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ओडिशा क्रॉस वोटिंग विवाद: सोफिया फिरदौस समेत 11 विधायकों की बची सदस्यता, स्पीकर सुरमा पाढ़ी ने खारिज की अयोग्यता याचिकाएं

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ओडिशा की पहली मुस्लिम महिला विधायक सोफिया फिरदौस भुवनेश्वर में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान।

भुवनेश्वर । मंगलवार, 23 जून 2026

ओडिशा की राजनीति में मार्च 2026 में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान मचा ‘क्रॉस-वोटिंग’ का सियासी तूफान आखिरकार शांत हो गया है। विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) सुरमा पाढ़ी ने सोमवार (22 जून) को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कांग्रेस और बीजू जनता दल (BJD) के उन 11 विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं (Disqualification Petitions) को पूरी तरह से खारिज कर दिया, जिन पर अपनी ही पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर वोट करने का आरोप लगा था।

इस फैसले से सबसे बड़ी राहत ओडिशा विधानसभा की पहली ओडिया मुस्लिम महिला विधायक सोफिया फिरदौस (Sofia Firdous) को मिली है, जिनकी सदस्यता पर खतरा मंडरा रहा था। स्पीकर के इस कदम के बाद सभी 11 विधायकों की विधानसभा सदस्यता पूरी तरह सुरक्षित है और वे सदन में बने रहेंगे।

तकनीकी खामियों के चलते खारिज हुईं याचिकाएं

ओडिशा विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, बीजेडी और कांग्रेस की तरफ से विधायकों की सदस्यता रद्द करने के लिए जो आवेदन दिए गए थे, वे कानूनी मानकों पर खरे नहीं उतरे।

स्पीकर सुरमा पाढ़ी ने प्रत्येक विधायक के मामले में अलग-अलग आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि राजनीतिक दलों द्वारा दायर की गईं ये याचिकाएं अस्पष्ट, अधूरी और बुनियादी कानूनी आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती थीं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इन याचिकाओं में सही तरीके से वेरिफिकेशन (सत्यापन) नहीं किया गया था और दावों के समर्थन में आवश्यक पुख्ता सबूतों की भारी कमी थी। संविधान की 10वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत अयोग्यता साबित करने के लिए जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन न होने के कारण इन याचिकाओं को खारिज कर दिया गया।

क्या था पूरा राज्यसभा क्रॉस-वोटिंग विवाद?

यह पूरा विवाद 16 मार्च 2026 को ओडिशा की चार राज्यसभा सीटों के लिए हुए मतदान के दौरान शुरू हुआ था। इस चुनाव में कांग्रेस, बीजेडी और वामपंथी दलों ने मिलकर दत्तेश्वर राय होता को अपना संयुक्त उम्मीदवार बनाया था। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने होटल कारोबारी और निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय का समर्थन किया था।

वोटिंग के दिन कांग्रेस और बीजेडी के कुल 11 विधायकों ने अपनी पार्टियों द्वारा जारी किए गए व्हिप का उल्लंघन किया और बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग कर दी, जिससे वह चुनाव जीत गए। इसे राजनीतिक हलकों में एक बड़ा दलबदल और ‘गद्दारी’ माना गया। मतदान के तुरंत बाद, दोनों ही पार्टियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपने-अपने बागी विधायकों को पार्टी से निलंबित कर दिया था और विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता की अर्जी दी थी।

राहत पाने वाले 11 विधायकों की सूची

विधानसभा अध्यक्ष के इस फैसले से राहत पाने वाले विधायकों में कांग्रेस के 3 और बीजू जनता दल (BJD) के 8 विधायक शामिल हैं:

कांग्रेस के विधायक:

  1. सोफिया फिरदौस (बाराबती-कटक)

  2. रमेश चंद्र जेना (सनाखेमुंडी)

  3. दशरथी गमांगो (मोहना)

बीजू जनता दल (BJD) के विधायक:

  1. चक्रमणि कन्हार (बालीगुडा)

  2. नबा किशोर मल्लिक (जयदेव)

  3. सौविक बिस्वाल (चौद्वार-कटक)

  4. सुबासिनी जेना (बास्ता)

  5. रमाकांत भोई (तिरतोल)

  6. देवी रंजन त्रिपाठी (बांकी)

  7. अरविंद महापात्रा (पाटकुरा) – पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण पहले से निलंबित

  8. सनातन महाकुड (चंपुआ) – पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण पहले से निलंबित

सुर्खियों में क्यों रहीं सोफिया फिरदौस?

11 विधायकों में कटक की बाराबती विधानसभा सीट से विधायक सोफिया फिरदौस की चर्चा सबसे ज्यादा रही। सोफिया ने वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर इतिहास रचा था; वह ओडिशा विधानसभा के इतिहास में चुनी जाने वाली ओडिया मुस्लिम समुदाय की पहली महिला विधायक बनीं।

राज्यसभा चुनाव के वक्त सोफिया ने पार्टी नेतृत्व द्वारा बीजेडी के साथ गठबंधन कर संयुक्त उम्मीदवार उतारने के फैसले पर असंतोष जताया था। उनका तर्क था कि इस प्रक्रिया में स्थानीय विधायकों की राय को नजरअंदाज किया गया। इसके बाद उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया, जिसके कारण उन्हें तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा और कांग्रेस से निष्कासित/निलंबित कर दिया गया था।

पढ़ी-लिखी और सफल बिजनेसवुमन हैं सोफिया:

सोफिया फिरदौस कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक मोहम्मद मुकीम की बेटी हैं। उन्होंने कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (KIIT) से सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक किया है और साल 2022 में देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईएम बैंगलोर (IIMB) से एग्जीक्यूटिव जनरल मैनेजमेंट प्रोग्राम पूरा किया है। राजनीति में कदम रखने से पहले वह रियल एस्टेट क्षेत्र की संस्था क्रेडाई (CREDAI) के भुवनेश्वर चैप्टर की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।

इस फैसले के बाद अब सोफिया और अन्य विधायकों को कानूनी रूप से बड़ी राहत मिल गई है, जिससे राज्य की क्षेत्रीय राजनीति में एक नया समीकरण देखने को मिल सकता है।

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