शनिवार, जून 20 2026 | 12:00:33 AM
Breaking News
Home / राष्ट्रीय / भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम: 100 GW का महा-लक्ष्य और IAEA से मिली ‘क्लीन चिट’

भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम: 100 GW का महा-लक्ष्य और IAEA से मिली ‘क्लीन चिट’

Follow us on:

नई दिल्ली । शुक्रवार, 19 जून 2026

भारत दुनिया के नक्शे पर एक नई ऊर्जा महाशक्ति बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। देश ने अगले 21 वर्षों में अपनी कुल परमाणु ऊर्जा (Nuclear Power) क्षमता को मौजूदा 8 गीगावाट (GW) से बढ़ाकर 100 गीगावाट करने का एक बेहद महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। भारत की इस महा-महत्वाकांक्षा के बीच ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना से एक बेहद राहत देने वाली और देश का गौरव बढ़ाने वाली वैश्विक खबर आई है।

वैश्विक परमाणु निगरानी संस्था, ‘अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी’ (IAEA) ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि भारत का परमाणु सुरक्षा रिकॉर्ड (Nuclear Safety Record) वैश्विक स्तर पर पूरी तरह बेदाग रहा है। देश के लगभग दो दर्जन वाणिज्यिक परमाणु रिएक्टरों में आज तक एक भी बड़ी परमाणु या विकिरण से जुड़ी दुर्घटना नहीं हुई है।

‘इंसिडेंट एंड इमरजेंसी सेंटर’ के डायरेक्टर ने की रिकॉर्ड की पुष्टि

वियना में इस मामले पर विशेष जानकारी देते हुए IAEA के ‘इंसिडेंट एंड इमरजेंसी सेंटर’ (IEC) के डायरेक्टर अमजद शोक्र ने कहा कि भारत ने अपने परमाणु सफर में सुरक्षा को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उनके अनुसार, भारत की तरफ से वैश्विक स्तर पर आज तक किसी भी गंभीर परमाणु या रेडियोधर्मी विकिरण (Radiation) से जुड़ी आपातकालीन घटना की कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई है। यह दुनिया के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों में से एक के लिए एक अभूतपूर्व उपलब्धि है।

वियना का ‘साइलेंट वॉचटावर’: जानें कैसे काम करती है सुरक्षा टीम?

ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में स्थित IAEA का यह इंसिडेंट एंड इमरजेंसी सेंटर बिना किसी तामझाम और शोर-शराबे के पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए चौबीसों घंटे काम करता है। इसे वैश्विक परमाणु सुरक्षा का ‘साइलेंट वॉचटावर’ भी कहा जाता है।

इस केंद्र की कार्यप्रणाली को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  • छोटा स्टाफ, विशाल वैश्विक नेटवर्क: इस कोर कंट्रोल रूम में नियमित रूप से केवल 35 स्थायी कर्मचारी तैनात रहते हैं। लेकिन इन्हें दुनिया भर के 170 से अधिक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों, परमाणु इंजीनियरों और विषय विशेषज्ञों के एक बहुत बड़े नेटवर्क का सीधा समर्थन हासिल है।

  • 24/7 रियल-टाइम कनेक्टिविटी: यह वैश्विक केंद्र भारत सहित दुनिया के 130 से अधिक देशों के आधिकारिक संपर्क केंद्रों (Contact Points) से साल के 365 दिन और चौबीसों घंटे लाइव जुड़ा रहता है। कोई भी असामान्य घटना होने पर रियल-टाइम डेटा इस सिस्टम को तुरंत मिल जाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य: परमाणु सुरक्षा (Nuclear Safety) की अंतिम और वैधानिक जिम्मेदारी हमेशा खुद उस देश की संप्रभु सरकार की होती है। IAEA एक मार्गदर्शक, मॉनिटर और संकट के समय मददगार की भूमिका निभाता है।

संकट से पहले की तैयारी और त्वरित एक्शन

डायरेक्टर अमजद शोक्र के मुताबिक, उनका काम सिर्फ किसी परमाणु हादसे के बाद राहत कार्य शुरू करना नहीं है। उनका प्राथमिक उद्देश्य दुनिया के देशों को किसी भी संभावित आपातकाल (Emergency Preparedness) के लिए पहले से तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है। यह केंद्र सदस्य देशों की क्षमताओं को इस तरह मजबूत करता है ताकि किसी भी विपरीत परिस्थिति में आम जनता और पर्यावरण को रेडिएशन के खतरों से पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके।

जब दुनिया में कहीं कोई परमाणु घटना होती है, तब क्या होता है?

  1. त्वरित सूचना और जांच: दुनिया में कहीं भी परमाणु प्रतिष्ठान में कोई घटना होने पर यह केंद्र तुरंत एक्शन मोड में आ जाता है और संबंधित देश के 24-घंटे एक्टिव रहने वाले नोडल केंद्र से सीधी जानकारी जुटाता है।

  2. रेडिएशन मैपिंग (Radiation Mapping): केंद्र की विशेष टेक्निकल टीम उन्नत सॉफ्टवेयर के जरिए यह देखती है कि अगर रेडिएशन लीक हुआ है, तो हवा की गति और मौसम के हिसाब से उसका असर कहाँ तक और किस दिशा में फैलेगा।

  3. अंतरराष्ट्रीय मदद: अगर कोई प्रभावित देश मदद की मांग करता है, तो यह केंद्र तुरंत रेडिएशन से बचाव और न्यूक्लियर डैमेज कंट्रोल के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की ‘रैपिड रिपॉन्स टीम’ को मौके पर रवाना करता है।

  4. ऐतिहासिक संदर्भ: साल 2011 में जब जापान में भयंकर सुनामी के बाद फुकुशिमा दाइची आपदा हुई थी, तब वियना का यह कंट्रोल रूम बिना रुके लगातार 54 दिनों तक पूरी तरह एक्टिव मोड में रहा था।

भारत के उज्ज्वल परमाणु भविष्य के लिए वियना से बड़ा संदेश

भारत जिस तेजी से अपनी क्लीन एनर्जी (Clean Energy) प्राथमिकताओं के तहत परमाणु क्षमता को बढ़ा रहा है, उसे लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की साख मजबूत हुई है। IAEA ने भारत के न्यूक्लियर रेगुलेटरी सिस्टम पर पूरा भरोसा जताया है। डायरेक्टर शोक्र ने स्पष्ट किया कि भारत के पास परमाणु प्रतिष्ठानों को बेहद सुरक्षित तरीके से चलाने का एक लंबा और शानदार इतिहास है।

भारत की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे मुख्य रूप से तीन स्तंभ हैं:

  • मजबूत कानूनी ढांचा: भारत का परमाणु ऊर्जा अधिनियम और सुरक्षा नियम बेहद कड़े हैं।

  • सक्षम रेगुलेटर और ऑपरेटर्स: भारत का परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) और न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) जैसी संस्थाएं वैश्विक मानकों पर काम करती हैं।

  • IAEA के साथ निरंतर समन्वय: भारतीय वैज्ञानिक और ऑपरेटर लगातार अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पैमानों को अपडेट करने के लिए IAEA के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

यह रिपोर्ट साफ करती है कि भारत का 100 GW परमाणु ऊर्जा का आगामी सफर न केवल देश को बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि सुरक्षा के मामले में भी भारत दुनिया के सामने एक मिसाल बना रहेगा।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

नीट-यूजी री-टेस्ट से पहले टेलीग्राम बैन विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब; गुरुवार को होगी अगली सुनवाई

नई दिल्ली । बुधवार, 17 जून 2026 देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी (NEET-UG …