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महानदी जल विवाद: ओडिशा और छत्तीसगढ़ में बनी आपसी सहमति, बातचीत से निकलेगा स्थायी समाधान!

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रायपुर । शनिवार, 11 जुलाई 2026

लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद (Mahanadi Water Dispute) के मोर्चे पर एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। सालों से अदालत और ट्रिब्यूनल के चक्कर काट रहे इस मामले में अब दोनों राज्यों—ओडिशा और छत्तीसगढ़—के रुख में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। शनिवार को हुई महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल की सुनवाई के दौरान दोनों ही राज्यों ने साफ कर दिया है कि वे इस विवाद का समाधान आपसी सहमति और टेबल टॉक (बातचीत) के जरिए करना चाहते हैं।

ओडिशा सरकार द्वारा रखे गए इस सकारात्मक प्रस्ताव पर छत्तीसगढ़ सरकार ने भी अपनी मुहर लगा दी है। इस फैसले के बाद यह उम्मीद जगी है कि महानदी के पानी को लेकर दोनों राज्यों के किसानों और आम जनता के बीच जारी तनाव अब हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।

ट्रिब्यूनल में क्या हुआ? (ताजा अपडेट)

शनिवार को महानदी जल विवाद मामले की अहम सुनवाई ट्रिब्यूनल की अध्यक्ष न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी की अध्यक्षता में हुई। इस दौरान दोनों राज्यों के कानूनी और प्रशासनिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

सुनवाई के बाद ओडिशा के एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य ने मीडिया को जानकारी दी कि दोनों राज्यों के बीच बातचीत का माहौल बेहद सकारात्मक रहा। छत्तीसगढ़ सरकार ने ट्रिब्यूनल के समक्ष यह स्पष्ट कर दिया है कि वह ओडिशा के साथ किसी भी टकराव के बजाय संवाद और आपसी चर्चा के जरिए एक परमानेंट और व्यावहारिक समाधान चाहती है।

छत्तीसगढ़ सरकार से मांगा गया लिखित आश्वासन

दोनों राज्यों के बीच बनी इस आपसी सहमति और पॉजिटिव अप्रोच को देखते हुए ट्रिब्यूनल ने भी इसका स्वागत किया है। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए ट्रिब्यूनल ने छत्तीसगढ़ सरकार को एक निर्देश जारी किया है।

  • लिखित प्रतिबद्धता: ट्रिब्यूनल ने छत्तीसगढ़ सरकार से कहा है कि वे आपसी बातचीत से समाधान निकालने की इस बात को एक लिखित आश्वासन (Written Commitment) के तौर पर अदालत में पेश करें।

  • अगली सुनवाई की तारीख: छत्तीसगढ़ सरकार को यह लिखित प्रतिबद्धता अगली सुनवाई से पहले दाखिल करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को तय की गई है।

क्या था महानदी जल विवाद? (संक्षिप्त पृष्ठभूमि)

जो लोग इस विवाद से पूरी तरह वाकिफ नहीं हैं, उन्हें बता दें कि महानदी छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले (सिहावा पहाड़ियों) से निकलती है और ओडिशा से होते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती है।

  • ओडिशा की चिंता: ओडिशा का आरोप रहा है कि छत्तीसगढ़ (जो कि ऊपरी राज्य या Upper Riparian State है) ने महानदी के ऊपरी हिस्सों में कई सारे बैराज और एनिकट बना लिए हैं। इसके कारण गैर-मानसून सीजन (Lean Period) में ओडिशा की तरफ आने वाले पानी का फ्लो काफी कम हो जाता है, जिससे उनके राज्य में खेती, बिजली उत्पादन और पीने के पानी का संकट खड़ा होता है।

  • छत्तीसगढ़ का पक्ष: छत्तीसगढ़ का तर्क रहा है कि महानदी के कुल जलग्रहण क्षेत्र (Catchment Area) का लगभग 53.9% हिस्सा छत्तीसगढ़ में आता है, इसलिए अपने क्षेत्र के विकास और किसानों के लिए पानी का उपयोग करना उनका वैध अधिकार है।

इस खींचतान के बाद साल 2018 में महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल (MWDT) का गठन किया गया था। तब से इस मामले में लगातार तारीखें बढ़ रही थीं, लेकिन हाल ही में दोनों राज्यों में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बातचीत तेज हुई है, जिसके कारण अब यह ऐतिहासिक सहमति बन पाई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. महानदी जल विवाद मुख्य रूप से किन दो राज्यों के बीच है?

Ans: यह विवाद मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ (उद्गम राज्य) और ओडिशा (निचला राज्य) के बीच महानदी के पानी के बंटवारे को लेकर है।

Q2. महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल की वर्तमान अध्यक्ष कौन हैं?

Ans: इस ट्रिब्यूनल की सुनवाई न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी की अध्यक्षता में की जा रही है।

Q3. ट्रिब्यूनल ने छत्तीसगढ़ सरकार को क्या निर्देश दिया है?

Ans: ट्रिब्यूनल ने छत्तीसगढ़ सरकार को निर्देश दिया है कि वह ओडिशा के प्रस्ताव पर अपनी सहमति और आपसी बातचीत से विवाद सुलझाने की प्रतिबद्धता का एक लिखित आश्वासन 23 जुलाई की अगली सुनवाई से पहले कोर्ट में दाखिल करे।

Q4. महानदी का उद्गम स्थल कहाँ है?

Ans: महानदी छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित सिहावा की पहाड़ियों से निकलती है और ओडिशा में हीराकुंड बांध से होते हुए बंगाल की खाड़ी में विलीन होती है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

इस लेख में दी गई जानकारी हालिया समाचारों और ट्रिब्यूनल की कार्यवाही के दौरान सामने आए तथ्यों पर आधारित है। कानूनी प्रक्रियाओं या आधिकारिक फैसलों में बदलाव संभव हैं। नवीनतम और सटीक आधिकारिक अपडेट के लिए संबंधित राज्य सरकारों या ट्रिब्यूनल द्वारा जारी सूचनाओं को ही अंतिम मानें।

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