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छात्र प्रदर्शन FIR रद्द करने का Supreme Court का ऐतिहासिक फैसला: NEET-UG प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read
नई दिल्ली । मंगलवार, 1 सितंबर 2026
नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में हुए NEET-UG 2026 विवाद से जुड़े छात्र प्रदर्शनों पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और राहत देने वाला फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना कोई अपराध नहीं है और निर्दोष छात्रों के भविष्य व करियर को कानूनी झंझटों से सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश और कानूनी पहलू

  1. अनुच्छेद 142 का विशेष प्रयोग:
    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का उपयोग करते हुए 20 से 25 जुलाई 2026 के दौरान हुए प्रदर्शनों से जुड़ी दर्ज FIRs को बंद करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में इन्हीं घटनाओं को लेकर कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।
  2. शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार स्वीकार:
    अदालत ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि केवल किसी विरोध प्रदर्शन में भाग लेना अपने आप में आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता।
  3. 2,873 लोगों पर जारी रहेगी कार्रवाई:
    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राहत केवल निर्दोष छात्रों और प्रदर्शनकारियों के लिए है। करीब 2,873 ऐसे व्यक्ति जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक गतिविधियों, हिंसा, हत्या, अपहरण या संपत्ति को नुकसान पहुँचाने जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं, उनके खिलाफ कानून के अनुसार जाँच और कार्रवाई का रास्ता खुला रहेगा।
  4. पीड़ित छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजा:
    NEET-UG 2026 विवाद और परीक्षा रद्द होने के तनाव में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के संदर्भ में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्र सरकार को तीन महीने के भीतर एक व्यापक मुआवजा नीति और ढांचा तैयार करने का समय दिया गया है।
  5. 5 सितंबर का प्रस्तावित प्रदर्शन वापस:
    अदालत के इस राहत भरे आदेश और सरकार की प्रतिबद्धता के बाद प्रदर्शनकारी छात्र संगठनों ने 5 सितंबर को प्रस्तावित विरोध मार्च को आधिकारिक रूप से वापस ले लिया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: सुप्रीम कोर्ट ने किस अधिकार के तहत FIRs को रद्द किया?
Ans: सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्राप्त अपनी विशेष शक्तियों (पूर्ण न्याय करने की शक्ति) का उपयोग करते हुए यह आदेश पारित किया है।
Q2: क्या सभी प्रदर्शनकारियों को कानूनी मामलों से छूट मिल गई है?
Ans: नहीं, जिन 2,873 व्यक्तियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक कृत्य, हिंसा या संपत्ति के नुकसान के आरोप हैं, उनके खिलाफ जाँच जारी रहेगी। राहत केवल शांतिपूर्ण तरीके से भाग लेने वाले छात्रों के लिए है।
Q3: NEET-UG विवाद में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को क्या राहत मिलेगी?
Ans: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र सरकार 3 महीने के भीतर पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता/मुआवजा प्रदान करने के लिए एक ढांचा तैयार कर रही है।

Disclaimer (अस्वीकरण)

यह लेख सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आधिकारिक आदेशों और समाचार स्रोतों पर आधारित एक विधिक व विश्लेषणात्मक विवरण है। इसका उद्देश्य पाठकों को कानूनी घटनाओं की सटीक जानकारी प्रदान करना है। किसी भी कानूनी कार्यवाही या व्यक्तिगत मामले के संदर्भ में अधिकृत विधिक सलाहकार की मदद लें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।