नई दिल्ली |
पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री में पारदर्शिता लाने और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद कड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे Front-of-Package Warning Labels (FoPL) के क्रियान्वयन को लेकर 10 दिनों के भीतर एक स्पष्ट, वैज्ञानिक और निश्चित टाइमलाइन प्रस्तुत करें।
कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि दूसरे चरण के क्रियान्वयन की समयसीमा पारदर्शी और स्पष्ट नहीं होगी, तो यह महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुधार अनिश्चितकाल के लिए टल सकता है।
क्या है पूरा मामला और क्यों पड़ी कोर्ट के दखल की जरूरत?
भारत में डायबिटीज, मोटापा, और हृदय रोगों (NCDs) के तेजी से बढ़ते मामलों को देखते हुए पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में अत्यधिक चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट की मात्रा को स्पष्ट करना बेहद जरूरी हो गया है।
प्रस्तावित FoPL व्यवस्था के तहत खाद्य पदार्थों के पैकेट के सामने (Front Side) एक ऐसा चेतावनी चिन्ह लगाया जाना है, जिससे आम उपभोक्ता सामान खरीदते ही तुरंत समझ सके कि इसमें कौन-सा तत्व सेहत के लिए हानिकारक स्तर पर है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान निम्नलिखित मुख्य मुद्दों पर केंद्र और FSSAI से स्पष्टीकरण मांगा है:
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क्रियान्वयन की निश्चित समयसीमा: नीति का दूसरा चरण कब और कैसे लागू होगा, इसकी चरणबद्ध योजना।
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लेबल का डिज़ाइन और फ़ॉन्ट: चेतावनी लेबल कितना बड़ा होगा, उसका रंग क्या होगा और फ़ॉन्ट का आकार ऐसा हो जो आसानी से नजर आए।
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वैज्ञानिक पोषक सीमा (Nutritional Thresholds): चीनी, फैट और नमक का कौन-सा स्तर ‘उच्च या हानिकारक’ माना जाएगा, इसका वैज्ञानिक आधार।
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बच्चों में न्यूट्रिशनल लिटरेसी: बच्चों और अभिभावकों के बीच खान-पान को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए उठाए जाने वाले कदम।
जनस्वास्थ्य के लिहाज से यह फैसला क्यों है गेम-चेंजर?
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उपभोक्ता की सीधी सुरक्षा: अधिकांश लोग पैकेज्ड फूड के पीछे लिखे जटिल न्यूट्रिशन चार्ट को नहीं समझ पाते। पैकेट के सामने स्पष्ट चेतावनी मिलने से खरीदारी के समय सही फैसला लेना आसान होगा।
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उद्योगों पर जवाबदेही: समयसीमा तय होने से एफएमसीजी (FMCG) कंपनियां लेबलिंग टालने या टालमटोल करने का बहाना नहीं बना पाएंगी।
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कम उम्र में लाइफस्टाइल बीमारियों पर रोक: जंक फूड और प्रोसेस्ड स्नैक्स के बढ़ते चलन के बीच यह नीति बच्चों और युवाओं को अत्यधिक शर्करा व सोडियम के दुष्प्रभावों से बचाएगी।
मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को तय की गई है, जहाँ सरकार और FSSAI को अपना विस्तृत वैज्ञानिक प्लान और टाइमलाइन कोर्ट के सामने पेश करनी होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. Front-of-Package Warning Label (FoPL) क्या है?
उत्तर: यह पैकेज्ड फूड के पैकेट के सामने की तरफ लगाया जाने वाला एक चेतावनी लेबल है, जो उपभोक्ता को आसानी से बताता है कि उस उत्पाद में चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट की मात्रा तय सीमा से अधिक है या नहीं।
Q2. सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI को कितने समय का अल्टीमेटम दिया है?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI और केंद्र सरकार को 10 दिनों के भीतर वैज्ञानिक आधार पर तय की गई निश्चित टाइमलाइन पेश करने का निर्देश दिया है।
Q3. मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
उत्तर: इस मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को होगी।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक कार्रवाई और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध FSSAI नीतिगत ड्राफ्ट की जानकारी के आधार पर सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। इसे किसी भी कानूनी या आधिकारिक स्वास्थ्य सलाह के रूप में न लिया जाए।
