रायपुर | गुरुवार, 13 अगस्त, 2026
छत्तीसगढ़ में पुलिस कस्टडी के दौरान हुई 34 वर्षीय व्यक्ति की संदिग्ध मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली और FIR दर्ज करने में हुई अढ़ाई साल की भारी देरी पर गहरी नाराजगी जताते हुए पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह माना कि यह केवल हिरासत में मौत का मामला नहीं है, बल्कि प्रशासनिक ढिलाई और मामले को दबाने की कोशिश का एक गंभीर उदाहरण है। कोर्ट ने पीड़ित परिवार के लिए 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा भी तय किया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला बिलासपुर जिले के सीपत थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
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हिरासत और मौत: 18 जनवरी 2024 को पुलिस ने 34 वर्षीय श्रवण सूर्यवंशी को अपनी किराना दुकान के बाहर लगभग ₹1,200 मूल्य की कच्ची महुआ शराब बेचने के आरोप में हिरासत में लिया था।
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स्वास्थ्य बिगड़ा: हिरासत में लिए जाने के तीन दिन बाद, 21 जनवरी 2024 को उसे गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसकी मौत हो गई।
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न्यायिक जांच में खुलासा: सत्र न्यायाधीश के आदेश पर हुई न्यायिक जांच की मजिस्ट्रेट रिपोर्ट (जुलाई 2024) में यह स्पष्ट हुआ कि मृतक के सिर पर किसी भोथरे हथियार (Blunt Weapon) से वार किया गया था, जिससे उत्पन्न जटिलताओं के कारण उसकी मृत्यु हुई।
FIR में ढाई साल की देरी पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
श्रवण की मौत जनवरी 2024 में हुई थी, जबकि राज्य पुलिस ने एफआईआर 30 जुलाई 2026 को दर्ज की। सुप्रीम कोर्ट ने ढाई साल बाद दर्ज हुई इस FIR पर कड़ी आपत्ति जताई।
सुनवाई के दौरान राज्य के शीर्ष अधिकारियों (गृह सचिव, डीजीपी और डीजी जेल) की दलीलों को अदालत ने खारिज कर दिया। पीठ ने टिप्पणी की कि अधिकारियों का यह रवैया “सच्चाई पर पर्दा डालने और कोर्ट की आंखों में धूल झोंकने” जैसा प्रतीत होता है।
सुप्रीम कोर्ट के 4 मुख्य निर्देश
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CBI को तत्काल जांच: CBI को नियमित आपराधिक मामला (Regular Criminal Case) दर्ज कर किसी वरिष्ठ अधिकारी के नेतृत्व में निष्पक्ष और त्वरित जांच के आदेश दिए गए हैं।
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अधिकारियों की भूमिका की जांच: केवल मौत की परिस्थितियों की ही नहीं, बल्कि उन पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के आचरण की भी जांच होगी जिन्होंने न्यायिक रिपोर्ट मिलने के बावजूद कार्रवाई में देरी की।
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₹25 लाख अंतरिम मुआवजा: चूंकि मृतक अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था, इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार को 4 सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता के बैंक खाते में ₹25 लाख जमा करने का निर्देश दिया गया।
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अभिलेखों का हस्तांतरण: छत्तीसगढ़ डीजीपी को आदेश दिया गया कि वे एक सप्ताह के भीतर विशेष दूत के जरिए मामले की सभी फाइलें CBI निदेशक को सौंपें।
इस मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को होगी, जहाँ CBI को अपनी प्रगति रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1: सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ कस्टोडियल डेथ मामले में क्या आदेश दिया है?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच छत्तीसगढ़ पुलिस से लेकर CBI को सौंप दी है और मृतक के परिवार को ₹25 लाख का अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया है।
Q2: इस मामले में FIR दर्ज करने में कितना समय लगा?
उत्तर: घटना जनवरी 2024 की है, लेकिन राज्य पुलिस ने 30 जुलाई 2026 को FIR दर्ज की—यानी लगभग ढाई साल की देरी के बाद।
Q3: मृतक की मौत का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: न्यायिक मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट के अनुसार, हिरासत के दौरान सिर में भोथरे हथियार से लगी गंभीर चोट के कारण उत्पन्न जटिलताओं से उसकी मृत्यु हुई थी।
Q4: CBI अपनी जांच रिपोर्ट कब जमा करेगी?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने CBI को मामले में त्वरित जांच का निर्देश दिया है और अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को तय की है।
Disclaimer (अस्वीकरण)
यह लेख सुप्रीम कोर्ट की हालिया सुनवाई और उपलब्ध न्यायिक दस्तावेजों के आधार पर जनहित में सूचनात्मक उद्देश्यों से तैयार किया गया है। कानूनी प्रक्रिया और CBI जांच के अंतिम निष्कर्षों के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
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