नई दिल्ली । बुधवार, 03 जून 2026
हाल ही में अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारत समेत दुनिया के कई देशों पर अतिरिक्त आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) लगाने के प्रस्ताव के बाद भारतीय वाणिज्य मंत्रालय (Commerce Ministry) ने अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट कर दिया है। सरकार ने जानकारी दी है कि भारत बंधुआ (जबरन) मजदूरी और अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता (Structural Excess Capacity) से जुड़ी चिंताओं को लेकर अमेरिका के साथ सक्रिय संपर्क में है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भारत और अमेरिका के वरिष्ठ वार्ताकार नई दिल्ली में एक बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) की रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए चर्चा कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला और USTR का टैरिफ प्रस्ताव?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के कार्यालय ने 11-12 मार्च 2026 को दो अलग-अलग श्रेणियों (जबरन श्रम और अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता) के तहत 60 अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ धारा-301 (Section 301) के तहत जांच शुरू की थी। 2 जून 2026 को USTR ने जबरन श्रम से जुड़ी जांच के निष्कर्ष जारी करते हुए इन देशों से होने वाले आयात पर अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है।
इस प्रस्ताव के तहत देशों को दो श्रेणियों में बांटा गया है:
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10 प्रतिशत शुल्क: कनाडा, इक्वाडोर, यूरोपीय संघ (EU), इंडोनेशिया, मैक्सिको और पाकिस्तान। (इन देशों ने जबरन श्रम आयात पर रोक लगाने की प्रतिबद्धता दिखाई है)।
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12.5 प्रतिशत शुल्क: भारत, चीन, ब्रिटेन और जापान सहित 54 अन्य अर्थव्यवस्थाएं। (अमेरिका का आरोप है कि इन देशों ने तीसरे देशों से होने वाले जबरन श्रम से जुड़े इनपुट को रोकने के लिए प्रभावी कानूनी उपाय लागू नहीं किए हैं)।
ध्यान दें: पाकिस्तान और इंडोनेशिया व्यापार के क्षेत्र में भारत के सीधे प्रतिस्पर्धी हैं, जिन्हें भारत से कम (10%) टैरिफ दर का सामना करना पड़ेगा।
भारत सरकार और वाणिज्य मंत्रालय की आपत्तियां
वाणिज्य मंत्रालय ने साफ किया है कि यह उपाय अभी केवल प्रस्ताव के चरण में है और इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है। भारतीय अधिकारियों और व्यापार विशेषज्ञों ने इस कदम पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं:
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जांच के दायरे से बाहर: थिंक टैंक जीटीआरआई (GTRI) के अनुसार, यह जांच धारा-301 के पारंपरिक दायरे से बाहर जाती है। धारा-301 का उपयोग संबंधित देश में अमेरिकी कंपनियों को मिलने वाली बाजार पहुंच (Market Access) की बाधाओं की जांच के लिए होता है, न कि इस बात के लिए कि वह देश तीसरे देशों से क्या आयात करता है।
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एकतरफा कार्रवाई का विरोध: भारत ने वाशिंगटन से आग्रह किया है कि वह इन मामलों को एकतरफा (Unilateral) व्यापारिक उपायों के बजाय चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं के जरिए सुलझाए।
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रियायतों की मांग: नई दिल्ली में 1 से 4 जून 2026 तक चल रही वार्ता में भारतीय पक्ष की मुख्य प्राथमिकता धारा-301 की कार्रवाई से राहत पाना और प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर या उनसे बेहतर रियायतें हासिल करना है।
किन उत्पादों को मिलेगी छूट और क्या है विशेष व्यवस्था?
वाणिज्य मंत्रालय के बयान के अनुसार, भारतीय निर्यातकों को कुछ मोर्चों पर राहत देने का भी प्रस्ताव है:
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धारा-232 के तहत आने वाले उत्पाद: क्षेत्रीय सुरक्षा शुल्क के दायरे में आने वाले कुछ उत्पादों और विशिष्ट वस्तुओं को इस नए प्रस्तावित शुल्क से बाहर रखा गया है।
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कपड़ा एवं परिधान (Textiles & Apparel): इस क्षेत्र के लिए एक विशेष कोटा या रियायती प्रणाली प्रस्तावित है। इसके तहत चयनित देशों से एक निश्चित मात्रा में परिधान उत्पादों को कम शुल्क दरों पर अमेरिका में प्रवेश की अनुमति मिल सकती है, जिससे भारत के श्रम-प्रधान कपड़ा उद्योग को बड़ी राहत मिल सकती है।
महत्वपूर्ण टाइमलाइन और आगामी प्रक्रिया
अमेरिकी कानून के मुताबिक, कोई भी अंतिम फैसला लेने से पहले जनता और सभी हितधारकों (Stakeholders) से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की जाती हैं। इसकी समयसीमा इस प्रकार है:
| चरण / प्रक्रिया | अंतिम तिथि (वर्ष 2026) |
| सार्वजनिक सुनवाई में भाग लेने के लिए आवेदन | 22 जून |
| लिखित टिप्पणियां (Written Comments) जमा करने की अंतिम तिथि | 06 जुलाई |
| USTR द्वारा सार्वजनिक सुनवाई (Public Hearing) | 07 जुलाई |
माना जा रहा है कि USTR प्राप्त टिप्पणियों और दलीलों पर विचार करने के बाद 24 जुलाई 2026 (जब वर्तमान धारा-122 के तहत लागू 10% आपातकालीन शुल्क समाप्त हो रहे हैं) से पहले इस पर अंतिम निर्णय ले सकता है।
क्या है अमेरिकी व्यापार अधिनियम की धारा 301?
यह अमेरिका के ‘ट्रेड एक्ट ऑफ 1974’ का एक हिस्सा है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति और USTR को विदेशी सरकारों की उन नीतियों, कानूनों या तौर-तरीकों की जांच करने और उनके खिलाफ दंडात्मक टैरिफ लगाने का व्यापक अधिकार देता है, जिन्हें अमेरिका ‘अनुचित, अनुचित रूप से बोझिल या भेदभावपूर्ण’ मानता है। हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने IEEPA टैरिफ को अमान्य करने के बाद, अमेरिकी प्रशासन अब टैरिफ बनाए रखने के लिए धारा-301 को एक मजबूत कानूनी आधार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
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