नई दिल्ली। शुक्रवार, 3 जुलाई 2026
भारत और पाकिस्तान के बीच पानी की कूटनीति अब बेहद आक्रामक और निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच से पाकिस्तान को उसकी ‘गीदड़भभकी’ पर कड़ा संदेश दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट शब्दों में दोहराया है कि पाकिस्तान द्वारा सीमा-पार आतंकवाद को लगातार दिए जा रहे समर्थन के कारण सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty – IWT) पर भारत का रुख फिलहाल पूरी तरह अपरिवर्तित और कड़ा बना हुआ है।
साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान के साथ-साथ बांग्लादेश से जुड़ी तीस्ता नदी परियोजना पर भी देश का रुख साफ किया।
आतंकवाद पर कार्रवाई के बिना कोई बातचीत नहीं: विदेश मंत्रालय
साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत की ‘आतंकवाद विरोधी’ नीति को बेहद पुरजोर तरीके से सामने रखा। उन्होंने कहा:
“सिंधु जल संधि पर भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट और एक जैसा है। पाकिस्तान द्वारा सीमा-पार आतंकवाद को लगातार बढ़ावा देने के जवाब में Indus Waters Treaty पर हमारी तरफ से प्रक्रिया फिलहाल रुकी हुई है। पाकिस्तान को सीमा-पार आतंकवाद के लिए अपना समर्थन बेहद भरोसेमंद और पक्के तौर पर छोड़ना होगा।”
गौर करने वाली बात यह है कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए इस 65 साल पुरानी संधि को स्थगित करने का ऐतिहासिक फैसला लिया था। भारत के इस सख्त कूटनीतिक प्रहार के बाद से ही पाकिस्तानी हुक्मरान पूरी तरह बौखलाए हुए हैं।
बिलावल भुट्टो की बयानबाजी पर भारत का पलटवार
हाल ही में पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो-जरदारी ने भारत पर पानी का इस्तेमाल “रणनीतिक हथियार” के तौर पर करने का आरोप लगाया था। बिलावल ने कहा था कि सिंधु नदी पाकिस्तान की ‘जीवन रेखा’ है और इसे ‘गले का फंदा’ बनाने की किसी भी कोशिश को देश के अस्तित्व के लिए खतरा माना जाएगा।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस प्रकार के बयानों को सीधे तौर पर खारिज कर दिया है। भारत का हमेशा से एक ही नीतिगत स्टैंड रहा है—“Terror and Talks cannot go together” (आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते)।
पाकिस्तान पर पड़ रहा है सीधा असर
भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने और डेटा साझा न करने के फैसले के बाद से पाकिस्तान के बांधों (मंगला और तरबेला) में पानी का स्तर लगातार गिर रहा है। भारत के इस सख्त रवैये के कारण पाकिस्तान को अपनी कई सिंचाई परियोजनाओं को भी ठप करना पड़ा है।
तीस्ता नदी परियोजना पर भारत और बांग्लादेश का समीकरण
मीडिया ब्रीफिंग के दौरान रणधीर जायसवाल ने तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और बहाली प्रोजेक्ट (Teesta River Management Project) पर पूछे गए सवालों का भी बेबाकी से जवाब दिया। हाल ही में बांग्लादेश और चीन के बीच सीमा-पार नदियों के प्रबंधन पर सहयोग बढ़ाने को लेकर बनी सहमति के बाद भारत का यह बयान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रवक्ता ने कहा, “बांग्लादेश में विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए भारत की वित्तीय और तकनीकी सहायता हमेशा आपसी सहमति वाले रोडमैप पर आधारित होती है, जिसकी हम नियमित रूप से समीक्षा करते हैं। तीस्ता नदी प्रोजेक्ट पर भारत की जो राय और चिंताएं हैं, वे बांग्लादेशी पक्ष को पहले ही साझा की जा चुकी हैं। हम तीस्ता मुद्दे पर अपने समग्र दृष्टिकोण में क्षेत्रीय और भू-राजनीतिक स्तर पर होने वाले सभी घटनाक्रमों को ध्यान में रखेंगे।”
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