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केरल का ‘एलोहिम ग्लोबल वर्शिप सेंटर’ सील; पढ़ाई के बहाने बच्चों को बंधक बनाकर बेरहमी से पीटने का आरोप

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पथानामथिट्टा । शनिवार, 20 जून 2026

ईश्वर की आराधना और प्रार्थना के नाम पर मानवता को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला केरल के पथानामथिट्टा (Pathanamthitta) जिले से सामने आया है। यहाँ के ‘एलोहिम ग्लोबल वर्शिप सेंटर’ (Elohim Global Worship Center) में रहने वाले बच्चों के साथ बेरहमी से मारपीट, मानसिक उत्पीड़न और अवैध रूप से बंधक बनाकर बंधुआ मजदूरी कराने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है।

बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee – CWC) और स्थानीय पुलिस की शुरुआती जांच में इस बात के पुख्ता संकेत मिले हैं कि संस्थान के भीतर न सिर्फ एक, बल्कि कई मासूम बच्चों को कथित तौर पर भयानक शोषण और दुर्व्यवहार का शिकार बनाया जा रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल इस प्रार्थना केंद्र को पूरी तरह से सील (बंद) कर दिया है।

कैसे हुआ इस भयानक मामले का भंडाफोड़?

यह पूरा मामला तब खुलकर सामने आया जब इस केंद्र में रह रहे इडुक्की जिले के अनाक्कारा निवासी एक 17 वर्षीय लड़के ने कर्मचारियों के खिलाफ हिंसक व्यवहार और प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई।

धोखे और लालच का जाल:

पीड़ित लड़का बेहद गरीब पृष्ठभूमि से आता है। केंद्र के संचालकों ने उसके परिवार की आर्थिक तंगी का फायदा उठाया। उन्होंने परिवार से वादा किया था कि वे लड़के की शिक्षा का पूरा खर्च उठाएंगे, उसे रहने की जगह देंगे और आगे चलकर एक अच्छा रोजगार (Job placement) दिलाने में मदद करेंगे। लेकिन केंद्र के भीतर कदम रखते ही सच्चाई इसके बिल्कुल उलट निकली।

नवीनतम अपडेट: पुलिस और CWC के बयानों के अनुसार, लड़के को पढ़ाई के लिए कोई सहायता नहीं दी गई। इसके बजाय, उस पर चोरी का झूठा आरोप लगाया गया, उसके मुंह में कपड़ा ठूंसा गया, उसे रस्सियों से बांधा गया और बड़ी लाठियों से बेरहमी से पीटा गया। जब उसने इस प्रताड़ना का विरोध किया और घर पर जानकारी देने की कोशिश की, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी गईं।

बाल कल्याण समिति (CWC) की छापेमारी और चौंकाने वाले खुलासे

17 जून को इडुक्की जिले के कट्टप्पना पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज होने के बाद, घटना की गंभीरता को देखते हुए इसे पथानामथिट्टा के एलावुमथिट्टा पुलिस स्टेशन में स्थानांतरित कर दिया गया। इसके तुरंत बाद पथानामथिट्टा CWC की अध्यक्ष लीना के. सुभाष (Leena K. Subhash) के नेतृत्व में एक टीम ने केंद्र पर धावा बोला।

CWC की अध्यक्ष ने मीडिया से बातचीत में जो खुलासे किए, वे दहला देने वाले हैं:

  • बिना अनुमति के अवैध संचालन: इस केंद्र में कई बुजुर्ग और बच्चे बिना किसी वैध सरकारी अनुमति या पंजीकरण के रह रहे थे।

  • एक और पीड़ित बच्चा रेस्क्यू: जांच टीम ने वहाँ से एक और 17 वर्षीय किशोर (जो कोट्टायम का रहने वाला है) को रेस्क्यू किया है। उसकी मेडिकल जांच में शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए हैं। उसे तत्काल सरकारी शेल्टर होम में शिफ्ट कर दिया गया है।

  • बिना वेतन के बंधुआ मजदूरी: बच्चों ने अपने बयान में बताया कि उन्हें वहां “जेल जैसे माहौल” में रखा गया था। सुबह से रात तक उनसे बिना किसी वेतन (Unpaid Labor) के जबरन काम कराया जाता था और मना करने पर हिंसक तरीके से पीटा जाता था।

  • लापता मां और बच्चा: जांच में यह भी सामने आया है कि वहां कुछ समय पहले तक एक मां और उसका बच्चा भी रह रहे थे, जो अब वहां से गायब हैं। पुलिस और बाल अधिकार एजेंसियां उनकी तलाश में जुटी हैं।

प्रशासन की सख्त कार्रवाई: कानून के शिकंजे में आरोपी

इस मामले में केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि केरल सरकार के मंत्रियों ने भी हस्तक्षेप किया है, जिसके बाद पुलिस ने पीड़ितों के घर जाकर उनके बयान दर्ज किए हैं।

पुलिस ने मुख्य आरोपियों—जिसमें वर्शिप सेंटर का मैनेजर और संचालक (रेजी, बेन्नी और सीजो) शामिल हैं—के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोपियों पर निम्नलिखित कानूनों के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं:

  1. किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act): बच्चों की देखभाल और संरक्षण में लापरवाही और प्रताड़ना के लिए।

  2. भारतीय न्याय संहिता (BNS): अवैध रूप से बंधक बनाने, गंभीर चोट पहुँचाने और डराने-धमकाने की धाराओं के तहत।

यह मामला एक बार फिर देश में धार्मिक या निजी प्रार्थना केंद्रों और शेल्टर होम्स के औचक निरीक्षण और उनके पंजीकरण की अनिवार्यता पर बड़े सवाल खड़े करता है। CWC ने साफ किया है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, केंद्र बंद रहेगा और दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जाएगी।

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