त हो चुका था।
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अवैध कब्जे का आरोप: पिछले 31 वर्षों से इस पट्टे का कोई नवीनीकरण (Renewal) नहीं हुआ है। सरकार का तर्क है कि पट्टा समाप्त होने के बाद क्लब का इस जमीन पर बने रहना कानूनन ‘अवैध कब्जा’ माना जाएगा।
‘सार्वजनिक उपयोग’ के लिए खाली कराने की तैयारी
केंद्र सरकार ने इसी साल 12-13 मार्च को क्लब को एक नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर परिसर खाली करने को कहा था। सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास और वायु सेना स्टेशन के नजदीक स्थित इस बेहद महत्वपूर्ण भूमि का उपयोग “व्यापक जनहित और सार्वजनिक विकास” (संभावित सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना) के लिए किया जाना आवश्यक है। इसके बाद 17 अप्रैल को ‘सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम, 1971’ के तहत कार्रवाई शुरू करते हुए क्लब को औपचारिक कारण बताओ नोटिस दिया गया था।
5,000 परिवारों और 250 घोड़ों का भविष्य दांव पर
क्लब ने इस नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जहां एकल पीठ ने उसे 30 जुलाई तक की अंतरिम सुरक्षा दी थी, जिसे अब मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने पलट दिया है। इस फैसले के बाद क्लब प्रबंधन, वहां मौजूद करीब 250 से अधिक कीमती रेस के घोड़ों (Thoroughbreds) के रख-रखाव और क्लब पर निर्भर लगभग 5,000 परिवारों की आजीविका को लेकर अनिश्चितता के बादल गहरा गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रेस ट्रैक और अस्तबलों को किसी दूसरी जगह स्थानांतरित करना एक बेहद जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है।
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