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राहत: उमर खालिद को हफ्ते में 2 बार ई-मुलाकात की मिली अनुमति, कड़कड़डूमा कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

नई दिल्लीगुरुवार, 16 जुलाई 2026

दिल्ली दंगों की कथित साजिश के मामले में जेल में बंद जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद को अदालत से एक बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने उमर खालिद को जेल से हर हफ्ते दो बार ई-मुलाकात (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए परिवार और वकीलों से बातचीत) करने की अनुमति दे दी है। एडिशनल सेशंस जज समीर बाजपेयी ने जेल प्रशासन के विरोध को दरकिनार करते हुए यह आदेश जारी किया।

क्या है पूरा मामला?

अदालत में सुनवाई के दौरान उमर खालिद के वकील ने पक्ष रखते हुए कहा कि उनके मुवक्किल को पिछले छह सालों से जेल में रहते हुए हर हफ्ते दो बार ई-मुलाकात की सुविधा दी जा रही थी। हालांकि, बीते 1 मई से जेल प्रशासन ने इसे घटाकर हफ्ते में सिर्फ एक बार कर दिया था।

बचाव पक्ष ने दलील दी कि छह साल के लंबे समय में उमर खालिद ने कभी भी जेल नियमावली या किसी अन्य नियम का उल्लंघन नहीं किया है, इसलिए उनकी इस सुविधा को अचानक कम करना न्यायसंगत नहीं है।

जेल प्रशासन ने क्यों किया था विरोध?

सुनवाई के दौरान तिहाड़ जेल प्रशासन ने उमर खालिद की इस याचिका का कड़ा विरोध किया। जेल प्रशासन की तरफ से दलील दी गई कि ‘दिल्ली जेल नियमावली’ (Delhi Prison Rules) के तहत कैदियों को हफ्ते में केवल एक बार ही ई-मुलाकात की अनुमति देने का प्रावधान है। प्रशासन का कहना था कि खालिद को नियमावली से इतर जाकर अतिरिक्त सुविधा नहीं दी जा सकती।

कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा?

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एडिशनल सेशंस जज समीर बाजपेयी ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने इस बात को मुख्य आधार बनाया कि उमर खालिद पिछले छह वर्षों से इस सुविधा का लाभ उठा रहे थे और इस दौरान उनके आचरण में जेल के किसी नियम का उल्लंघन नहीं पाया गया। इसी व्यवहार और निरंतरता को देखते हुए कोर्ट ने उन्हें दोबारा हफ्ते में दो बार ई-मुलाकात करने की अनुमति दे दी।

दिल्ली दंगे और UAPA मामला

गौरतलब है कि फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के सांप्रदायिक दंगों में कम से कम 53 लोगों की जान चली गई थी और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। दिल्ली पुलिस ने इस हिंसा को एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा बताते हुए कड़े आतंकवाद विरोधी कानून ‘यूएपीए’ (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया था।

इस मामले में कुल 18 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। उमर खालिद के अलावा इस मामले के अन्य मुख्य आरोपियों में शरजील इमाम, ताहिर हुसैन, सफूरा जरगर, खालिद सैफी, इशरत जहां, मीरान हैदर, गुलफिशा, शफा उर रहमान, आसिफ इकबाल तान्हा, शादाब अहमद, तसलीम अहमद, सलीम मलिक, मोहम्मद सलीम खान, अतहर खान, फैजान खान, नताशा नरवाल और देवांगन कलीता शामिल हैं। इनमें से कई आरोपी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं, जबकि कुछ जेल में बंद हैं।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

प्रश्न 1: कोर्ट ने उमर खालिद को क्या राहत दी है?

उत्तर: दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने उमर खालिद को जेल से हर हफ्ते दो बार ई-मुलाकात (वीडियो कॉलिंग) करने की दोबारा अनुमति दे दी है।

प्रश्न 2: जेल प्रशासन ने इस सुविधा का विरोध क्यों किया था?

उत्तर: जेल प्रशासन ने दिल्ली जेल नियमावली का हवाला देते हुए कहा था कि नियमों के तहत हफ्ते में केवल एक बार ही ई-मुलाकात की अनुमति दी जा सकती है।

प्रश्न 3: उमर खालिद पर क्या आरोप हैं?

उत्तर: उमर खालिद पर फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगों की कथित बड़ी साजिश रचने का आरोप है और उनके खिलाफ यूएपीए (UAPA) के तहत मामला दर्ज है।

Disclaimer: यह लेख उपलब्ध अदालती कार्यवाहियों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। इस मामले में कानूनी प्रक्रिया और अदालती सुनवाई अभी जारी है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।