संभल । रविवार, 19 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश के संभल में स्थित ऐतिहासिक श्री हरिहर मंदिर बनाम शाही जामा मस्जिद विवाद (Sambhal Harihar Mandir Shahi Jama Masjid Row) एक बार फिर कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। रविवार को इस मामले में कोई नई सर्वे कार्रवाई या अदालत की तरफ से कोई नया अंतरिम आदेश जारी नहीं किया गया। स्थानीय प्रशासन ने क्षेत्र में पूरी तरह शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखी है। फिलहाल सभी पक्षों, कानून विशेषज्ञों और आम जनता की निगाहें 21 जुलाई 2026 को होने वाली अगली महत्वपूर्ण सुनवाई पर टिकी हुई हैं।
कानूनी मोड़: क्यों टली सुनवाई और क्या है स्थिति?
संभल की चंदौसी अदालत (Chandausi Court) में इस मामले की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के स्थगनादेश (Stay Order) के कारण आगे बढ़ाई गई थी। दरअसल, शाही जामा मस्जिद प्रबंधन समिति की ओर से दायर याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने संक्षिप्त स्थगन (Brief Adjournment) की मांग की थी, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने अगली तारीख 21 जुलाई मुकर्रर की है।
इस आगामी सुनवाई में एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति की वैधता, पूर्व में हुए सर्वे के कानूनी पहलुओं और इलाहाबाद हाईकोर्ट के उन आदेशों पर विस्तृत बहस होने की संभावना है, जिसमें ट्रायल कोर्ट के सर्वे आदेश को बरकरार रखा गया था।
‘समाधान समारोह 2026’ और मध्यस्थता से इनकार
इस पूरे विवाद में एक और बड़ा मोड़ तब आया जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा देशभर के बड़े धार्मिक विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए शुरू की गई ‘समाधान समारोह 2026’ (Samadhan Samaroh 2026) नामक मध्यस्थता (Mediation) पहल को दोनों पक्षों ने सिरे से नकार दिया।
ज्ञानवापी और मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद की तरह ही संभल विवाद के हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक अधिकारों, मालिकाना हक (Title Suit) और जनभावनाओं से जुड़े इस बेहद संवेदनशील मुद्दे को किसी लोक अदालत या आपसी समझौते के जरिए नहीं, बल्कि पूरी तरह से कानूनी और न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही तय किया जाना चाहिए। मध्यस्थता की गुंजाइश खत्म होने के बाद अब यह मामला पूरी तरह कोर्ट के फैसलों पर निर्भर हो गया है।
क्या है पूरा विवाद?
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हिंदू पक्ष का दावा: अधिवक्ता हरि शंकर जैन और विष्णु शंकर जैन सहित हिंदू याचिकाकर्ताओं का दावा है कि वर्तमान शाही जामा मस्जिद का निर्माण प्राचीन ‘श्री हरिहर मंदिर’ के अवशेषों और संरचना को तोड़कर किया गया था, जिसका ऐतिहासिक महत्व 5,000 वर्ष पुराना है।
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मुस्लिम पक्ष का रुख: वहीं, मस्जिद कमेटी इन दावों का पुरजोर विरोध कर रही है। उनका तर्क है कि यह 16वीं सदी की एक ऐतिहासिक मस्जिद है और इस तरह के किसी भी वाद या सर्वे पर ‘उपासना स्थल अधिनियम, 1991’ (Places of Worship Act, 1991) के तहत रोक लगनी चाहिए।
अब 21 जुलाई को दोनों पक्षों की नई दलीलों और कानूनी बारीकियों पर अदालत का क्या रुख रहता है, इस पर पूरे उत्तर प्रदेश की नजरें बनी हुई हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. संभल जामा मस्जिद-हरिहर मंदिर विवाद की अगली सुनवाई कब है?
इस विवाद की अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें कानूनी पहलुओं और पूर्व के सर्वे पर बहस होगी।
2. सुप्रीम कोर्ट का ‘समाधान समारोह 2026’ क्या है?
यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा लंबित मामलों को आपसी सहमति और मध्यस्थता (Mediation) के जरिए सुलझाने के लिए शुरू की गई एक राष्ट्रीय पहल है, जिसे संभल विवाद के दोनों पक्षों ने मानने से इनकार कर दिया है।
3. इस मामले में हिंदू पक्ष का मुख्य दावा क्या है?
हिंदू पक्ष का दावा है कि 16वीं शताब्दी में निर्मित शाही जामा मस्जिद असल में भगवान विष्णु के प्राचीन श्री हरिहर मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल समसामयिक समाचारों और न्यायालय में चल रही विधिक प्रक्रियाओं की जानकारी देने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसका उद्देश्य किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना या विचाराधीन न्यायिक मामले पर कोई अंतिम टिप्पणी करना नहीं है।
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