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रांची RSS दफ्तर हमला: मात्र 10,000 रुपये में ISI और दुबई हैंडलर्स ने रची थी बड़ी साजिश, अब ATS संभालेगी जांच

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रांची । शुक्रवार, 19 जून 2026

झारखंड की राजधानी रांची के निवारणपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रांतीय कार्यालय पर हुए पेट्रोल बम हमले के मामले में पुलिस की तत्परता और तकनीकी जांच के बाद बेहद सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची पुलिस ने अब इसकी जांच एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) को सौंपने की सिफारिश की है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय आतंकी मॉड्यूल और पाकिस्तानी कनेक्शन सामने आया है।

मामले में पुलिस की गठित SIT (विशेष जांच दल) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार युवकों की पहचान सैफ अंसारी, अमन अंसारी उर्फ गोलू, और सायम सुजान (21 वर्ष) के रूप में की गई है। इनमें से सैफ और अमन मूल रूप से झारखंड के लोहरदगा जिले के रहने वाले हैं, जबकि सायम सुजान रांची का निवासी है।

दुबई कनेक्शन और टीटीएच (TTH) का आतंकी जाल

पुलिस पूछताछ और तकनीकी अनुसंधान में जो तथ्य सामने आए हैं, वे सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ाने वाले हैं। जांच के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी इंटरनेट के जरिए दुबई में बैठे पाकिस्तानी मूल के हैंडलर्स के संपर्क में थे।

सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, आरोपी सैफ अंसारी और अमन अंसारी पूर्व में दुबई गए थे। वहां वे शाहबाज राणा उर्फ भट्टी और राणा हुसैन उर्फ राणा जी नामक पाकिस्तानी नागरिकों के संपर्क में आए। ये हैंडलर्स पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI समर्थित ‘तेहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान’ (TTH) नामक मॉड्यूल से जुड़े हैं। दुबई में ही इन झारखंडी युवकों का ब्रेनवॉश (Radicalise) किया गया और भारत वापस भेजकर रांची में दहशत फैलाने के उद्देश्य से आरएसएस दफ्तर को निशाना बनाने का जिम्मा सौंपा गया।

ये आरोपी लगातार ‘बोटिम ऐप’ (Botim App) (जो दुबई में कॉलिंग के लिए अत्यधिक उपयोग होता है) और व्हाट्सएप के जरिए अपने आकाओं से जुड़े हुए थे। हमले के तुरंत बाद आरोपियों ने अपने मोबाइल से घटना का वीडियो भी बनाया और इसे दुबई में बैठे अपने हैंडलर को भेजा था।

मात्र 10,000 रुपये की सुपारी और धोखा

इस पूरी अंतरराष्ट्रीय साजिश का सबसे हैरान करने वाला पहलू इसकी ‘फंडिंग’ का है। इतनी बड़ी आतंकी जैसी वारदात और देश के सबसे बड़े संगठन के कार्यालय को उड़ाने की प्लानिंग के लिए इन लड़कों को महज 10,000 रुपये की एडवांस रकम दी गई थी। यह राशि भी दुबई से एक अन्य सहयोगी के डिजिटल स्कैनर के माध्यम से बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी।

दुबई के हैंडलर ने इन युवकों से वादा किया था कि पेट्रोल बम फेंकने की घटना को सफलतापूर्वक अंजाम देने के बाद उन्हें मोटी रकम (लाखों रुपये) दी जाएगी। पैसों के लालच में आकर लड़कों ने 16-17 जून की मध्यरात्रि (लगभग 12:30 बजे) हमला तो कर दिया, लेकिन वारदात के बाद हैंडलर ने अपने पैर पीछे खींच लिए और उन्हें आगे एक फूटी कौड़ी भी नहीं मिली।

कैसे पकड़े गए आरोपी?

प्रारंभिक सूचनाओं के विपरीत, पुलिस ने इन आरोपियों को केवल तकनीकी सर्विलांस और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दबोचा। वारदात को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने एक रैपिडो कैब (Rapido Cab) और किराए की कार का इस्तेमाल किया था।

हमले के बाद जब आरोपी राज्य से भागने की फिराक में थे, तब रांची पुलिस ने बोकारो और कोडरमा पुलिस के सहयोग से दो आरोपियों (सैफ और अमन) को कोडरमा के गुझंडी रेलवे स्टेशन के पास चलती ट्रेन से धर दबोचा। इसके बाद उनकी निशानदेही पर तीसरे आरोपी सायम सुजान को रांची से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इनके पास से घटना में प्रयुक्त कार, 4 मोबाइल फोन और लोअर बाजार इलाके के एक नाले से हमले के वक्त पहने गए कपड़े भी बरामद कर लिए हैं।

आरोपी सैफ अंसारी का भागने का प्रयास और पुलिस एनकाउंटर

गिरफ्तारी के बाद गुरुवार (18 जून) को रांची के कोतवाली थाने में पूछताछ के दौरान आरोपी सैफ अंसारी ने पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश की। उसने टॉयलेट की वेंटिलेशन ग्रिल और कांच का पैनल तोड़कर छलांग लगा दी।

इसके बाद जब पुलिस की टीम ने मांडर इलाके में उसे घेरा, तो उसने पुलिसकर्मी से हथियार छीनकर उन पर दो से तीन राउंड फायरिंग कर दी। पुलिस ने आत्मरक्षार्थ और सीमित प्रतिक्रिया में जवाबी गोलीबारी की, जिससे सैफ अंसारी के पैर में गोली लगी। वर्तमान में उसे रांची के रिम्स (RIMS) अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका कड़ा पहरा है।

कड़ी कानूनी धाराएं और एनआईए (NIA) की दस्तक

इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए रांची के चुटिया थाने में आरएसएस प्रांत कार्यालय प्रमुख नरसिंह कुमार की शिकायत पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के साथ-साथ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 और बेहद कड़े अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट (UAPA), 1967 के तहत मामला दर्ज किया है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की तीन सदस्यीय टीम ने भी रांची स्थित घटनास्थल का दौरा किया है। एनआईए के अधिकारियों ने प्रांतीय प्रचारकों के साथ बंद कमरे में बैठक की और छत से टूटी बोतलों के अवशेष व अन्य फोरेंसिक साक्ष्य एकत्र किए हैं।

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